क्या अमित शाह ने राजोआना के मुद्दे पर संसद में झूठ बोला !

संसद में झूठ बोलने या दोमुंहा बयान देने के लिए कोई सजा है क्या? शायद नहीं, खासतौर से तब, जब झूठ बोलकर संसद को गुमराह करने वाले व्यक्ति के खिलाफ इस झूठ से प्रभावित होने वाले लोग ही कुछ न करना चाहे।

फोटो : सोशल मीडिया
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फराज अहमद

मंगलवार 3 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसबा में कहा कि सरकार ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में नहीं बदला है। ध्यान रहे कि अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

गौरतलब है कि राजोआना ने अपने साथियों के साथ मिलकर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की कार को पंजाब सचिवालय के बाहर बम से उड़ा दिया था। इस विस्फोट में बेअंत और उनके कार चालक समेत 16 लोगों की जान गई थी। मरने वाले बाकी लोगों में सुरक्षा कर्मी और सचिवालय में मौजूद आम लोग थे। राजोआना को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी जिसे पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी आतंकी कार्रवाई मानते हुए सही ठहराया था। लेकिन गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस फैसले के खिलाफ नजर आते रहे हैं।

इस साल 27 सितंबर को अमित शाह के गृह मंत्रालय ने पंजाब, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक और दिल्ली सरकार के साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिवों को एक संदेश भेजा। इस संदेश को मीडिया ने हूबहू प्रकाशित किया। संदेश को गोपनीय अंकित किया गया था और इस पर डिप्टी सेक्रेटरी (पीआर एंड एटीसी) अरुण सोबती के हस्ताक्षर थे। संदेश में कहा गया था, “मुझे निर्देश दिया गया है कि गुरुनानक देव जी के 550वें जन्मोत्सव पर भारत सरकार ने फैसला किया है कि 8 सिख कैदियों को विशेष माफी दी जाए और एक सिख कैदी की फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया जाए।” किसी को कोई संदेह या असमंजस न रहे, इसलिए पत्र के संलग्नक क तौर पर बलवंत सिंह राजोआना का नाम उसकी उम्र और जेल के रिकॉर्ड में मौजूद उसके पते के साथ भेजा गया और कहा गया कि जिस कैदी को फांसी की सजा हुई वह राजोआना है और उसकी फांसी की सजा माफ कर उम्रकैद में बदल दिया गया है।


रोचक बात यह है कि जिन अन्य 8 सिख कैदियों को रिहार करने की बात कही गई थी उनमें से एक को सुप्रीम कोर्ट बरी कर चुका है और दो पहले ही पटियाला जेल से जमानत पर छुटे हुए हैं।

लेकिन जब लुधियाना के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने मंगलवार को गृहमंत्री से पूछा कि क्या राजोआना की फांसी को माफ कर दिया गया है, तो गृहमंत्री अमित शाह ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “कृपया मीडिया रिपोर्ट पर ध्यान न दें। कोई माफी नहीं दी गई है।” ध्यान रहे कि रवनीत सिंह शहीद पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं।

गृहमंत्री के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में फिरोजपुर से शिरोमणि अकाली दल के सांसद सुखबीर बादल ने चंडीगढ़ में शाह के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इससे सिख समुदाय में तकलीफ के साथ ही गुस्सा भी है। उन्होंने कहा कि राजोआन बिना किसी पेरोल या छूट के बीते 30 साल से जेल में है, ऐसे में उसे मानवता के आधार पर कुछ छूट मिलनी चाहिए।

यहां जानना जरूरी है कि शिरोमणि अकाली दल बीजेपी का पुराना सहयोगी है और राजोआना को माफी देने का फैसला भी अकाली दल के आग्रह पर लिया गया था। अकाली दल बीते करीब एक दशक से राजोआना की माफी की कोशिशें कर रहा है।


सुखबीर बादल ने कहा, “हम सब आज बहुत दुखी हैं। हमने सोचा था कि शायद इस मामले पर हम कामयाब हुए हैं, क्योंकि पिछले महीने खबरें आई थी कि राजोआना को माफी दे दी गई है। लेकिन सरकार का यह बयान तकलीफ देने वाला है।”

इस सबके बीच सवाल यह उठता है कि क्या गृहमंत्री ने लोकसभा को इस मामले में गुमराह किया, क्योंकि करीब दो महीने पहले जारी गृह मंत्रालय के अधिकारिक संदेश में तो राजोआना को माफी की बात कही गई थी, या फिर बीजेपी सिख समुदाय को मूर्ख बनाकर सिखों के बीच राजनीतिक फायदा उठाना चाहती थी, जो करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के खुलने से उत्साह में थे।

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