सियाचिन में तैनात सैनिकों को न तो जरूरी खुराक और न ही पोशाक मुहैया करा पा रही सरकार: CAG रिपोर्ट में खुलासा

मोदी सरकार यूं तो बात-बात पर सेना और सैनिकों की बात करती है, लेकिन संसद में पेश सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि सियाचिन जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों को न तो जरूरी खुराक मिल पा रही और न ही जरूरी पोशाक।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

केंद्र की मोदी सरकार जिस सेना और सैनिकों के नाम पर वोट बटोरती है, उनकी ही हालत बेहद खराब है। संसद में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सियाचिन, लद्दाख, डोकलाम जैसे ऊंचे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को जरूरत के मुताबिक खुराक नहीं मिल पाई और न ही मुश्किल मौसम से निपटने के लिए जिस तरह के खास कपड़ों की समय से खरीद हो पाई। यर रिपोर्ट 2017-18 की है।

सीएजीकी रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए विशेष कपड़े और उपकरण पुराने स्पेसिफिकेशन के हिसाब से खरीदे जिसके कारण सैनिकों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए राशन की मात्रा सैनिकों की रोजाना की क्षमता को ध्यान में रखकर तय की जाती है।लेकिन बेसिक आइटम के बदले में वैकल्पिक मदों यानी सब्स्टिट्यूट को सीमित प्रतिशत और ‘लागत के आधार’ पर भी अधिकृत किया गया। बुनियादी खाद्य वस्तुओं की जगह महंगे सब्स्टिट्यूट को उसी पैसे से खरीदने की अनुमति के कारण सैन्य दलों द्वारा ली जाने वाली खुराक में कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना की ईस्टर्न कमांड ने तो ओपन टेंडर सिस्टम के जरिए कॉन्ट्रैक्ट दिया लेकिन नॉर्दन कमांड में लिमिटेड टेंडरिंग के जरिए खरीद की गई।

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सियाचिन आदि ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों को वहां की जरूरत के हिसाब के कपड़े खरीदने की प्रक्रिया में हुई देरी और कॉन्ट्रैक्ट के बाद भी सामान मिलने में हुई देरी से वहां तैनात सैनिकों को जरूरी कपड़े और उपरकण की भारी कमी झेलनी पड़ी। खरीद प्रक्रियाओं में देरी की वजह से सैनिकों का हेल्थ और हाइजीन भी प्रभावित हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिफेंस लैब में रिसर्च और डिवेलपमेंट की कमी और स्वदेशीकरण में विफलता की वजह से सामान आयात करने पर ही निर्भरता रही।


रिपोर्ट के मुताबिक सैनिकों की जरूरतों का सही आकलन किए बिना ही सालाना प्लान बनाए जा रहे हैं और इन्हें पूरा करने में तय समय सीमा से बहुत ज्यादा देरी हो रही है। जिसकी वजह से सैनिक को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण मौसम और माहौल में रहना पड़ रहा है।

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