खट्टर सरकार के वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले भी नहीं रोक पाए किसानों को, कल दिल्‍ली बार्डर पर टकराव की आशंका

हरियाणा सरकार के इंतजामों को देखते हुए 27 नवंबर को दिल्‍ली बार्डर पर किसानों और पुलिस के बीच भारी टकराव से इंकार नहीं किया जा सकता। किसान नेताओं का साफ कहना है कि किसी भी हालत में वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। केंद्र की सरकार को काले कानून वापस लेने ही होंगे।

फोटोः धीरेंद्र अवस्थी
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धीरेंद्र अवस्थी

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा एक बार फिर आज महाभारत का मैदान बन गया। मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने पूरी पुलिस किसानों को दिल्‍ली पहुंचने से रोकने के लिए सड़क पर उतार दी। किसान दिल्‍ली जाने के लिए पूरे दिन पंजाब की सीमाओं से लेकर हरियाणा के तकरीबन सभी हाईवे पर पुलिस से संघर्ष करते रहे। राज्‍य का ऐसा कोई कोना नहीं बचा होगा, जहां किसानों का पुलिस के साथ संघर्ष नहीं हुआ।

आज राज्‍य की बीजेपी सरकार ने हजारों पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान किसानों को रोकने के लिए लगा दिए। किसानों पर वाटरकैनन का इस्‍तेमाल किया गया। आंसू गैस के गोले दागे गए और हल्‍का लाठीचार्ज तक किया गया। करनाल में एक किसान के चेहरे पर आंसू गैस का गोला फट गया, जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गया।

फोटोः धीरेंद्र अवस्थी
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केंद्र के खिलाफ दो महीने से आंदोलन कर रहे हरियाणा और पंजाब के किसानों के ‘दिल्‍ली चलो’ में बाधा डालने के लिए खट्टर सरकार ने पूरी ताकत ताकत लगा दी। दो दिन पहले यानि सोमवार रात से ही किसानों की गिरफ्तारियों का शुरू हुआ दौर 26 नवंबर को किसानों पर ताकत के इस्‍तेमाल के साथ अपने चरम पर पहुंचता नजर आया। रात में ही पंजाब के साथ लगते हरियाणा के सभी बार्डर पूरी तरह सील कर दिए गए थे। हरियाणा के किसान एक दिन पहले ही भारतीय किसान यूनियन के अध्‍यक्ष गुरुनाम सिंह चड़ूनी के नेतृत्‍व में दिल्‍ली के लिए कूच कर चुके थे और रात में उन्‍होंने करनाल में डेरा डाल दिया था।

गुरुवार की सुबह सबसे पहले किसान-पुलिस संघर्ष की शुरुआत हरियाणा-पंजाब सीमा पर अंबाला के शंभू बार्डर से हुई। यहां कई घंटे पुलिस और किसानों के बीच टकराव के हालात बने रहे। वक्‍त बीतने के साथ ही यहां किसानों की तादाद इतनी अधिक हो गई कि जहां तक नजर डालो किसान ही किसान नजर आ रहे थे। ट्रैक्‍टरों की कतारें लगी हुई थीं। यहां तक मोटर साइकिल और अपनी कारों से भी बड़ी तादाद में किसान शंभू बार्डर ‘दिल्‍ली कूच’ के लिए पहुंचे हुए थे।

फोटोः धीरेंद्र अवस्थी
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किसानों को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने यहां आरएएफ के साथ बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात की थी। साथ ही रोड के बीच फायरब्रिगेड की गाड़ी, बड़े-बड़े डंपर, ट्रक खड़े कर गिए गए थे, ताकि किसान आगे न जा सकें। इसके अलावा सीमेंटेड बैरियर भी लगाए गए थे। आसमान से किसानों पर नजर रखने के लिए ड्रोन को भी लगाया गया था। किसानों को रोकने के लिए वाटर कैनन के इस्‍तेमाल के साथ ही आंसू गैस के गोले भी किसानों पर दागे गए और हल्का बल प्रयोग भी किया गया। लेकिन हजारों किसानों के सामने हरियाणा सरकार के सारे इंतजाम नाकाफी साबित हुए।

