उत्तर प्रदेश: गंगा एक्सप्रेसवे पर फिर दिखीं बड़ी दरारें, निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे के पैचवर्क में बड़ी दरारें सामने आई हैं। बारिश के बाद सड़क धंसने और कटाव की घटनाओं के बीच निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे के पैचवर्क में एक बार फिर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दी हैं। मरम्मत किए गए हिस्से में दरारें सामने आने के बाद एक्सप्रेसवे की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब लगातार बारिश के बाद पहले ही गंगा एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मिट्टी धंसने और कटाव की समस्या सामने आ चुकी है। इन समस्याओं के बाद संबंधित एजेंसियों ने मरम्मत और पैचवर्क कराया था, लेकिन अब उसी मरम्मत वाले हिस्से में दरारें दिख रही हैं।
बारिश के बाद पहले भी क्षतिग्रस्त हुआ था एक्सप्रेसवे
ताजा मामला उन्नाव के आसपास का बताया जा रहा है। यहां मरम्मत किए गए हिस्से पर बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। लगातार बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में जमीन और सड़क की स्थिति को लेकर पहले ही चिंता जताई जा चुकी है। ऐसे में पैचवर्क में दोबारा दरारें आने से सड़क की टिकाऊ क्षमता को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे पर इससे पहले भारी बारिश के बाद करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बन गया था। मेरठ-प्रयागराज कैरिजवे पर किलोमीटर 421 के पास सड़क और उसके आसपास के एम्बैंकमेंट का एक हिस्सा बारिश के पानी के बहाव में क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) की टीम मौके पर पहुंची और मरम्मत का काम शुरू कराया गया था।
सोनिक टोल प्लाजा की एप्रोच रोड भी धंसी थी
इससे पहले जुलाई में उन्नाव के सोनिक टोल प्लाजा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली करीब सात मीटर की एप्रोच रोड भी भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी। यहां एम्बैंकमेंट में मिट्टी का कटाव हुआ था और सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। बारिश के बाद सामने आई इन घटनाओं ने एक्सप्रेसवे के निर्माण और उसकी संरचनात्मक मजबूती को लेकर चिंता बढ़ाई है।
36 हजार करोड़ से ज्यादा की लागत से बना है एक्सप्रेसवे
करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बना 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ता है। छह लेन का यह एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरता है और इसे राज्य के लिए अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जाता है। इसका उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को किया गया था।
उद्घाटन के कुछ ही समय बाद एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में नुकसान और मरम्मत की खबरें सामने आने लगी हैं। अब पैचवर्क वाले हिस्से में दरारें दिखने से परियोजना की टिकाऊ क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर भारी बारिश वाले इलाकों में ड्रेनेज व्यवस्था, एम्बैंकमेंट और निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ी है।
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