अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अडानी के ऑपरेशन वाले नवी मुंबई एयरपोर्ट शिफ्ट करने का विदेशी एयरलाइंस कर रहीं विरोध

एयरलाइंस ने मुंबई एयरपोर्ट की उस योजना को चुनौती दी है जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को नवी मुंबई शिफ्ट किया जाना है। उन्होंने बुनियादी ढांचे, लागत और मौजूदा स्लॉट की सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई हैं।

नवी मुंबई एयरपोर्ट को लेकर विदेशी एयरलाइंस ने कई आपत्तियां जताई हैं
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  • ऑपरेटर ने मुंबई के पुराने हो रहे टर्मिनल 1 पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया है, लेकिन उनकी समय-सीमाओं और सेवा बंद करने की चेतावनियों ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं

  • यात्रियों को अब अधिक एयरपोर्ट शुल्क देना पड़ सकता है और हो सकता है कि उन्हें एक एयरपोर्ट से दूसरे एयरपोर्ट जाना पड़े। वहीं, बेंगलुरु का उदाहरण यह समझने में मदद करता है कि किस तरह भरोसेमंद ज़मीनी कनेक्टिविटी तैयार की जा सकती है।

मुंबई आने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को मुंबई के पुराने हवाई अड्डे के बजाय नवी मुंबई में लाने का प्रस्ताव अब विवाद का विषय बन गया है। विवाद इस बात पर है कि एयरलाइन के शेड्यूल को कौन नियंत्रित करेगा और रिडवलेपमेंट का खर्च कौन उठाएगा। इन दोनों हवाई अड्डों को अडानी की कंपनी ही ऑपरेट करती है। लेकिन विदेशी एयरलाइंस ने उनकी उड़ानों की सेवाएं नवी मुंबई ट्रासंफर किए जाने पर आपत्ति जताई है, फिर भी अडानी एयरपोर्ट इन्हें वहां ले जाना चाहता है।

मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएएल) का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से पुराने हो चुके मुंबई के टर्मिनल 1 का पुनर्निर्माण जरूरी है, जिसके चलते यात्रियों को संभालने की क्षमता में कुछ समय के लिए कमी करनी पड़ेगी। लेकिन, एयरलाइंस ने क्षमता की गणना, परामर्श प्रक्रिया और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनएमआईए) की ऑपरेशंस तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।

इस असहमति के नतीजे अब सामने आए हैं। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (मुंबई एयरपोर्ट) से संचालित होने वाली 50 अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में से 12 को समर 2027 (गर्मी के दौरान) के लिए वहां स्लॉट नहीं मिले हैं। इससे प्रभावित होने वाली उड़ानों में कुल मिलाकर 14 अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन के लिए रोजाना लगभग 16 उड़ानें शामिल हैं।

यह घटनाक्रम इस मुख्य सवाल को और स्पष्ट कर देता है कि अगर मुंबई में मौजूदा सेवा को बनाए रखना अब कोई विकल्प नहीं रह गया है, तो इस बदलाव को कितना 'स्वैच्छिक' माना जा सकता है?

एयर फ्रांस और एमिरेट्स सहित विदेशी एयरलाइंस ने इस प्रस्ताव को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ( सिविल एविएशन मिनिस्ट्री) से संपर्क किया है। मुंबई में एयरपोर्ट ऑपरेटर्स कमेटी ने क्षमता में कटौती को एकतरफा बताया है और एयरलाइंस के पुराने स्लॉट को सुरक्षित रखने की मांग की है।

एयरलाइंस ने टर्मिनल 1 की मौजूदा क्षमता के आकलन और प्रस्तावित कटौती के औचित्य पर भी सवाल उठाए हैं। ये अहम सवाल हैं, क्योंकि ऑपरेटर द्वारा घोषित क्षमता ही यह तय करती है कि कितनी उड़ानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करना होगा।

मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने शुरू में मुंबई के 770 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशनों में से 265 को अक्टूबर के आखिर से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा था। सरकार के दखल के बाद, इस बदलाव को टालकर मार्च 2027 के आखिर से शुरू होने वाले समर शेड्यूल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।


इसके बाद ऑपरेटर ने एयरलाइंस के लिए ट्रांज़िशन प्लान जमा करने की समय-सीमा 3 नवंबर तय कर दी। उनके सामने विकल्प रखा गया कि या तो वे अपनी सेवाएं नवी मुंबई ले जाएं या उन्हें कुछ समय के लिए बंद कर देने। इसके कारण एयरलाइंस को एक ऐसे दबाव में बातचीत करनी पड़ रही है, जिसमें उन्हें एक स्थापित गेटवे तक अपनी पहुंच खोने का डर है।

मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड इस सुझाव को खारिज करता है कि यह प्रक्रिया अचानक या एकतरफा है। सरकार के साथ हुए संवाद की रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि कुछ विदेशी एयरलाइंस ने सेवाओं को स्थानांतरित करने के लिए 'गंतव्य-आधारित' (डेस्टिनेशन बेस्ड) तरीका अपनाने का सुझाव दिया था। हालांकि, इस तरह की चर्चाओं से सेवाओं के अंतिम आवंटन पर सभी संबंधित एयरलाइनों के बीच कोई सहमति नहीं बनी है।

