चुनाव आयोग में फेरबदल, सीमा खन्ना के IT विभाग पर नई निगरानी, मनीष गर्ग की जिम्मेदारियां भी बंटी

चुनाव आयोग ने जिम्मेदारियों का नया बंटवारा किया है। सीमा खन्ना के IT विभाग, मनीष गर्ग और प्रकाश राजपुरोहित की भूमिका में बदलाव हुआ है।

फोटोः IANS
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  • चुनाव आयोग ने नया कार्य आवंटन आदेश जारी कर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नरों और महानिदेशकों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है।

  • IT महानिदेशक सीमा खन्ना को अब वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर पवन कुमार शर्मा के माध्यम से अपने विभाग की फाइलें भेजनी होंगी।

  • मनीष गर्ग के पास चुनावी योजना, EVM और चुनावी डेटाबेस की जिम्मेदारी बरकरार रखी गई है, जबकि प्रकाश राजपुरोहित उनकी सहायता करेंगे।

  • यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब चुनाव आयोग में अधिकारियों के बीच कथित मतभेद और वोटर लिस्ट के डिजिटल सिस्टम को लेकर विवाद चल रहा है।

चुनाव आयोग में अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे को लेकर जारी विवाद के बीच प्रशासनिक बदलाव किया गया है। आयोग ने डिप्टी इलेक्शन कमिश्नरों (DEC) और महानिदेशकों (DG) की जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा किया है। 4 नवंबर को जारी नए आदेश के तहत IT महानिदेशक सीमा खन्ना के कामकाज की निगरानी की व्यवस्था बदली गई है। वहीं, वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग के पास मौजूद कुछ जिम्मेदारियां भी दूसरे अधिकारियों को सौंपी गई हैं।

यह बदलाव नए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर प्रकाश राजपुरोहित की नियुक्ति के बाद किया गया है। नए आदेश के मुताबिक, वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर पवन कुमार शर्मा को IT, ICT और शिकायत निवारण से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, प्रकाश राजपुरोहित को चुनावी योजना से जुड़े मामलों में मनीष गर्ग की सहायता करने के लिए कहा गया है। आयोग के भीतर यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब अधिकारियों के बीच कथित असहमति और अधिकारों के बंटवारे को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है।

सीमा खन्ना के IT विभाग की जिम्मेदारी अब पवन कुमार शर्मा के पास

चुनाव आयोग के नए आदेश के तहत IT महानिदेशक सीमा खन्ना को अपने विभाग से जुड़ी फाइलें वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर पवन कुमार शर्मा के माध्यम से भेजनी होंगी। पवन कुमार शर्मा के पास IT, ICT के अलावा शिकायत और जन शिकायत निवारण प्रणाली (PGRS) की जिम्मेदारी भी रहेगी। इसके साथ ही उन्हें राजनीतिक दलों, चुनाव खर्च नीति, पर्यवेक्षक विभाग और समन्वय का काम भी सौंपा गया है। उनके पास नॉर्थ ईस्ट-II, ईस्ट-II और साउथ-II जोन का प्रभार भी रहेगा।

सीमा खन्ना का विभाग मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम को लेकर पहले से विवादों में रहा है। आरोप लगाए गए थे कि चुनाव आयोग के डिजिटल वोटर लिस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को केंद्रीकृत करने और सॉफ्टवेयर में पाबंदियां लगाने के कारण राज्य स्तर के अधिकारियों की मतदाता सूची तक पहुंच सीमित हो गई थी। इनमें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) भी शामिल थे, जिनकी जिम्मेदारी मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की होती है। इस मामले को लेकर भी आयोग के भीतर सवाल उठे थे।


मनीष गर्ग के पास EVM और चुनावी डेटाबेस की जिम्मेदारी बरकरार

नए कार्य आवंटन में मनीष गर्ग के पास चुनावी योजना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और चुनावी डेटाबेस प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी बनी रहेगी। इसके अलावा बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ वाले ईस्ट-I तथा उत्तर प्रदेश वाले नॉर्थ-III जोन का प्रभार भी उनके पास रहेगा। वहीं, नए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर प्रकाश राजपुरोहित चुनावी योजना से जुड़े मामलों में गर्ग की सहायता करेंगे। उनके पास परिसीमन विभाग की जिम्मेदारी भी रहेगी। चुनावी योजना से संबंधित फाइलें राजपुरोहित को मनीष गर्ग के माध्यम से भेजनी होंगी।

डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर भानु प्रकाश येतुरु प्रशासन, स्थापना, मतदाता सूची और RTI से जुड़े विभागों का कामकाज देखेंगे। इस तरह नए आदेश में आयोग के अलग-अलग विभागों और जोन की जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा किया गया है।

28 जुलाई के आदेश से शुरू हुआ था विवाद

चुनाव आयोग में अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे को लेकर विवाद की शुरुआत 28 जुलाई के एक आदेश से हुई थी। उस समय डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संजय कुमार का तबादला दिल्ली सरकार में कर दिया गया था। सीमा खन्ना पहले संजय कुमार को रिपोर्ट करती थीं। उनके आयोग से जाने के बाद मनीष गर्ग को संजय कुमार का संपर्क अधिकारी बनाया गया था। इसके बाद गर्ग ने 28 जुलाई को एक आदेश जारी किया, जिसमें सीमा खन्ना को सीधे चुनाव आयोग को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था।

इस आदेश पर चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। दोनों का आरोप था कि वरिष्ठ और उनके समकक्ष अधिकारियों के कामकाज के आवंटन से जुड़ा आदेश जारी करने से पहले उनसे कोई चर्चा नहीं की गई। दोनों चुनाव आयुक्तों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को लगभग एक जैसे पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इन पत्रों में फाइलों के आवागमन में बदलाव और फैसले लेने की प्रक्रिया में परामर्श नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। विवेक जोशी ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रशासन विभाग से मांगी गई फाइल उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।

बाद में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि 28 जुलाई का कार्य आवंटन आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ। आयोग के मुताबिक, 30 जुलाई को एक अन्य आदेश जारी कर पहले किए गए बदलावों को वापस ले लिया गया था। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया था कि 4 नवंबर के नए आदेश को जुलाई के आदेश की वापसी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि जुलाई वाला आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ था। अधिकारी के मुताबिक, नया कार्य आवंटन आयोग का सर्वसम्मत फैसला है।


SIR और वोटर लिस्ट विवाद के बीच बढ़ी चर्चा

चुनाव आयोग के भीतर अधिकारियों के बीच कथित मतभेद का मामला विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी चर्चा में रहा है। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा था कि चुनाव आयुक्तों के बीच हुए पत्राचार को इस बात का सबूत नहीं माना जा सकता कि SIR से जुड़े अहम फैसले दूसरे चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे। आयोग का कहना है कि उसके सभी फैसले नियमों के मुताबिक सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए गए हैं।

दूसरी ओर, 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सीमा खन्ना के नेतृत्व में लागू किए गए नए IT प्रोटोकॉल और सिस्टम के कारण मतदाता सूची का डेटाबेस उन अधिकारियों की पहुंच से भी बाहर हो गया था, जिन्हें मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कई मुद्दों पर असहमत होने की बात भी कही गई थी।

इस विवाद ने राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ाई है। पिछले दो महीनों में कार्यकर्ताओं, कॉकरोच जनता पार्टी और संसद में विपक्षी दलों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली में मेट्रो सेवाओं पर रोक, इंटरनेट बंदी और निषेधाज्ञा जैसे कदम उठाए गए। करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और विवादित SIR को रद्द करने की मांग कर रहा है।

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