अर्थतंत्र की खबरें: शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी और अल नीनो बढ़ाएगा बिजली का संकट
दिग्गज बैंक शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार दो माह के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया। लगातार चौथे सत्र की बढ़त के दौरान सेंसेक्स में 521 अंक की तेजी रही जबकि निफ्टी 160 अंक चढ़ गया।

सकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 0.60 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 521.16 अंक यानी 0.67 प्रतिशत बढ़कर 78,285.07 पर पहुंच गया, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 159.50 अंकों यानी 0.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,430.35 पर बंद हुआ।
दिन के सत्र में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,763.91 से 0.22 प्रतिशत यानी 176.98 अंकों की बढ़त के साथ 77,940.90 पर खुला और दिन के कारोबार में यह 634.14 अंकों यानी 0.81 प्रतिशत की उछाल के साथ 78,398.06 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,270.85 से 0.14 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,306.85 पर खुला और दिन के कारोबार में यह 0.77 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,458.65 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो, विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन कुल मिलाकर सकारात्मक रहा, जिसमें निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा 1.81 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.48 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 1.36 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.12 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी मेटल, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। जबकि इसके विपरीत, निफ्टी मीडिया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.95 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद पीएसयू बैंक में 0.88 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, बजाज ऑटो और एमएंडएम शामिल रहे, जबकि नुकसान उठाने वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, मैक्स हेल्थकेयर, टीसीएस, कोल इंडिया और बजाज फिनसर्व शामिल रहे।
इस दौरान, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के 480.24 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 482.33 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे एक ही सत्र में निवेशकों को करीब 2 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।
पश्चिमी एशिया में भू-राजनीतिक संघर्षों में नरमी, कच्चे तेल की स्थिर कीमतों, पहली तिमाही के नतीजों से पहले मजबूत भावना और ऑटो, रियल्टी और तेल एवं गैस शेयरों में खरीदारी के चलते घरेलू बाजार में लगातार चौथे सत्र में तेजी बरकरार रही।
एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, फरवरी 2026 के आखिरी सप्ताह के बाद पहली बार निफ्टी 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) के ऊपर बंद हुआ, जिसे बाजार के मध्यम अवधि के ट्रेंड में सुधार का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
भारत में कमजोर मानसून के बाद भी खाद्य उत्पादों की कीमतें स्थिर: रिपोर्ट
भारत में कमजोर मानसून के बाद भी खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में महंगाई काबू में है। साप्ताहिक खुदरा आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत और अंडों की कीमतों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अनाज की कीमतों में 0.5 प्रतिशत और तेल व फैट की कीमतों में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
सालाना आधार पर, तेल और फैट की कीमतों में 11 प्रतिशत, अंडों में 6 प्रतिशत, सब्जियों में 3 प्रतिशत, दूध में 3 प्रतिशत, मसालों में 3 प्रतिशत, अनाज में 2 प्रतिशत और दालों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे मुख्य खाद्य-उत्पादक राज्यों में मानसून की लगातार कमी से आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति पर खतरा मंडरा सकता है और कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 3 जुलाई तक कुल बारिश लंबे समय के औसत से 31 प्रतिशत कम रही।
जून के महीने में बारिश लंबे समय के औसत से 40 प्रतिशत कम रही, जिससे यह पिछले दशक में बारिश के लिहाज से सबसे खराब जून का महीना बन गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बुवाई का काम कम हो गया है, क्योंकि मानसून कमजोर बना हुआ है, जिससे जलाशयों में पानी का स्तर बहुत कम हो गया है।
पूरे देश में जलाशयों का जलस्तर उनकी क्षमता का सिर्फ 26 प्रतिशत है और पिछले साल इसी समय की तुलना में 39 प्रतिशत कम है।
भारत की ऊर्जा प्रणाली पर पड़ेगा अल नीनो का सबसे ज्यादा असर : रिपोर्ट
इस साल का अल नीनो का असर भारत की उर्जा प्रणाली पर दुनिया में सबसे अधिक देखने को मिलेगा। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के एक नए विश्लेषण में यह निष्कर्ष निकाला गया है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है और जिससे दुनिया का तापमान बढ़ता है।
भारत के सामने दोहरी चुनौती है -- अल नीनो की वजह से हवा और बारिश में कमी आने से टर्बाइन और पनबिजली उत्पादन तो घटेगा ही, साथ ही तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (एसी) की मांग भी बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक साल के अंदर ठंडक प्रदान करने वाले उपकरणों से ज्यादा इस्तेमाल से अतिरिक्त मांग कुल मिलाकर 10 टेरावाट घंटे (टीडब्ल्यूएच) हो सकती है -- जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक चौथाई हिस्सा है।
मौसम की मार से हिमाचल में सेब का उत्पादन 40 प्रतिशत घटने की आशंका
हिमाचल प्रदेश की 5,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गंभीर और अभूतपूर्व जलवायु संकट का सामना कर रही है। अनुमान है कि राज्य में सेब का उत्पादन पिछले साल (वर्ष 2025) के 6.99 लाख टन से लगभग 40 प्रतिशत घट सकता है।
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मौसम की अनिश्चितताओं, जैसे सर्दियों में कम बर्फबारी, वसंत ऋतु में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तापमान में उतार-चढ़ाव का असर सेब के उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। सेब राज्य के आठ जिलों में कृषि अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है।
उन्होंने कहा कि राज्य में सेब का उत्पादन वर्ष 2025 में 6.99 लाख टन था, जिसके वर्ष 2026 में लगभग 4.36 लाख टन (लगभग 2.15 करोड़ बक्से) रहने का अनुमान है। यह 2.63 लाख टन की भारी गिरावट है।
रुपया 20 पैसे टूटकर 95.38 प्रति डॉलर पर
रुपया सोमवार को 20 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.38 पर आ गया। विदेशी बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने से रुपये पर दबाव पड़ा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.25 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह डॉलर के मुकाबले 95.22 से 95.48 के दायरे में रहा।
अंत में रुपया 95.38 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव की तुलना में 20 पैसे की गिरावट है। रुपया शुक्रवार को 17 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.18 पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान में शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से रुपया कमजोर हुआ, क्योंकि बाजार में इस वर्ष अब भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजार में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये को कुछ समर्थन प्रदान किया।’’
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