ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब सड़क पर उतरेंगे किसान, संयुक्त किसान मोर्चा ग्राम महापंचायतों में तय करेगा रणनीति

एसकेएम ने कहा कि किसानों की अन्य महत्वपूर्ण मांगों के साथ एसआईआर का मुद्दा भी है। यह केवल अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करने का सवाल नहीं है, बल्कि प्रदर्शन करने का अधिकार ही खतरे में है और मतदान के अधिकार समेत लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब सड़क पर उतरेंगे किसान, संयुक्त किसान मोर्चा ग्राम महापंचायतों में तय करेगा रणनीति
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अब किसान खोलेंगे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा

संयुक्त किसान मोर्चा ग्राम महापंचायतों में करेगा चर्चा

3 से 23 अक्टूबर तक देशव्यापी ग्राम महापंचायत

26 नवंबर से प्रस्तावित किसान आंदोलन की तैयारी

आल इंडिया किसान सभा के नेता और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के सदस्य पी. कृष्णप्रसाद ने कहा है कि चुनावी अधिकारों की लड़ाई केवल राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रह सकती और इसे व्यापक जन आंदोलन के तहत गांवों एवं कारखानों तक ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि किसान संगठन शनिवार से गांव स्तर पर होने वाली महापंचायतों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है।

एसकेएम की 3 अक्टूबर से देशव्यापी ग्राम महापंचायतें

यह बयान एसकेएम की तीन अक्टूबर से शुरू होने वाली देशव्यापी ग्राम महापंचायतों से पहले आया है। इन महापंचायतों में किसान संगठन एसआईआर के मुद्दे को उन चर्चाओं का हिस्सा बनाने की योजना बना रहा है, जिनमें परंपरागत रूप से फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), कृषि ऋण और भूमि अधिकार जैसी किसानों की मांगों पर चर्चा होती रही है।

26 नवंबर से प्रस्तावित किसान आंदोलन की तैयारी

ये बैठकें 23 अक्टूबर तक चलेंगी और इनका उद्देश्य 26 नवंबर से प्रस्तावित किसान आंदोलन को तेज करने के लिए जमीनी स्तर पर लामबंदी करना भी है। कृष्णप्रसाद ने कहा, ‘‘मुख्यधारा की राजनीति में एमएसपी और किसानों की अन्य महत्वपूर्ण मांगों के साथ एसआईआर का मुद्दा भी उठ रहा है। यह केवल अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करने का सवाल नहीं है, बल्कि प्रदर्शन करने का अधिकार ही खतरे में है और मतदान के अधिकार समेत लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।’’

कृष्णप्रसाद ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करना था कि नागरिकों को मतदान का अधिकार मिले। अब वह शर्तें तय कर रहा है। हमें गांवों, कारखानों तक जाना होगा और वर्ग एवं जन आंदोलन खड़ा करना होगा।’’ उन्होंने बताया कि एसकेएम 3 से 23 अक्टूबर के बीच देशभर में ग्राम महापंचायतें आयोजित करेगा। इन बैठकों में एसआईआर प्रक्रिया के साथ-साथ एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर चर्चा होने की उम्मीद है।


महापंचायतों के प्रस्ताव में एसआईआर का मुद्दा शामिल

एसकेएम ने ग्राम बैठकों में पारित किए जाने के लिए तीन प्रस्ताव रखे हैं- केंद्र द्वारा 9 दिसंबर 2021 को संगठन को दिए गए लिखित आश्वासन को लागू करना, 2020-21 के आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के लिए सिंघु सीमा पर स्मारक का निर्माण करना और एसआईआर में अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाना और उनके खिलाफ अभियोजन चलाना।

कृष्णप्रसाद ने कहा कि मतदाताओं के नाम हटाए जाने के पैमाने ने इस मुद्दे को व्यापक लोकतांत्रिक चिंता बना दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘तेरह करोड़ बड़ी संख्या है। हमारे विचार में यह अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों को व्यवस्थित तरीके से हटाए जाने को दर्शाता है। वे देश के भीतर ही बाहरी बन जाएंगे और उन्हें दर-दर भटकना पड़ेगा। इससे बड़ा मानवीय संकट पैदा होगा। यह नहीं होने दिया जा सकता।’’ कृष्णप्रसाद ने कहा, ‘‘किसानों के आंदोलन और छात्रों के आंदोलन के बाद लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई एक बड़ा मुद्दा बन जाएगी।’’

एमएसपी की गारंटी समेत कई मांगों पर आंदोलन

ग्राम महापंचायतें 26 नवंबर से किसान आंदोलन को तेज करने की एसकेएम की तैयारियों का हिस्सा हैं। संगठन ने कहा है कि बैठकों में गांवों को लामबंदी के केंद्र के रूप में विकसित करने और आंदोलन को जारी रखने के लिए संसाधन जुटाने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी। उसने कहा है कि प्रत्येक महापंचायत में 10 स्वयंसेवकों की सूची भी तैयार की जाएगी।

एसकेएम की सात प्रमुख मांगों में सभी फसलों की सुनिश्चित खरीद के साथ सी2+50 प्रतिशत के स्तर पर एमएसपी की गारंटी देने वाला कानून बनाना, किसानों की व्यापक कर्ज माफी, बिजली के निजीकरण से संबंधित उपायों को वापस लेना, भूमि अधिकारों की रक्षा करना, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों और खेतिहर मजदूरों को 10,000 रुपये मासिक पेंशन देना और चार श्रम संहिताओं को निरस्त करना शामिल है।

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3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी शहीद दिवस

इसके अलावा संगठन श्रमिकों के लिए 42,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को 700 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर 200 दिनों के काम के साथ बहाल करने की मांग कर रहा है। वह मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध करने के साथ फसल बीमा और कृषि नीतियों में बदलाव की भी मांग कर रहा है।

एसकेएम आंदोलन की आगे की दिशा और 26 नवंबर से प्रस्तावित आंदोलन को तेज करने की रणनीति तय करने के लिए 12 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में राष्ट्रीय परिषद-सामान्य सभा की बैठक करेगा। ग्राम महापंचायतों की शुरुआत तीन अक्टूबर से होगी। एसकेएम इस दिन को लखीमपुर खीरी शहीद दिवस के रूप में मनाता है। 2021 के किसान आंदोलन के दौरान लखीमपुर खीरी में चार प्रदर्शनकारी किसानों और पत्रकार रमन कश्यप की मौत हो गई थी।

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