महाराष्ट्र में सूखे का बढ़ता संकट, 19 जिलों में बारिश का लंबा ब्रेक, खरीफ फसलों पर मंडराया खतरा

महाराष्ट्र के 19 जिलों के 83 तालुकों में 20 दिनों से ज्यादा समय से बारिश नहीं हुई है। खरीफ फसलों पर संकट के बीच सरकार ने प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है।

फोटो: IANS
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महाराष्ट्र के 19 जिलों के 83 तालुकों में 20 दिनों से ज्यादा समय से बारिश नहीं हुई है। लंबे सूखे के कारण खरीफ की फसलों पर संकट गहराता जा रहा है और कई जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कई मंत्रियों ने हालात पर चिंता जताई। सरकार ने फिलहाल किसी राहत पैकेज का ऐलान नहीं किया है, लेकिन मुख्यमंत्री ने प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

5 अक्टूबर के बाद होगा फसल नुकसान का आधिकारिक सर्वे

कैबिनेट की चर्चा के बाद सरकार ने साफ किया कि फिलहाल सूखे की औपचारिक घोषणा नहीं की जा सकती। कृषि विभाग की प्रस्तुति के मुताबिक, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एनडीआरएफ) के दिशा-निर्देशों और सूखा प्रबंधन से जुड़े केंद्रीय नियमों के तहत फसल नुकसान का आधिकारिक सर्वे और जमीनी जांच 5 अक्टूबर के बाद ही की जानी चाहिए।

सरकार का कहना है कि इससे पहले पंचनामा और नुकसान का आकलन करने पर किसानों को केंद्रीय सहायता पैकेज से वंचित होने का खतरा हो सकता है। समय से पहले किए गए आकलन से नुकसान का गलत अनुमान लगने की आशंका भी बताई गई है। इस बीच सरकार किसानों के लिए राहत उपायों की विस्तृत सूची तैयार कर रही है और अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने को कहा गया है।

क्षेत्रीय रिपोर्टों की समीक्षा में सामने आया कि 18-19 जिलों में लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिमी महाराष्ट्र के कई इलाके इससे सबसे ज्यादा प्रभावित बताए गए हैं।


बांधों का पानी पीने के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों तथा फील्ड प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने और शुरुआती राहत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित जिलों में स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संभावित पानी के संकट को रोकने के लिए मौजूदा बांधों के जल भंडार को प्राथमिकता दी जाए।

प्रशासन को इन जल भंडारों को सख्ती से सिर्फ पीने के पानी के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले आधिकारिक सर्वे का इंतजार कर रही है, लेकिन इसके साथ ही आपातकालीन राहत सूचियां तैयार की जा रही हैं। पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता का आकलन करने और बची हुई खरीफ फसलों को सुरक्षात्मक सिंचाई उपलब्ध कराने के लिए किसानों का मार्गदर्शन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बीड में 37 फीसदी से ज्यादा बोया क्षेत्र प्रभावित

राज्य कृषि विभाग की क्षेत्रवार फसल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, बीड में बोए गए क्षेत्र का 37.21 प्रतिशत हिस्सा खराब हो गया है। जालना में 27.83 प्रतिशत और छत्रपति संभाजीनगर में 7.06 प्रतिशत हिस्सा खराब हुआ है।

लातूर, धाराशिव और परभणी में हल्की मिट्टी वाली जमीन पर सोयाबीन, मूंग, उड़द और कपास की फसलें सूख रही हैं। सोयाबीन की फसलों में 'येलो मोजेक वायरस' का बड़े पैमाने पर प्रकोप भी देखा गया है।

पश्चिमी महाराष्ट्र के बारिश पर निर्भर सोलापुर, सतारा, सांगली और अहिल्यानगर जैसे इलाकों में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण मूंग, उड़द, सोयाबीन, मक्का और बाजरा की फसलें प्रभावित हुई हैं। यहां पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका जताई गई है।


विदर्भ में सोयाबीन-कपास पर खतरा, धान की रोपाई भी प्रभावित

विदर्भ में सोयाबीन और कपास की फसलों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अमरावती, अकोला, बुलढाणा और वाशिम के कई तालुकों में 2 से 3 हफ्ते तक बारिश नहीं हुई है। हल्की मिट्टी वाली जमीन पर सोयाबीन की फसलें सूख गई हैं। सिंचाई की सुविधा वाले किसान फसल बचाने के लिए सुरक्षात्मक सिंचाई कर रहे हैं।

कम बारिश के कारण नागपुर, चंद्रपुर और गढ़चिरौली के कुछ हिस्सों में धान की रोपाई में देरी हुई है। उत्तरी महाराष्ट्र के नंदुरबार और नासिक के कुछ तालुकों में बारिश की कमी से मक्का, कपास और दूसरी फसलों की बढ़त रुक गई है। हालांकि, धुले और जलगांव के कुछ हिस्सों में हाल में हुई बारिश से खरीफ फसलों को थोड़ी राहत मिली है। नंदुरबार में सामान्य बारिश का केवल 46.6 प्रतिशत ही दर्ज किया गया है।

सोलापुर, कोल्हापुर, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली, अकोला, वाशिम, अमरावती, वर्धा, नागपुर और चंद्रपुर में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है।

विपक्ष ने तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की

इस बीच कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार, सोलापुर की सांसद प्रणति शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं समेत विपक्ष ने प्रभावित जिलों में तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि 19 जिलों और 83 से ज्यादा तालुकों में बारिश की भारी कमी है और आने वाले समय में चारे तथा पानी की किल्लत का खतरा बढ़ सकता है।

विपक्ष ने राज्य सरकार से मॉनसून के बाद की औपचारिक समय-सीमा का इंतजार किए बिना आपातकालीन राहत पैकेज जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही फसल ऋण माफ करने, चारे के कैंप शुरू करने और टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।

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