आजाद मैदान पहुंचा सरकारी प्रतिनिधिमंडल, जरांगे बोले- मराठवाड़ा के मराठों को कुनबी घोषित कर आरक्षण दें

जरांगे ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले 13 महीनों से इस मुद्दे से संबंधित राजपत्रों का अध्ययन किया और अब समय आ गया है कि समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे ताकि मराठों को कुनबी का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो।

आजाद मैदान पहुंचा सरकारी प्रतिनिधिमंडल, जरांगे बोले- मराठवाड़ा के मराठों को कुनबी घोषित कर आरक्षण दें
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नवजीवन डेस्क

महाराष्ट्र सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे के नेतृत्व में गठित एक प्रतिनिधिमंडल ने आजाद मैदान पहुंचकर मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात की। जरांगे ने प्रतिनिधिनंडल से कहा कि सरकार को मराठवाड़ा के सभी मराठों को कुनबी घोषित करके उन्हें आरक्षण देना चाहिए।

जरांगे ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले 13 महीनों से इस मुद्दे से संबंधित राजपत्रों का अध्ययन किया और अब समय आ गया है कि समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे ताकि मराठों को कुनबी का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो। जरांगे मराठा समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। जरांगे ओबीसी श्रेणी के तहत मराठों के लिए 10 प्रतिशत कोटा की मांग कर रहे हैं।


उन्होंने मांग की है कि मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए ताकि वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण पाने की पात्रता हासिल कर सकें। कुनबी पारंपरिक रूप से कृषि करने वाली जाति रही है जो फिलहाल ओबीसी श्रेणी में शामिल है। जरांगे ने कहा, ‘‘मराठवाड़ा में मराठों को कुनबी घोषित किया जाना चाहिए और उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए हैदराबाद और सतारा राजपत्रों को कानून का स्वरूप दिया जाना चाहिए।’’

इसके जवाब में सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे ने कहा कि उन्हें ऐसी रिपोर्ट देने का अधिकार नहीं है। शिंदे ने कहा कि यह पिछड़ा वर्ग आयोग का काम है। उन्होंने कहा, ‘‘जाति प्रमाण पत्र व्यक्तियों को दिया जाता है, पूरे समुदाय को नहीं।’’ शिंदे और जरांगे के बीच पूरी बातचीत का मराठी समाचार चैनलों पर सीधा प्रसारण किया गया।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में जरांगे ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे को उनसे बातचीत के लिए नियुक्त करने को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘मराठा और कुनबी को एक समान घोषित करने वाला सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी करना न्यायमूर्ति शिंदे का काम नहीं है। न्यायमूर्ति शिंदे को यहां भेजना सरकार, राजभवन और राज्य का अपमान है।’’


शिंदे ने संवाददाताओं को बताया कि कैबिनेट ने हैदराबाद राजपत्र को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं जरांगे के साथ अपनी बातचीत का विवरण मंत्रिमंडल की उपसमिति के पास भेजूंगा।’’ न्यायमूर्ति संदीप शिंदे, मराठा समुदाय के सदस्यों को ‘कुनबी’ जाति का प्रमाण पत्र जारी करने की पद्धति तय करने के लिए तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार द्वारा सितंबर 2023 में गठित समिति के अध्यक्ष हैं।

इस समिति को पूर्ववर्ती हैदराबाद और बंबई प्रांत के अभिलेखों का अध्ययन करने के लिए कहा गया था, जहां मराठों का उल्लेख कभी-कभी कुनबी के रूप में किया गया है। समिति को शुरुआत में मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए गठित किया गया था, बाद में इसके दायरे में पूरे राज्य को शामिल कर लिया गया।

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