'किसी को बचाना है, फंसाना है या कुछ दबाना है': राकेश अस्थाना की नियुक्ति पर पूर्व पुलिस अधिकारियों की टिप्पणी

अस्थाना की नियुक्ति पर दिल्ली के एक पुलिस अधिकारी ने टिप्पणी की कि ‘किसी को बचाना है, फंसाना है या कुछ दबाना है, नहीं कहा जा सकता।’ उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली पुलिस पर तो क्या फर्क पड़ना है; हां, वे अधिकारी जरूर मायूस होंगे जिनकी अनदेखी की गई है।

(ऊपर बाएं) मीरा चड्ठा बोरवंकर, (नीचे बाएं) जूलियो रिबेरो, (बीच में) राकेश अस्थाना, (ऊपर दाएं) प्रकाश सिंह, (नीचे दाएं) अमिताभ ठाकुर
(ऊपर बाएं) मीरा चड्ठा बोरवंकर, (नीचे बाएं) जूलियो रिबेरो, (बीच में) राकेश अस्थाना, (ऊपर दाएं) प्रकाश सिंह, (नीचे दाएं) अमिताभ ठाकुर
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राहुल गुल

राकेश अस्थाना तीन दिनों बाद रिटायर होने जा रहे थे कि अचानक उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त बना दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना बताती है कि ऐसा ‘लोकहित में विशेष मामले के तहत’ किया गया है। वैसे, सूरत के पूर्व पुलिस आयुक्त को भी एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है। लेकिन अस्थाना का मसला थोड़ा ज्यादा टेढ़ा है। अभी जून, 2021 में दिल्ली पुलिस आयुक्त-पद पर नियुक्ति का मौका था, पर उन्हें यह पद नहीं दिया गया। उस वक्त एस एन श्रीवास्तव इस पद से रिटायर हुए थे और तब बालाजी श्रीवास्तव को इस पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। तो जून और जुलाई के बीच ऐसा क्या हो गया? यह पद आम तौर पर एजीएमयूटी (अरुचाणल-गोवा- मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के आईपीएस अधिकारी को दिया जाता है। वैसे, इससे पहले एक बार इसी तरह अजय राज शर्मा को भी दिल्ली पुलिस आयुक्त बनाया गया था जबकि वह यूपी कैडर के थे।

अस्थाना की इस तरह की गई नियुक्ति पर दिल्ली के एक पुलिस अधिकारी ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की कि ‘किसी को बचाना है, फंसाना है या कुछ दबाना है, नहीं कहा जा सकता।’ उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली पुलिस पर तो क्या ही फर्क पड़ना है; हां, वैसे कुछ अधिकारी जरूर मायूस हो जाएंगे जिनकी अनदेखी की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि अस्थाना सत्ता शीर्ष में बैठे लोगों को जानते हैं; ‘यही बात उधर है। दोनों एक-दूसरे के सहायक होंगे।’

अस्थाना गुजरात कैडर के विवादास्पद आईपीएस अधिकारी तो हैं ही। वह सीबीआई में थे और वहां सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के साथ उनका मतभेद इस कदर सार्वजनिक हो गया था कि नरेंद्र मोदी सरकार को दोनों को ही अवकाश पर भेज देना पड़ा था। वर्मा ने व्यवसायी सतीश साना की इस शिकायत पर प्रारंभिक जांच (पीई) के आदेश दिए थे कि विवादास्पद मीट निर्यातक मोईन कुरैशी के खिलाफ हवाला से धन लेने के मामले में जांच के दौरान अस्थाना ने 3 करोड़ रुपये रिश्वत लिए।

अस्थाना का नाम तब भी चर्चा में रहा था जब सीबीआई ने संदेसरा बंधु के स्वामित्व वाली गुजरात की फार्मास्युटिकल कंपनी- स्टर्लिंग बायोटेक के परिसर से एक डायरी बरामद की थी। उस वक्त संदेसरा बंधु बैंकों को 5,000 करोड़ रुपये चूना लगाने के मामले में फरार थे। अस्थाना 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाए जाने की घटना की जांच करने वाले अधिकारियों में भी रहे हैं। टीवी- फिल्म कलाकार सुशांत सिंह राजपूत ने जब ‘आत्महत्या’ कर ली, उसके बाद बॉलीवुड के लोगों के खिलाफ नशीले पदार्थों को लेकर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने जांच की थी। अस्थाना ही उस वक्त एनसीबी प्रमुख थे। यह जानना भी रोचक है कि पेगासस प्रोजेक्ट ने यह भी बताया है कि अस्थाना की उस वक्त जासूसी की गई जब वह सीबीआई में थे।


पुलिस में वरिष्ठ पदों पर रहे कई अधिकारी भी अस्थाना की इस तरह नियुक्ति को अस्वाभाविक मानते हैं। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त और पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक जूलियो रिबेरो तो साफ कहते हैं कि ‘किसी गैर-एजीएमयूटी कैडर अधिकारी को दिल्ली पुलिस आयुक्त बनाना और वह भी उसके रिटायरमेंट से महज चार दिनों पहले बहुत- बहुत अस्वाभाविक है। निश्चित तौर पर यह राजनीतिक निर्णय है।’

पुलिस सुधारों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी के प्रमुख रहे और यूपी तथा असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह अजयराज शर्मा की नियुक्ति का उल्लेख तो करते हैं लेकिन यह भी कहते हैं कि ऐसे पद पर किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति जिसकी सेवानिवृत्ति की अवधि छह महीने से कम हो, के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश संदेहास्पद विषय हैं। उन्होंने कहा कि ’चूंकि दिल्ली केंद्र शासित क्षेत्र है और तकनीकी तौर पर कहें, तो ये दिशा निर्देश राज्यों के लिए थे इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस मसले पर आदेश देना होगा।’ प्रकाश सिंह ने कहा कि ‘मैं उम्मीद कर रहा हूं कि अस्थाना की नियुक्ति से प्रभावित हुए किसी एजीएमयूटी कैडर अधिकारी को स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का साहस दिखाना होगा।’

वैसे, डॉ. मीरा चड्ढा बोरवांकर को भी अस्थाना की नियुक्ति से आश्चर्य हुआ है। वह पुणे की पूर्व पुलिस आयुक्त और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की पूर्व महानिदेशक हैं। वह कहती हैं कि ‘अस्थाना की नियुक्ति इस वजह से की गई हो सकती है क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निकट हैं। मैं भी उन्हें जानती हूं लेकिन यह तो है ही कि उनकी नियुक्ति एजीएमयूटी कैडर के अफसरों को निश्चित तौर पर हतोत्साहित करेगी।’

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