योगी के यूपी में बेरोजगारी का हाल: विज्ञापनों में लहलहाता रोजगार, सड़कों पर पुलिस लाठियों की मार

योगी ने तो सत्ता संभालने के बाद ही यूपी के बेरोजगारों को यह कहकर नकारा घोषित कर दिया था कि हम तो नौकरियां देना चाहते हैं लेकिन हमें योग्य आवेदक ही नहीं मिल रहे हैं। लेकिन प्रदेश के बाहर नकारा युवाओं को नौकरी कैसे मिल रही है?

प्रतीकात्मक फोटो
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के संतोष

#UPElections के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने तमाम नौकरियों और रोजगार के दावे किए और विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च किए, लेकिन वास्तविकता यह है कि नौकरी मांगने वालों को नाकारा कहने वाले योगी के राज में युवाओँ पर पुलिस लाठी बरसाती है। आंकड़ों से समझिए हकीकत

वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह ने बीते दिनों फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा, ‘बरेली स्टेशन पर 22 लड़के मिले। ये सभी गोरखपुर के थे। आपस में बतिया रहे थे। ये सभी बीती रात ही ठंड में ठिठुरते हुए आर्मी की परीक्षा देने आए थे। सुबह 7 बजे जब ये सेटेलाइट स्थित आर्मी सेंटर पहुंचे तो बताया गया कि कोरोना के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के। बच्चों का दुख देखा नहीं गया। रात 2 बजे से सुबह 6 बजे तक इस भीषण सर्दी में न जाने कितने बच्चों ने कष्ट सहा होगा, ये सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।’ लाचार लोगों का दर्द सोशल मीडिया पर ही अधिक दिखता है क्योंकि रोजगार और नौकरी मांगने वालों पर पुलिस लाठियां बरसाती दिखती है या फिर उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करती है।

यूपी सरकार भले ही लाखों नौकरियों देने के दावे में करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर खर्च करे लेकिन सच्चाई तो यही है कि योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने के बाद से 8 बड़ी परीक्षाओं का पेपर लीक हो चुका है। योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च, 2017 को मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला था। चार महीने भी नहीं गुजरे कि 25 और 26 जुलाई, 2017 को यूपी पुलिस दारोगा भर्ती का पर्चा लीक हो गया। यूपीटीईटी को लेकर सरकार की फजीहत हुई। उसी साल 28 नवंबर को यूपी टीईटी की परीक्षा का पेपर लीक हो गया। 13 लाख से अधिक परीक्षार्थियों को 23 जनवरी को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। इस परीक्षा में 2017 में हुई टेट परीक्षा के 80 फीसदी से अधिक प्रश्नों को दोबारा पूछ लिया गया। मार्च, 2018 में यूपीपीसीएल का पेपर लीक हुआ।

यूपीएसएसएससी लोवर सबऑर्डिनेट परीक्षा में 641 पदों के लिए 31 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने से इसे भी रद्द कर दिया गया। ट्यूबवेल ऑरपेटर से लेकर यूपी आरक्षी नागरिक पुलिस की परीक्षाएं भी पेपर लीक होने से रद्द हुईं। मई, 2018 में ग्राम विकास अधिकारी के लिए विज्ञापन निकला तो 9 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। अगस्त, 2019 में रिजल्ट आया लेकिन 18 महीने बाद धांधली की शिकायत पर इसे रद्द कर दिया किया।

69,000 शिक्षक भर्ती को लेकर लगातार आंदोलन हो रहा है। शिक्षक भर्ती को लेकर परीक्षा हुई लेकिन परिणाम आया तो धांधली की कलई खुलने लगी। 150 नंबर के प्रश्न पत्र में 145 नंबर हासिल करने वाले राष्ट्रपति का नाम भी नहीं बता सके। पूरी प्रक्रिया लटकी हुई है। बीते साल 6 अगस्त को यूपीएसएसएससी की परीक्षा 70 हजार सीसीटीवी की निगरानी में हुई लेकिन पेपर आउट हो गया। 4 अप्रैल, 2021 में हुई फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा का परिणाम नहीं आया। तमाम परीक्षाएं ऐसी हैं जिनका अभी तक परिणाम ही नहीं है।


नौकरियों में ‘रामराज्य’?

योगी सरकार कभी साढ़े चार लाख, तो कभी साढ़े छह लाख सरकारी नौकरियां देने का दावा करती है। भाजपा के विज्ञापनों में दावा किया जा रहा है कि योगी सरकार में साढ़े चार लाख युवाओं को नौकरी मिली। सरकारी अफसर ऑफ द रिकॉर्ड कहते हैं कि इनमें बेसिक शिक्षा विभाग में विभिन्न पदों पर 1,25,987 से अधिक, चिकित्सा शिक्षा में 1,112, सहकारिता में 726, नगर विकास में 700, सिंचाई एवं जल संसाधन में 3309, तकनीकी शिक्षा में 365, वित्त विभाग में 614, कृषि विभाग में 2059, आयुष विभाग में 1065, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 28622, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण में 8556 और अन्य विभागों के तहत 8,132 से अधिक भर्तियां की गई हैं। वहीं साढ़े तीन लाख से ज्यादा युवाओं को संविदा पर सरकारी नियुक्ति दी गई है। योगी सरकार का दावा एमएसएमई इकाइयों में सवा दो करोड़, तो बड़ी औद्योगिक इकाइयों में 3 लाख युवाओं को रोजगार देने का भी है।

इन दावों की हवा बेरोजगारों की फौज निकाल रही है। चिल्लूपार से विधायक विनय शंकर तिवारी कहते हैं कि ‘जितनी नौकरियां नहीं मिलीं, उससे अधिक तो मार्केटिंग पर सरकार ने खर्च कर दिया। पहली बार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के नियुक्ति पत्र भी मुख्यमंत्री ने समारोहों में दिए। जितनी रकम परीक्षा में नहीं खर्च हुई, उससे अधिक नियुक्ति पत्र बांटने के तामझाम में खर्च किए गए।’

सर्वे में 29.72 लाख युवा बेरोजगार

सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी के ताजा सर्वे के मुताबिक, यूपी में 29.72 लाख बेरोजगारों को नौकरी की तलाश है। इन बेरोजगारों में 19.34 लाख 20 से 24 साल के हैं जो विभिन्न परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। सपा नेता विश्वजीत त्रिपाठी कहते हैं कि ‘योगी जी चैनलों और अखबारों के विज्ञापनों में छह लाख से अधिक सरकारी नौकरी, दो करोड़ से अधिक प्राइवेट सेक्टर में नौकरी का दावा कर रहे हैं। तो सर्वे में इतने बेरोजगार कहां से आ गए है? सपा शासनकाल के अंतिम वर्ष, यानी 2017 में बेरोजगारों की संख्या सिर्फ 9.93 लाख थी। 2 करोड़ हर साल नौकरी देने में फेल केन्द्र सरकार अब मेक इन इंडिया में 60 लाख को रोजगार का झुनझुना दे रही है।’

राजस्थान के कोटा में कोचिंग में पढ़ाने वाले गणित के शिक्षक प्रखर श्रीवास्तव गोरखपुर के रहने वाले हैं। वह कहते हैं कि ‘योगी ने तो सत्ता संभालने के बाद ही यूपी के बेरोजगारों को नकारा घोषित कर दिया था जब उन्होंने यह कह कर उनका मखौल उड़ाया था कि हम तो नौकरियां देना चाहते हैं लेकिन हमें योग्य आवेदक ही नहीं मिल रहे हैं। लेकिन प्रदेश के बाहर नकारा युवाओं को नौकरी कैसे मिल रही है?’

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