किसानों ने रोड पर लगाए बैरिकेड्स फ्लाईओवर से नीचे फेंक दिए। हालांकि, आंसू गैस के गोले दागे जाने से युवा किसान बड़े गुस्‍से में नजर आए। कई बार हालात सीधे टकराव के बने, लेकिन किसानों के संयम से यह टलता रहा। किसानों का कहना था कि काले कानून वापस होने तक वह किसी भी कीमत में वापस नहीं जाएंगे। किसान महीनों का राशन अपने साथ लेकर आए हैं। इसमें दूध, पानी, दवाएं, बैटरी और यहां तक कि मोबाइल चार्जर प्‍वाइंट भी वह अपने साथ लाए थे।किसानों ने धक्‍के देकर ट्रकों को हटाया और निकलने के लिए रास्‍ता साफ किया। काफी देर चली कशमकश के बाद अंतत: किसान वहां पुलिस की खड़ी की गई बाधाएं पार करने में सफल हो गए और अंबाला में दाखिल हो गए।

फोटोः धीरेंद्र अवस्थी
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पंजाब के साथ लगती सीमा में आठ एंट्री प्‍वाइंट पर हरियाणा पुलिस ने तकरीबन इसी तरह के बंदोबस्‍त कर रखे थे। चंडीगढ़-दिल्‍ली हाईवे पर भी यही हालात थे। सीमेंटेड बैरियर लगा कर यहां रोड को पूरी तरह बंद कर दिया गया था। वाटरकैनन का भी जमकर यहां किसानों पर इस्‍तेमाल हुआ। खनौरी बार्डर पर भी जबर्दस्‍त हंगामा हुआ। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने बड़े-बड़े पत्‍थर डाल रखे थे। सड़क पर गड्ढे खोद दिये गए थे। टोहाना बार्डर पर भी किसान बैरियर तोड़कर हरियाणा में दाखिल हुए। सिरसा-डबवाली बार्डर भी इसी तरह के हालात थे। जींद में भी किसानों और पुलिस में जमकर संघर्ष हुआ। दिल्‍ली-अंबाला हाईवे पूरी तरह बंद रहा। हाईवे पर पूरे दिन जाम के हालात के रहे। करनाल और पानीपत के बाबरपुर में सैकड़ों वाहन जाम में फंसे रहे।

उधर, करनाल में एक दिन पहले ही डेरा डाल देने वाले हरियाणा के किसानों और पुलिस के बीच भी कई बार टकराव के हालात बने। इन्‍हें रोकने के लिए पुलिस ने हाईवे के बीच में ट्रक खड़े कर दिए थे। वाटर कैनन का भी इस्‍तेमाल किया गया। पंजाब से दाखिल हुए किसानों को रोकने के लिए भी करनाल में भारी बंदोबस्‍त किए गए। यहां पुलिस की ओर से दागा गया आंसू गैस का एक गोला लगने से पंजाब का एक किसान गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके चेहरे से बुरी तरह खून बहता नजर आया। उस किसान का कहना था कि उसने ऐसी कौन सी गलती है कि उस पर आंसू गैस का गोला फायर किया गया।

पूरे दिन अंबाला-दिल्‍ली हाईवे से लगते गांवों के किसान भी जगह-जगह सड़क पर आते रहे। कुल मिलाकर हालात खराब हैं। अब दिल्‍ली में दाखिल होने से पहले किसानों को रोकने के लिए पानीपत-सोनीपत के हलदाना बार्डर पर भारी बाधाएं खड़ी की गई हैं। देश की सीमा की सुरक्षा के लिए बनाई जाने वाली मिट्टी की दीवार की तरह यहां भी एक पूरी मिट्टी की दीवार बना दी गई है। सीमेंट के बड़े-बड़े बैरियर आपस में चैन से बांधकर इस तरह हाईवे पर रखे गए हैं कि किसान किसी भी तरह दिल्‍ली में दाखिल न हो सकें।

ऐसे में हरियाणा सरकार के इन इंतेजामों को देखते हुए 27 नवंबर को दिल्‍ली बार्डर पर किसी भी तरह के टकराव से इंकार नहीं किया जा सकता। क्‍योंकि किसान भी लंबे आंदोलन के लिए तैयार होकर आए हैं। भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के अध्‍यक्ष गुरुनाम सिंह चड़ूनी का कहना है कि किसी भी हालत में वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। केंद्र की सरकार को काले कानून वापस लेने ही होंगे।

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