DUSU चुनाव में हिंसा पर दिल्ली HC सख्त, विजय जुलूस पर लगाई रोक, 140 उम्मीदवारों को नोटिस
DUSU चुनाव में हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर रोक लगा दी है और 140 उम्मीदवारों समेत छात्र संगठनों को नोटिस जारी किया है।

DUSU चुनाव में हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर रोक लगा दी।
कोर्ट ने 140 उम्मीदवारों और सभी छात्र संगठनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया ।
बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले और हथियारों के प्रदर्शन पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।
पुलिस ने 998 चालान, छह FIR और चार गिरफ्तारियों की जानकारी कोर्ट को दी ।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के दौरान हिंसा और चुनावी नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने जीत के बाद निकाले जाने वाले विजय जुलूस पर रोक लगा दी है। साथ ही चुनाव लड़ रहे सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि चुनाव नियमों के उल्लंघन के लिए सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए। कोर्ट ने सभी से दो सप्ताह में जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं पर सुनवाई की। एक तस्वीर में छात्र को बंदूक लहराते हुए दिखाए जाने पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई और सवाल किया कि ऐसे लोग छात्र कैसे हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि खुलेआम हथियार दिखाने वाले वास्तविक छात्रों के अवसरों को प्रभावित कर रहे हैं।
बिना नंबर प्लेट की गाड़ियों और हथियारों पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले और हथियारों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि इतनी बड़ी पुलिस फोर्स तैनात होने के बावजूद बिना नंबर प्लेट और उम्मीदवारों के नाम वाली गाड़ियों को दिल्ली की सड़कों और नॉर्थ कैंपस के अंदर-बाहर जाने की अनुमति कैसे मिली।
डीसीपी नॉर्थ से कोर्ट ने पूछा कि 10-20 गाड़ियों का बड़ा काफिला कैसे निकल गया और पुलिस ने उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे काफिलों से डर, आतंक और दबदबे की भावना पैदा होती है। उम्मीदवारों के कार की छत और बोनट पर खड़े होने को लेकर भी कोर्ट ने सवाल किया।
डीसीपी नॉर्थ ने अदालत को बताया कि पुलिस लगातार गाड़ियों की जांच कर रही है। सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने बताया कि 998 चालान किए गए हैं और वीडियो में नजर आने वाले लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आरसी भी जब्त की जाएंगी। पुलिस की ओर से छह FIR और चार गिरफ्तारियों की जानकारी भी दी गई। ट्रैफिक से जुड़े मामलों में बिना लाइसेंस वाले वाहनों के 5,737 चालान किए जाने की बात भी बताई गई।
टीचर पर हमले से लेकर चुनावी नियमों तक, कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक टीचर पर हमले को लेकर भी सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में क्या हुआ और गिरफ्तार किया गया व्यक्ति छात्र है या नहीं। एएसजी ने गिरफ्तारी की बात कही। कोर्ट ने यह भी पूछा कि कार्रवाई की जानकारी कॉलेज प्रशासन को दी गई थी या नहीं और संबंधित छात्रों के खिलाफ कॉलेज स्तर पर क्या कदम उठाए गए।
डीयू प्रशासन ने बताया कि उसने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि इन उल्लंघनों के लिए सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाया जा सकता है। कोर्ट ने पिछले चुनाव के दौरान पारित आदेश का भी जिक्र किया और पूछा कि क्या पिछले चुनाव में जीत के बाद किसी उम्मीदवार ने शिक्षक को थप्पड़ नहीं मारा था। कोर्ट ने कहा कि जीत के बाद व्यक्ति को विनम्र होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह किसी एक संगठन के साथ अलग व्यवहार नहीं कर रहा है। सभी छात्र संगठनों और सभी उम्मीदवारों को नोटिस दिए जा रहे हैं। कोर्ट ने संगठनों के खिलाफ सामूहिक चुनावी नुकसान की भरपाई पर भी जवाब मांगा है और उम्मीदवारों की सूची तथा पते उपलब्ध कराने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति साल-दर-साल दोहराई जा रही है और बदलाव नजर नहीं आ रहा। अदालत के मुताबिक चुनाव के दौरान छात्रों की ओर से गलत गतिविधियों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का बार-बार और खुले तौर पर उल्लंघन हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि इन हालात को हर स्तर पर रोकने की जरूरत है और छात्रों के साथ-साथ छात्र संगठनों पर भी सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाने का प्रस्ताव है।
इससे पहले गुरुवार को हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हुआ तो वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगाई जा सकती है। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “लोकतंत्र को आपराधिक समाज में नहीं बदला जा सकता।” अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस को केवल इसलिए कार्रवाई से पीछे नहीं हटना चाहिए क्योंकि संबंधित लोग छात्र हैं।
