संसदीय समिति की रिपोर्ट पर अमल करती मोदी सरकार, तो देश में नहीं होता ऑक्सीजन के लिए हाहाकार

केंद्र की नरेेंद्र मोदी सरकार ने अगर स्वास्थ्य मामलों की संसदीय समिति की सिफारिशें मान ली होतीं तो देश में आज ऑक्सीजन का संकट संभवत: नहीं होता। यह रिपोर्ट 21 नवंबर 2020 को दी गई थी जिसमें ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाने और वितरण सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।

फोटो : @Jairam_Ramesh
फोटो : @Jairam_Ramesh

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अगर स्वास्थ्य पर संसदीय समिति की रिपोर्ट में की गई सिफारिशों को मान लिया होता तो आज देश में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार नहीं मचा होता और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। समिति ने बीते साल यानी 2020 के नवंबर में सरकार को सिफारिश की थी कि ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ा जाए। इस बात की जानकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने शेयर की है। उन्होंने संसदीय समिति की उस रिपोर्ट के कुछ हिस्से भी शेयर किए हैं जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि सरकार को ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाना होगा ताकि किसी भी आपदा के समय इसकी कमी न महसूस हो।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सरकार को न सिर्फ ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाना चाहिए बल्कि इसकी कीमतों पर भी फैसला लेना चाहिए। इसके अलावा समिति ने सभी अस्पतालों को जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन सप्लाई की सिफारिश भी इस रिपोर्ट में की थी। यह रिपोर्ट 21 नवंबर 2020 को राज्यसभा चेयरमैन को सौंपी गई थी, और 25 नवंबर 2020 को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी प्रति भेजी गई थी।

इतना ही नहीं इस रिपोर्ट को 2 फरवरी 2021 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में रखा गया था।

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