महाराष्ट्र से किसानों का जत्था दिल्ली के लिए रवाना, कृषि कानूनों के खिलाफ और तेज होगा आंदोलन

बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन नए कृषि कानूनों का विरोध करते हुए महाराष्ट्र के किसान पूरे भारत के किसानों के साथ पूर्ण एकजुटता दिखाते हुए दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। इन किसानों के गुरुवार तक दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने की संभावना है।

फोटोः IANS
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नवजीवन डेस्क

दिल्ली की सीमाओं पर विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों का आंदोलन पिछले 27 दिन से जारी है। हर दिन के साथ यह आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस बीच मंगलवार को महाराष्ट्र से अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के बैनर तले नासिक से 3,000 से अधिक किसानों ने आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली की ओर कूच किया है। इसके बाद आंदोलन के और तेज होने की संभावना है।

विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि अपने साथी किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र से मंगलवार को 1,270 किलोमीटर लंबा 'वाहन जत्था' (जुलूस) दिल्ली के लिए चल दिया है। एआईकेएस के प्रवक्ता पी.एस. प्रसाद ने कहा कि 2,000 से अधिक किसानों का जत्था वाहनों से सोमवार शाम नासिक से निकला था। आज दिन में जब वे धुले से राज्य की सीमाओं की ओर बढ़ रहे थे, तब 1,000 से अधिक लोग मालेगांव में भी शामिल हुए हैं।

फोटोः IANS
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इस अवसर पर हजारों स्थानीय, गैर-किसान और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने किसानों की सुरक्षित यात्रा और उनके सफल होने की कामना भी की। गुरुवार को दिल्ली पहुंचने के लक्ष्य के साथ निकली महाराष्ट्र की टुकड़ी को उम्मीद है कि रास्ते में काफी और लोग भी जत्थे में शामिल होंगे। इसके अलावा बड़ी संख्या में किसानों ने मंगलवार दोपहर को मुंबई में कुछ कॉर्पोरेट घरानों के कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया।

किसान आंदोलन का आज 28वां दिन है। पिछले चार हफ्तों से दिल्ली की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में राजधानी की अलग-अलग सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों को देश के तमाम राज्यों के किसानों का समर्थन मिल चुका है। वहीं अब किसानों का साथ देने के लिए महाराष्ट्र के नासिक के किसान संगठनों ने दिल्ली की ओर कूच कर दिया है। केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान कानून वापसी की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। सरकार कानूनों में कुछ संशोधन के लिए तैयार है, मगर कानूनों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है।

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