मालवीय नगर से उपहार तक, दिल्ली के वे अग्निकांड जिन्होंने छीन लीं दर्जनों जिंदगियां
देश की राजधानी दिल्ली पहले भी कई बड़े अग्निकांडों की गवाह रही है, जिनमें होटल, व्यावसायिक इमारतों और अन्य प्रतिष्ठानों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है।

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में लेमन ग्रीन नाम के रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग में अब तक 21 लोगों की मौत ने राजधानी को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग रेस्तरां में लगी और पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
देश की राजधानी दिल्ली पहले भी कई बड़े अग्निकांडों की गवाह रही है, जिनमें होटल, व्यावसायिक इमारतों और अन्य प्रतिष्ठानों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। अलग-अलग समय पर हुए इन अग्निकांडों ने फायर सेफ्टी मानकों और आपातकालीन तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दिल्ली के वे अग्निकांड जिन्होंने सभी को झकझोर दिया
दिल्ली के इतिहास का सबसे चर्चित अग्निकांड 13 जून 1997 को हुआ था। दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा में लगी आग में 59 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हादसा आज भी राजधानी के सबसे भयावह अग्निकांडों में गिना जाता है।
उपहार अग्निकांड के बाद कई नियमों को सख्त बनाने की बात हुई, लेकिन समय के साथ सामने आए हादसों ने दिखाया कि अग्नि सुरक्षा को लेकर चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। विशेषज्ञ लगातार आपातकालीन निकास, फायर अलार्म और नियमित सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य बनाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं।
12 फरवरी 2019 को करोल बाग स्थित होटल अर्पित पैलेस में लगी आग ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। तड़के लगी इस आग में 17 लोगों की मौत हो गई थी। कई लोग धुएं में फंस गए थे, जबकि कुछ ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग तक लगा दी थी। बाद में होटल की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठे थे।
8 दिसंबर 2019 को पुरानी दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में एक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में 43 लोगों की मौत हो गई थी। संकरी गलियों और घनी आबादी वाले इलाके में लगी आग ने बचाव कार्य को बेहद मुश्किल बना दिया था। यह घटना दिल्ली के सबसे घातक अग्निकांडों में शामिल है।
मई 2024 में पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार स्थित एक नवजात शिशु देखभाल केंद्र में आग लगने से 7 नवजात बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना ने स्वास्थ्य संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी थीं।
इसके बाद मई 2026 में विवेक विहार इलाके की एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने फिर राजधानी को झकझोर दिया। इस हादसे में एक शिशु समेत 9 लोगों की मौत हो गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि कई परिवारों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया।
दिल्ली में आग की बड़ी घटनाओं को देखें तो एक बात लगभग हर मामले में समान दिखाई देती है। आग लगने के बाद धुआं तेजी से फैलता है और कई बार लोगों के पास सुरक्षित निकासी का पर्याप्त समय नहीं बचता। विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादातर मौतें सीधे आग से नहीं, बल्कि धुएं और दम घुटने की वजह से होती हैं।
होटल, रेस्तरां, अस्पताल, फैक्ट्री और बहुमंजिला इमारतों में हुए इन हादसों ने बार-बार यह सवाल खड़ा किया है कि अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी है। राजधानी में समय-समय पर निरीक्षण और कार्रवाई के बावजूद बड़ी घटनाएं सामने आती रही हैं।
मालवीय नगर की ताजा घटना ने एक बार फिर दिल्ली को उन पुराने जख्मों की याद दिला दी है, जिन्होंने दर्जनों परिवारों को हमेशा के लिए बदल दिया। उपहार सिनेमा से लेकर होटल अर्पित पैलेस, अनाज मंडी, विवेक विहार और अब मालवीय नगर तक, हर बड़े अग्निकांड के बाद एक ही सवाल उठता है, क्या सरकार, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने पिछले हादसों से पर्याप्त सबक लिया है?
