पूर्व नौकरशाहों ने NTA और CBSE विवाद पर सरकार को घेरा, गहन समीक्षा के साथ प्रधान के इस्तीफे की मांग की
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 73 पूर्व नौकरशाहों में पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, पूर्व स्वास्थ्य सचिव के सुजाता राव, पंजाब पुलिस के पूर्व प्रमुख जूलियो रिबेरो, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के नाम शामिल हैं।

देश के पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने नीट-प्रश्नपत्र ‘लीक’ मामले और सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर हुए विवाद को लेकर खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने एनटीए और सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली की गहन और समयबद्ध समीक्षा किए जाने की मांग उठाई है।
एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 73 पूर्व नौकरशाहों में पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, पूर्व स्वास्थ्य सचिव के सुजाता राव, पंजाब पुलिस के पूर्व प्रमुख जूलियो रिबेरो, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग जैसे पूर्व वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम शामिल हैं।
प्रश्नपत्र लीक होने का खतरा कम करने के लिए सख्त और अत्याधुनिक सुरक्षा एवं क्रिप्टोग्राफिक प्रोटोकॉल बनाने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल मूल्यांकन सॉफ्टवेयर का राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किए जाने से पहले उसका सख्ती से थर्ड-पार्टी ऑडिट किया जाना चाहिए।
पत्र में कहा गया है, “हम केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की देखरेख में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के आयोजन में बार-बार मिली असफलताओं पर गहरा दुख और आक्रोश जाहिर करने के लिए यह पत्र लिख रहे हैं। व्यवस्था के स्तर पर हुई इन लापरवाहियों ने लाखों युवा भारतीयों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है और हमारे लोकतंत्र के सबसे अहम हिस्सों में से एक-सार्वजनिक शिक्षा और मेधा प्रणाली-पर जनता का विश्वास घटा दिया है।”
इसमें कहा गया है कि भारत की शीर्ष परीक्षा और मूल्यांकन संस्थाओं की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आ गई है। पत्र के मुताबिक, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र ‘लीक’ मामले ने उन 23 लाख से ज्यादा छात्रों की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है, जिन्होंने कई वर्षों तक कड़ी तैयारी की थी। इसमें कहा गया, “हमें हैरानी है कि कई वर्षों से हर साल नीट में एक जैसी कमियां सामने आ रही हैं- यानी कुछ अभ्यर्थी रिश्वत और धोखाधड़ी के जरिये परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र हासिल कर लेते हैं।”
इसमें कहा गया है कि सीबीएसई की 12वीं कक्षा की परीक्षाओं के लिए नयी ओएसएम डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को अव्यवस्थित तरीके से लागू किए जाने से नीट संकट और भी गहरा हो गया। पत्र के अनुसार, इस प्रणाली को लागू किए जाने के बाद बार-बार पोर्टल क्रैश होने, डिजिटल पेज गायब होने, उत्तर पुस्तिकाओं के मेल न खाने और गलत मूल्यांकन जैसी समस्याएं आईं, खासकर मुख्य एसटीईएम विषयों (भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित) में।
इसमें कहा गया है कि ओएसएम प्रणाली को लागू करने में दिखाई गई जरूरत से ज्यादा प्रशासनिक जल्दबाजी के कारण कुल पास प्रतिशत में अभूतपूर्व गिरावट आई और पिछले शैक्षणिक वर्षों की तुलना में शीर्ष स्थान हासिल करने वालों के अंक में बिना किसी स्पष्ट कारण के भारी कमी देखी गई।
पत्र में कहा गया है कि भारत जैसे संसदीय लोकतंत्र में अंतत: चुने हुए प्रतिनिधि नागरिकों के प्रति जवाबदेह होते हैं। इसमें कहा गया है कि जब लाखों छात्र और उनके परिवार अहम परीक्षाओं-जो आजीविका और सामाजिक तरक्की तय करती हैं- में टाली जा सकने वाली गलतियों की वजह से भारी मानसिक परेशानी और आर्थिक दबाव झेलते हैं, तो जिम्मेदार लोग अपने संवैधानिक कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ सकते और ऐसी गलतियों के लिए जवाबदेही से बच नहीं सकते।
पूर्व नौकरशाहों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से आग्रह किया कि वह “शिक्षा मंत्रालय में मौजूदा अव्यवस्था की जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दें या फिर प्रधानमंत्री उन्हें उनके पद से हटा दें।” उन्होंने मांग की कि एनटीए और सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली की “गहन, समयबद्ध और स्वतंत्र न्यायिक या विशेषज्ञ समीक्षा” की जाए।
पूर्व नौकरशाहों ने ओएसएम का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ छात्रों ने ‘एथिकल हैकर’ की मदद से इस ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली में बड़ी खामियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि इन खामियों के सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया, लेकिन यह कदम बहुत देर से उठाया गया और अपर्याप्त था।
पूर्व नौकरशाहों ने आरोप लगाया, “इससे नीति में मौजूद गंभीर कमियां, ठीक से बीटा टेस्टिंग न होने और देखरेख में नाकामी जैसी बातें दबी रहीं। हमें नहीं लगता कि निविदा की शर्तों को बदलने के लिए सिर्फ सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव ही जिम्मेदार हो सकते हैं। जरूर ऊपर के स्तर से भी इसमें कोई दिलचस्पी दिखाई गई होगी।” उन्होंने कहा कि “सिर्फ अधिकारियों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।”
पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में पिछले 70 वर्षों में बड़ी त्रासदियों के समय केंद्रीय मंत्रियों के पद से इस्तीफा देने की चार घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “1956 में दो रेल हादसों के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। 1993 में दिल्ली हवाईअड्डे पर हुए विमान हादसे के बाद माधवराव सिंधिया ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। 1999 में रेल हादसे के बाद नीतीश कुमार ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। 2008 में मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद शिवराज पाटिल ने केंद्रीय गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। मौजूदा खामियों के लिए भी अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री की ही जवाबदेही बनती है।”