ऑपरेटर का सुरक्षा पक्ष काफी मजबूत है। एडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) के अनुसार, लगभग 60 साल पुराने टर्मिनल 1B में संरचनात्मक समस्याएं हैं; आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए गए ऑडिट में इसमें जंग लगने, कंक्रीट के खराब होने और दरारें आने की बात सामने आई है। अप्रैल में लगी आग ने इसके पुनर्विकास की जरूरत को और भी जरूरी बना दिया है। काम जनवरी 2027 में शुरू होना है, जिसमें सबसे पहले टर्मिनल 1बी के उत्तरी हिस्से को तोड़ा जाएगा। इस पुनर्विकास से टर्मिनल 1 की सालाना क्षमता 15 मिलियन से बढ़कर 20 मिलियन यात्रियों तक पहुंचने की संभावना है।

AAHL के मुख्य कार्यकारी (सीईओ) अरुण बंसल ने कहा है कि लगभग 50 लाख यात्री, यानी सीएसएमआईए (छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट) की सालाना क्षमता का 9 प्रतिशत हिस्सा, अस्थायी रूप से प्रभावित होगा। उनका कहना है कि नवी मुंबई की मौजूदगी के कारण चरणों में पुनर्निर्माण संभव है, और टर्मिनल 1 के भविष्य को लेकर 2020 से ही बातचीत चल रही है।

हालांकि, टर्मिनल के पुनर्निर्माण पर परामर्श का अर्थ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को स्थानांतरित करने की सहमति नहीं है। एयरलाइंस की आपत्तियां इस बात से संबंधित हैं कि किन सेवाओं को स्थानांतरित किया जाना चाहिए, चुनाव कैसे किए जाएंगे और क्या जिस एयरपोर्ट पर उन्हें जाने को कहा जा रहा है, वह हवाई अड्डा उन्हें वहन कर सकता है।

एमिरेट्स ने अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए जरूरी सुविधाओं, जैसे कि कैटरिंग, कार्गो वेयरहाउसिंग और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं।आईएटीए ने ग्राउंड हैंडलिंग, कार्गो, क्रू के ठहरने की व्यवस्था और कनेक्टिविटी को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र मूल्यांकन की मांग की है।

स्थापित एयरलाइंस के लिए, कामकाज को बांटने का मतलब है - कर्मचारियों, उपकरणों और अन्य सेवाओं को दो जगह बनाना, और साथ ही मुंबई के मौजूदा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े संपर्कों में रुकावट आना।


भारतीय एयरलाइंस ने तो चरणबद्ध बदलावों को अपनाना शुरू कर दिया है। आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार, दिसंबर से नवी मुंबई से एयर इंडिया एक्सप्रेस की सेवाएं शुरू हो जाएंगी, और जनवरी में पश्चिमी एशिया के लिए ऑपरेशन शुरू होगा। इंडिगो की योजना फरवरी 2027 से वहां से अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन शुरू करने की है। इस सबसे एक बदलाव का ढांचा तो दिखता है लेकिन विदेशी एयरलांस की चिंताओं का समाधान नहीं होता।

इस बदलाव से यात्रियों की जेब पर भी बोझ पड़ेगा। नवी मुंबई के लिए 'इंटरनेशनल डिपार्चर यूज़र डेवलपमेंट फ़ीस' 1,225 रुपये बताई गई है, जबकि मुंबई से जाने वाले इकॉनमी क्लास के यात्री के लिए यह 615 रुपये है। यानी खर्च दो गुना हो जाएगा।

लैंडिंग-फीस में छूट मिलने से एयरलाइंस को कुछ राहत मिल सकती है, जबकि प्रस्तावित कैश वाउचर यात्रियों पर लगने वाले कुछ शुल्कों की भरपाई कर सकते हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी उपाय अकेले एयरपोर्ट तक पहुंचने या लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित दो एयरपोर्ट्स के बीच आने-जाने के लगातार होने वाले खर्च की समस्या को हल नहीं करता है।

अधिकारियों ने एयरपोर्ट्स के बीच मुफ्त शटल और बस सेवा शुरू करने की घोषणा की है। एमएसआरटीसी की 'ई-शिवई' सेवा नवी मुंबई एयरपोर्ट को दादर, बोरीवली और पुणे से जोड़ती है, जिसका किराया क्रमशः 170 रुपये, 210 रुपये और 450 रुपये है। ये एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन यात्रियों को ऐसी सेवा की जरूरत है जिसकी फ्रीक्वेंसी (आने-जाने की संख्या) और समय फ्लाइट के शेड्यूल से मेल खाते हों, खासकर उन उड़ानों के लिए जो बहुत सुबह रवाना होती हैं या देर रात पहुंचती हैं।

बेंगलुरु एक मिसाल सामने रखता है। केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है, फिर भी यात्रियों के पास वायु वज्र हवाई अड्डा-बस नेटवर्क के साथ-साथ इंटर-सिटी बसें, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब उपलब्ध हैं। बीएमटीसी हवाई अड्डे की टाइम टेबिल, किराए, यात्रा योजना और लाइव रूट ट्रैकिंग के लिए एक डेडिकेटेड प्लेटफॉर्म महैया कराता है।

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