'हेलमेट नहीं होता तो अभिषेक की जान जा सकती थी', हमले के बाद ममता बनर्जी का बड़ा दावा

ममता बनर्जी के मुताबिक, पत्थरबाजी और मारपीट के कारण अभिषेक के सीने और पसलियों में चोटें आईं। हमले के बाद उन्होंने गर्दन, पीठ और कमर में दर्द की शिकायत भी की।

फोटोः @AITCofficial
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नवजीवन डेस्क

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पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में टीएमसी सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि हमले के बाद अभिषेक बनर्जी के सीने में ब्लड क्लॉट जम गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस समय अभिषेक के सिर पर हेलमेट नहीं होता, तो घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।

सोनारपुर में भीड़ ने किया विरोध, लगे नारे

शनिवार शाम अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान स्थानीय लोगों की एक भीड़ ने कथित तौर पर उन पर अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर मौजूद लोगों ने उनके खिलाफ ‘चोर, चोर’ के नारे भी लगाए। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें अभिषेक सफेद शर्ट और क्रिकेट हेलमेट पहने हुए भीड़ के बीच दिखाई दे रहे हैं।

ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि सही समय पर हेलमेट पहनाए जाने से बड़ा हादसा टल गया। उनके मुताबिक, पत्थरबाजी और मारपीट के कारण अभिषेक के सीने और पसलियों में चोटें आईं। हमले के बाद उन्होंने गर्दन, पीठ और कमर में दर्द की शिकायत भी की।


अस्पतालों पर दबाव डालने का आरोप

हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को पहले ईएम बाईपास के पास स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें इमरजेंसी विभाग में भर्ती कर मेडिकल सहायता दी गई। कुछ देर बाद ममता बनर्जी भी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां उचित इलाज नहीं किया जा रहा था, जिसके बाद अभिषेक को शहर के दूसरे निजी अस्पताल में ले जाया गया।

ममता ने सवाल उठाया कि अगर अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी, तो उन्हें पहले आईटीयू में क्यों ले जाया गया, करीब दो घंटे तक निगरानी में क्यों रखा गया और कई मेडिकल जांच तथा स्कैन कराने की सलाह क्यों दी गई। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों ने चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर कई गंभीर चोटें देखीं, जिसके बाद तत्काल जांच की सिफारिश की गई।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन पर भी उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अस्पतालों और डॉक्टरों पर अभिषेक का उचित इलाज न करने के लिए ऊपर से दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को भर्ती करने, छुट्टी देने और उसका इलाज करने का निर्णय केवल चिकित्सा विशेषज्ञों का होना चाहिए, न कि किसी बाहरी दबाव का।

ममता बनर्जी ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों का जवाब हिंसा, धमकी या डर से नहीं दिया जा सकता। उन्होंने बताया कि टीएमसी ने भरोसेमंद डॉक्टरों और पारिवारिक चिकित्सकों की निगरानी में अभिषेक का इलाज जारी रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अभिषेक के दौरे की जानकारी पहले से होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिंसा को अंजाम देने के लिए बाहरी लोगों को लाया गया था।

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