फेसबुक विवाद: अमेरिका में भी उठी अंखी दास को हटाने की मांग, नागरिक अधिकार समूहों ने नेतृत्व पर उठाए सवाल

अमेरिकी अखबार ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत में फेसबुक के कर्मचारियों ने बीजेपी से जुड़े कुछ लोगों के अकाउंट्स और पेजों को नफरत फैलाने की वजह से बैन करने की सिफारिश की थी, लेकिन भारत में उसकी पॉलिसी प्रमुख अंखी दास ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।

फोटोः सोशल मीडिया
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फेसबुक प्रमुख मार्क जकरबर्ग और कंपनी में दूसरी सबसे बड़ी अधिकारी शेरिल सैंडबर्ग को लिखे खत में अमेरिका के कई नागरिक अधिकार समूहों द्वारा कंपनी की भारत में पॉलिसी प्रमुख अंखी दास को सिविल राइट्स ऑडिट के नतीजे आने तक हटाने की मांग की गई है। अधिकार समूहोंं ने खत में लिखा, "फेसबुक को और अधिक ऑफलाइन हिंसा में भागीदार नहीं होना चाहिए। एक और नरसंहार में तो बिलकुल भी नहीं। लेकिन कोई कदम न उठाने का जो रवैय्या कंपनी बार-बार दिखा रही है, वो इतना लापरवाही भरा है कि वो मिलीभगत के बराबर है।"

नागरिक अधिकार समूहों ने खत में आगे लिखा, "म्यांमार में रोहिंग्या नरसंहार में फेसबुक की भूमिका की असलियत के बारे में अब सब जानते हैं। इस रौशनी में अब यह कोई रहस्य नहीं रह गया है कि ऑनलाइन हिंसा और नफरत आसानी से असली जिंदगी में भी हिंसा का कारण बन जाती है।" म्यांमार में नरसंहार के बाद फेसबुक की आलोचना धीमे और निष्प्रभावी कदम उठाने को लेकर हुई थी। फेसबुक पर नफरत से भरी सामग्री को तत्काल हटाने को लेकर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगे थे।

इस खत पर 40 से अधिक समूहों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें सर्दर्न पॉवर्टी लॉ सेंटर, विटनेस, मुस्लिम एडवोकेट्स और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स एगेंस्ट हेट एंड एक्स्ट्रिमिज्म शामिल हैं। भारत में फेसबुक को लेकर पहले से ही राजनीतिक उठा पटक जारी है और यह खत उस रिपोर्ट के बाद लिखा गया, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम विरोधी पोस्ट को फेसबुक द्वारा नहीं हटाया गया था। यह पोस्ट सत्ताधारी पार्टी के नेता के पेज पर डाली गई थी।

खत में लिखा गया है, "फेसबुक इंडिया द्वारा किए गए नुकसान को अब तक निर्धारित नहीं किया गया है, लेकिन जो हम अब तक जानते हैं वह इस बात पर जोर देता है कि गंभीर और तत्काल रूप से इस मांग पर ध्यान दिया जाना चाहिए।" फेसबुक पहले यह मान चुका है कि भारत में नफरत से भरे बयान से लड़ने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। सोशल मीडिया कंपनी ने इस खत पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

पिछले हफ्ते ही फेसबुक ने बीजेपी के नेता टी राजा सिंह को बैन कर दिया था। टी राजा पर मुस्लिम विरोधी बयान देने के आरोप लगते आए हैं। हाल में टी राजा को बैन करते हुए फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा था कि उन्होंने नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री को लेकर फेसबुक की पॉलिसी का उल्लंघन किया है। टी राजा तेलंगाना से बीजेपी के विधायक हैं। राजा ने रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ बयान में कहा था कि रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों को गोली मार देनी चाहिए।

भारत में फेसबुक पर बीजेपी के प्रति पक्षपात के आरोपों की झड़ी लग रही है, लेकिन भारत उसके लिए एक बड़ा बाजार भी है।पिछले दिनों फेसबुक के प्रतिनिधियों की संसद की स्थायी समिति के सामने पेशी भी हो चुकी है। आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो यूजर्स की संख्या के मामले में भारत उसके लिए सबसे बड़ा बाजार है। हालांकि इस विवाद के सामने आने के बाद सत्ता पक्ष भी फेसबुक पर पक्षपात के आरोप लगा रहा है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के बाद आरोप लग रहे हैं कि फेसबुक बीजेपी का पक्ष लेता है। अमेरिकी अखबार ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत में फेसबुक के कर्मचारियों ने बीजेपी से जुड़े कुछ लोगों के अकाउंट्स और पेजों को नफरत फैलाने की वजह से बैन करने की सिफारिश की थी लेकिन भारत में फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी की प्रमुख अंखी दास ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि ऐसा करने से फेसबुक के बिजनेस इंटेरेस्ट को नुकसान पहुंचेगा. वहीं फेसबुक का कहना है कि उसे हेट स्पीच को काबू करने को लेकर और बेहतर काम करना होगा.

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