प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार जाएंगे राज्यसभा, TMC ने दिनेश त्रिवेदी की खाली सीट के लिए नामित किया

जवाहर सरकार का नामांकन टीएमसी प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस उनकी बुद्धि और उनके 41 साल के नौकरशाह के तौर पर अनुभव का उपयोग उच्च सदन में करने की कोशिश करेगी।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

तृणमूल कांग्रेस ने एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी और प्रसार भारती के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जवाहर सरकार को राज्यसभा के लिए नामित किया है। इस साल की शुरूआत में दिनेश त्रिवेदी द्वारा खाली की गई पश्चिम बंगाल की राज्यसभा सीट के लिए उन्हें नामित किया गया है, जिस पर उपचुनाव 9 अगस्त को निर्धारित है।

जवाहर सरकार का नामांकन टीएमसी प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस उनकी बुद्धि और उनके 41 साल के नौकरशाही का उपयोग उच्च सदन में करने की कोशिश करेगी। टीएमसी ने एक ट्वीट में कहा, "श्री सरकार ने लगभग 42 साल सार्वजनिक सेवा में बिताए और प्रसार भारती के पूर्व सीईओ भी थे। सार्वजनिक सेवा में उनका अमूल्य योगदान हमें अपने देश की और भी बेहतर सेवा करने में मदद करेगा।"


जवाहर सरकार ने कलकत्ता, प्रेसीडेंसी, कैम्ब्रिज और ससेक्स के विश्वविद्यालयों में अध्ययन किया और इतिहास और समाजशास्त्र में दो मास्टर्स डिग्री प्राप्त की। सरकार ने कई वर्षों तक पुस्तकों में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और मानवशास्त्रीय विषयों पर कई लेख प्रकाशित किए हैं, साथ ही प्रसिद्ध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में भी उन्होंने लिखा है। उन्होंने इतिहास, धर्म, समकालीन मामलों और धर्म और नृविज्ञान के बीच के अंतर के विषयों पर कई वार्ताएं भी की हैं।

कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी (1774 में स्थापित) ने इतिहास और राजनीति के अध्ययन को लोकप्रिय बनाने में उनके योगदान के लिए उन्हें अपना विमान बिहारी मेमोरियल अवार्ड प्रदान किया है। लोक प्रशासन में भी सरकार का शानदार करियर रहा है। उन्होंने नवंबर 2008 से फरवरी 2012 तक भारत के संस्कृति मंत्रालय का नेतृत्व किया है, जो किसी भी सचिव के लिए सबसे लंबा है। वह भारत के सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती के सीईओ (2012-2016) भी रहे और पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए खड़े रहे, जिसके कारण उन्हें समय से पहले इस्तीफा देना पड़ा।

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