महाराष्ट्र पंचायत चुनाव पर किसान आंदोलन का असर पड़ना तय, इसलिए ज्यादा परेशान है बीजेपी

हाल में विधान परिषद की रिक्त 6 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी की करारी हार ने भी फडणवीस पर से भरोसा कम कर दिया है। इस चुनाव में बीजेपी को आरएसएस के गढ़ नागपुर वाली सीट तक कांग्रेस के हाथों गंवानी पड़ी, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया
user

नवीन कुमार

एक महीने से भी कम समय बचा है जब महाराष्ट्र के 36 में से 34 जिलों में 14,234 ग्राम पंचायतों के चुनाव होंगे। भारतीय जनता पार्टी को पसीने इस कारण आ रहे कि कृषि कानूनों को लेकर यहां के किसान भी गुस्से में हैं और इसका असर इन चुनावों पर होने के आसार हैं। यहां गुस्सा बढ़ने की वजह यह भी है कि बीजेपी नेता और उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे पाटिल ने 9 दिसंबर को कहा कि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर जारी किसानों के विरोध प्रदर्शनों के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा राज्य के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति का पाठ पढ़ाने के लिए मुंबई आने वाले थे। लेकिन कोरोना पाॅजिटिव होने के कारण उनका कार्यक्रम बाधित हो गया। दूसरी ओर, यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस की कमजोर कड़ी से पार्टी के राष्ट्रीय नेता परेशान हैं।

हाल में विधान परिषद के रिक्त पदों को भरने के लिए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की पांच सीटों और एक स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में बीजेपी की करारी हार ने भी फडणवीस पर से भरोसा कम कर दिया है। बीजेपी को आरएसएस के गढ़ नागपुर वाली सीट तक कांग्रेस के हाथों गंवानी पड़ी। इस चुनाव के बाद खुद फडणवीस ने कहा था कि वह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली राज्य की महाविकास अघाड़ी सरकार की संयुक्त ताकत- कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी, को आंकने में विफल रहे।

अब एक बार फिर ग्राम पंचायतों के चुनावों में कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी अपनी गठबंधन ताकत के साथ मैदान में रहेगी। पिछले पंचायत चुनाव में बीजेपी को ज्यादा सीटें जरूर मिली थीं, लेकिन तब भी कांग्रेस ने बीजेपी से कई महत्वपूर्ण सीटें छीन ली थीं। राजनीति के हाशिये पर खड़ी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने इस बार अचानक से ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ने का मन बनाया है। मनसे के इस फैसले से उसे बीजेपी की बी टीम के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन इससे बीजेपी को फायदा होगा, यह कोई नहीं मान रहा।

वैसे, प्रदेश बीजेपी में भी सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है। पार्टी के कई नेता खास तौर से फडणवीस से नाराज चल रहे हैं। पिछले दिनों ही वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे और पूर्व सांसद जयसिंह राव गायकवाड ने बीजेपी को राम-राम कह दिया। इसका असर भी ग्राम पंचायत चुनावों पर दिखेगा। फडणवीस से पार्टी के नेता ही नाराज नहीं हैं। 2017 में जब वह मुख्यमंत्री थे तब उनके गोद लिए गांवों के ग्रामीणों ने भी नाराजगी जाहिर की थी। 2017 के ग्राम पंचायत चुनावों में फडणवीस के गोद लिए गांव फेटरी में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। फेटरी गांव से कांग्रेस-एनसीपी के उम्मीदवार धनश्री ढोमणे की जीत से बीजेपी को करारा झटका लगा था।

महाराष्ट्र में 27,920 ग्राम पंचायतें हैं और उनमें से लगभग आधे- 14,233 ग्राम पंचायतों में होने वाले ये चुनाव मुंबई के दो जिलों- मुंबई सिटी और मुंबई उपनगर के अलावा महत्वपूर्ण इसलिए भी माना जा रहा है कि ये पांच क्षेत्रों- कोंकण, पश्चिमी महाराष्ट्र, उत्तरी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ में फैले सभी 34 जिलों को कवर करेगा। ये चुनाव स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक एक साल पहले हो रहे हैं और इसका असर मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक और नागपुर के नगर निगमों के आगामी चुनावों पर भी दिखेगा।

नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia