पक्ष-विपक्ष: E-20 पर फिर बवाल, कर्नाटक में पाया गया 30% तक एथेनॉल, तेल कंपनियां और सरकार आमने-सामने

कर्नाटक सरकार और तेल मार्केटिंग कंपनियों के बीच ई-20 पेट्रोल में तय मात्रा से अधिक एथेनॉल मिलाए जाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस विवाद के इतर इस मामले में शक की बड़ी वजह ई 20 मामले में पारदर्शिता की कमी है।

सांकेतिक फोटो
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  • कर्नाटक सरकार और तेल मार्केटिंग कंपनियों के बीच ई-20 पेट्रोल में तय मात्रा से अधिक एथेनॉल मिलाए जाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी है। शक की बड़ी वजह ई 20 मामले में पारदर्शिता की कमी है। और दूसरी बात यह कि सरकार ने अब तो वाहनों को E100 (यानी पूरी तरह इथेनॉल) पर चलने लायक बनाने की भी मंजूरी दे दी है।

  • अक्टूबर 2026 में तेल कंपनियों को पेट्रोलियम के 63 नमूने दिए गए और उनसे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा के बारे में रिपोर्ट मांगी गई। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

  • इसके बाद कर्नाटक सरकार ने रिटेल आउटलेट्स से लिए गए नमूनों को ISO-प्रमाणित निजी लैब में भेजा, जहां पेट्रोल में 31.2 प्रतिशत तक एथेनॉल मिला।

  • तेल कंपनियों और पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा है कि सितंबर 2026 में रिफाइनरियों और डिपो स्थित कंपनियों के लैब में किए गए अखिल भारतीय परीक्षण में यह पुष्टि हुई थी कि इथेनॉल की मात्रा E19 और E20 की स्वीकार्य सीमा के भीतर थी।

आखिर तेल बेचने वाली या मार्केटिंग कंपनियां सभी पेट्रोल पंपों पर साफ-साफ क्यों नहीं लिख सकतीं कि जो पेट्रोल बेचा जा रहा है उसमें कितना एथेनॉल मिलाया गया है। कन्ज्यूमर को यह जानने का पूरा हक है कि वे जो भी वस्तु या उत्पाद खरीद रहे हैं तो उसमें क्या है यह तो पता ही होना चाहिए। साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि पेट्रोल खरीदते वक्त उन्हें दरअसल 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी एथेनॉल दिया जा रहा है। अगर यह साफ-साफ लिखा हो तो कम से कम भरोसा तो कायम होगा।

आखिर इस विषय को फिर से सामने लाने की जरूरत क्यों पड़ी। दरअसल कर्नाटक सरकार ने खुलासा किया है कि उसने राज्य में बिक रहे पेट्रोल की जांच कराई और पाया कि कई जगह तय सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाया गया है। सरकार ने लिए गए सैंपल की कर्नाटक की निजी प्रयोगशालाओं (लैब्स) में जांच कराई तो पाया कि तेल कंपनियां जिसे ई20 यानी 20 फीलदी एथेनॉल वाला पेट्रोल बताती हैं उनमें कई जगह तय सीमा (20 प्रतिशत) से अधिक एथेनॉल मिलाया गया है। कहीं-कहीं तो एथेनॉल की मात्रा 31.2 फीसदी तक पाई गई।:

शिकायत: कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिज़वान अरशद ने शुक्रवार को दावा किया कि एक निजी प्रयोगशाला में पेट्रोल के सैंपल की स्वतंत्र जांच से पता चला है कि "इंडियन ऑयल (आईओसी) के आउटलेट्स पर 31.2 प्रतिशत और एचपीसीएल (एचपी) के आउटलेट्स पर 30.5 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया गया है, जो कि तय सीमा 20 प्रतिशत से कहीं अधिक है।" इस खुलासे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "मोदी सरकार कहती है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल है। कर्नाटक सरकार ने सात जिलों से पेट्रोल के नमूने लिए और उन्हें एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा। इसका मतलब यह है कि आप महंगे पेट्रोल की कीमत तो चुका रहे हैं, लेकिन आपके टैंक में इथेनॉल भरा जा रहा है।"


खंडन: तेल मार्केटिंग कंपनियों ने एक साझा बयान जारी कर इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा, "कर्नाटक के कुछ रिटेल आउटलेट्स पर इथेनॉल की अत्यधिक मात्रा मिलाने के हालिया दावों की पुष्टि, निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत की गई जांच से नहीं होती है। 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 893 नमूनों की जांच की गई (जिसमें कर्नाटक के 56 नमूने भी शामिल थे), और ये सभी निर्धारित 19-21% इथेनॉल की सीमा के भीतर पाए गए।" कंपनियों ने कहा कि इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने राज्य सरकार के साथ मिलकर एक पारदर्शी जांच करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

दरअसल पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा है कि पेट्रोल की ऑल इंडिया स्तर की टेस्टिंग सितंबर 2026 में हुई थी। यह टेस्टिंग रिफाइनरियों और मार्केटिंग कंपनियों की प्रयोगशालाओं में की गई थी, और संभवतः रिटेल आउटलेट्स पर पेट्रोल भेजे जाने से पहले। लेकिन कर्नाटक सरकार ने अक्टूबर में रिटेल आउटलेट्स से सैंपल लेकर उनकी जांच की है। सवाल है कि क्या आउटलेट्स पर बुनियादी ढांचे की कमियों, स्टोरेज टैंकों में नमी, या डिस्पेंसर और नोजल आदि की वजह से मिलावट और बढ़ गई? या फिर रिटेल आउटलेट्स के स्तर पर ही कोई गड़बड़ी की जा रही है? ऐसा लगता नहीं कि मंत्रालय इस मामले की जांच करने के मूड में है।

कर्नाटक के मंत्री रिज़वान अरशद का कहना है कि राज्य सरकार ने तेल कंपनियों को 63 नमूने भेजे थे, जिनमें विशेष रूप से इथेनॉल की मात्रा बताने के लिए कहा गया था। लेकिन किसी भी तेल कंपनी ने नमूनों में इथेनॉल की मात्रा नहीं बताई। इससे संदेह पैदा हुआ, जिसके बाद सरकार ने कुछ और नमूने लिए और उन्हें ISO-प्रमाणित तथा मान्यता प्राप्त निजी प्रयोगशालाओं में भेजा। इन प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के अनुसार, पाँच में से चार नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई।


और भी वजह हैं शक की: कर्नाटक सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद, वाहन निर्माता कंपनियां अपने वाहनों में इथेनॉल के इस्तेमाल (इथेनॉल कम्पैटिबिलिटी) को लेकर कम जानकारी दे रही हैं। उन्होंने बीमा पॉलिसियों से ईंधन से होने वाले नुकसान से जुड़ी शर्तों को हटाए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे मरम्मत का खर्च उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि भारत की सड़कों पर चलने वाले 90 प्रतिशत वाहनों के इंजिन ई 20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल वाले पेट्रोल को झेलने लायक नहीं हैं। कर्नाटक के मंत्री ने बताया कि 2025-26 में इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल का कुल मुनाफा 77,821 करोड़ रुपये था। उन्होंने सवाल उठाया कि एथेनॉल की अधिक मात्रा मिलाने (ओवर-ब्लेंडिंग) का खर्च उपभोक्ताओं को क्यों उठाना चाहिए?

कर्नाटक के उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने केंद्र के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से स्पष्टीकरण मांगा कि उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति कैसे की जा रही है। उन्होंने गडकरी के 2018 के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि ई20 ईंधन के आने के बाद पेट्रोल की कीमतें घटकर 55 रुपये प्रति लीटर तक आ जाएंगी; साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या वह वादा पूरा हुआ है।

अब सिर्फ एथनेवॉल पर चलेंगी गाड़ियां!

केंद्र के सड़क परिवहन मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को, 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989' में बदलावों की अधिसूचना जारी की। इसके तहत ऐसे 'फ्लेक्स-फ्यूल' वाहनों को अनुमति दी गई है, जो ई100 (यानी सिर्फ एथेनॉल) तक पर चल सकते हैं। इसके अगले ही दिन, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार की फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने (ब्लेंडिंग) की मात्रा को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

बता दें कि 'एथेनॉल सप्लाई ईयर' (ESY) 2025-26 के लिए इथेनॉल आवंटन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को सरकार से पूछा था कि अगर 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दी गई है, तो इसकी आपूर्ति कैसे की जाएगी? इससे पहले अक्टूबर 2026 में, ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेज़ रिसर्च (IIMR) के निदेशक डॉ. एच.एस. जाट ने बताया था कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 2030 तक पेट्रोल में 30 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग (E30) हासिल करना है।

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