हम हैं कामयाब-12: स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए पटना में प्रसिद्ध '3टी फूड्रिंक' नई उड़ान के लिए तैयार
आज जब हम '3टी फूड्रिंक' की सफलता को देख रहे हैं, तो ज़रूरी मालूम होता है कि 10 वर्षों में शम्स आलम खान की मेहनत और संघर्ष पर एक सरसरी नज़र डालें।

क्या आप ‘चैयाशी’ शब्द के बारे में जानते हैं? शायद ही आप इस शब्द से परिचित होंगे। यह शब्द पटना में कुछ ही लोग इस्तेमाल करते हैं, और मैंने अक्सर मीडिया संस्थानों में काम करने वालों की ज़बान से यह शब्द सुना है। जो शरीफ़ लोग ‘अय्याशी’ नहीं करते, वे ‘चाय’ पीने को ‘चैयाशी’ नाम देकर आनंदित होते हैं। आज से लगभग 20 वर्ष पूर्व जब मैं उर्दू दैनिक ‘पिंदार’ और ‘राष्ट्रीय सहारा’ में काम करता था, तो अपने सहकर्मियों को दफ़्तर से बाहर जाता देखकर पूछता था, “कहाँ जा रहे हैं?” प्रायः उत्तर मिलता था “चैयाशी करने जा रहा हूँ।” ऐसी ही ‘चैयाशी’ की एक महफ़िल में जब कुछ मित्र चाय और नमकीन का आनंद ले रहे थे, तो अचानक यह बात निकल पड़ी कि पटना के सुल्तानगंज क्षेत्र में कोई ऐसा रेस्तराँ नहीं है जहाँ स्वादिष्ट ‘चिकन रोल’ या फिर ‘चिकन तंदूरी’, ‘चिकन चाउमीन’, ‘बिरयानी’ आदि उपलब्ध हों। यह बात निकली, और फिर एक ऐसा संस्थान अस्तित्व में आया जो सफलता का उदाहरण बन चुका है।

बात नवंबर 2015 की है, जब शम्स आलम खान अपने मित्रों के साथ चाय-नाश्ते का आनंद ले रहे थे। हँसी-मज़ाक में स्वादिष्ट व्यंजनों का उल्लेख कब गंभीर चर्चा में बदल गया, पता ही नहीं चला। फिर शम्स आलम अचानक ही रेस्तराँ शुरू करने का इरादा कर बैठे। यह इरादा इतना दृढ़ था कि उन्होंने खाड़ी देश में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग क्षेत्र में लगभग 1.70 लाख रुपये मासिक वेतन को पीछे छोड़ दिया और एक मित्र के सहयोग से ‘3टी फूड्रिंक’ की नींव रख दी। आज लगभग 10 वर्षों बाद ‘3टी फूड्रिंक’ लोगों की ज़बान से होते हुए उनके दिलों में अपनी एक अलग जगह बना चुका है। ‘3टी फूड्रिंक’ का टैगलाइन है ‘टेस्ट द टेस्ट’, अर्थात ‘स्वाद का स्वाद लीजिये’। ‘3टी फूड्रिंक’ ने अपने इस टैगलाइन को वास्तविकता का रूप दिया, और अब तक के ईमानदार व्यापार का परिणाम है कि यह संस्थान नई उड़ान भरने के लिए तैयार है। ‘3टी फूड्रिंक’ के संस्थापक और स्वामी शम्स आलम का कहना है कि बहुत जल्द ‘3टी फूड्रिंक’ फ्रेंचाइज़ी के रूप में विभिन्न शहरों तक पहुँचने वाला है।
आज जब हम ‘3टी फूड्रिंक’ की सफलता को देख रहे हैं, तो ज़रूरी मालूम होता है कि इन 10 वर्षों में शम्स आलम खान की मेहनत और संघर्ष पर एक सरसरी नज़र डालें। वे बताते हैं कि लगभग 10 लाख रुपये की पूँजी लगाकर रेस्तराँ शुरू तो हो गया, लेकिन उसे लोगों तक पहुँचाना बहुत आसान नहीं था। दरअसल सुल्तानगंज, आलमगंज, सब्ज़ी बाग़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में लोग बाहर के भोजन पर बहुत अधिक खर्च नहीं करते, इसलिए गुणवत्तापूर्ण और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ-साथ कीमत भी बहुत उचित रखनी थी। शुरुआत हुई ‘चिकन रोल’ से, जिसने बहुत कम समय में प्रसिद्धि प्राप्त कर ली। यह कोलकाता शैली के ‘काठी रोल’ की तरह था जो डिलीवरी और पिक-अप के माध्यम से बड़ी संख्या में घर-घर पहुँचने लगा। शाम के समय सुल्तानगंज में रेस्तराँ के बाहर ‘चिकन रोल’ खाने के लिए युवाओं की भीड़ भी जुटने लगी। इसके साथ ही चाइनीज़ फास्ट फूड ने भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। इससे उत्साहित होकर ‘कोलकाता बिरयानी’, ‘चिकन तंदूरी’ और ‘चिकन चाउमीन’ आदि को मेन्यू में शामिल किया गया, जिसका स्वाद लोगों को बहुत पसंद आया। शम्स आलम का जुनून और योजनाबद्ध कार्य सफल रहा, लेकिन इस स्वाद को बनाए रखना, गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी न आने देना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसके लिए विशेषज्ञ रसोइये रखे गए, जिनकी संख्या बाद में बढ़ाई गई ताकि कोई समस्या उत्पन्न न हो।

सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण दौर कोरोना का था क्योंकि इस महामारी ने पूरी दुनिया में रेस्तराँ व्यवसाय को ठप कर दिया था। शम्स आलम कहते हैं कि “यह वह दौर था जब लॉकडाउन के कारण रेस्तराँ पूरी तरह बंद था, लेकिन कर्मचारियों को वेतन भी दिया जाता था और भोजन भी। यह चरण अत्यंत कठिन था, हालाँकि घरवालों की सहायता और मकान-मालिक के सहयोग ने हौसला टूटने नहीं दिया।” वे यह भी बताते हैं कि कोरोना महामारी का पहला चरण बीतने के बाद जब महामारी के दूसरे चरण में शाम 7 बजे से लॉकडाउन लगना शुरू हुआ, तो परिस्थितियाँ चिंताजनक हो गईं। चूँकि रेस्तराँ के अधिकांश ऑर्डर शाम और रात में ही मिलते थे, इसलिए शाम का लॉकडाउन इस सेक्टर के लिए घातक सिद्ध हो रहा था। अच्छी बात यह रही कि कर्मचारियों और घरवालों सभी ने मिलकर इस कठिन समय का सामना किया। फिर जब ईश्वर की कृपा से संकट टला, तो परिस्थितियाँ बेहतर से बेहतरीन होती चली गईं।

कोरोना के समय (2020 में) ही शम्स आलम खान ने दिल्ली के शाहीन बाग़ में भी रेस्तराँ शुरू किया था, लेकिन लॉकडाउन के कारण 3-4 महीनों में ही उसे बंद करना पड़ा। वैसे भी कोरोना से संघर्ष करते हुए पटना के साथ-साथ दिल्ली में व्यवसाय संभालना आसान नहीं था। एक असफलता शम्स आलम को पटना के अनीसाबाद क्षेत्र में भी मिली, जहाँ उन्होंने ‘तंदूरी बिरयानी’ नाम से 2023 में एक रेस्तराँ खोला था जिसका मुख्य विचार ‘होम डिलीवरी’ था। योजना थी अली नगर, अल्बा कॉलोनी, पुलिस कॉलोनी और हारून नगर कॉलोनी आदि में अपनी सेवाएँ प्रदान करना। यहाँ ‘ऑनलाइन एग्रीगेटर्स’ के कुछ नियमों और शर्तों ने नुकसान पहुँचाया, और कुछ बाज़ार अनुसंधान में हुई त्रुटियों ने। शम्स आलम बताते हैं कि “ऑनलाइन एग्रीगेटर्स कई बार फ़ूड डिलीवरी के बाद 60 प्रतिशत तक राशि अपने पास रख लेते थे, जिससे लाभ में बहुत कमी हो जाती थी। दूसरी ओर जिन कॉलोनियों से बहुत आशाएँ थीं, वहाँ लोग स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए बाहर का भोजन कम खाते थे, या फिर बड़े होटलों का रुख करते थे।” यह एक ‘क्लाउड किचन’ था जो एक वर्ष बाद बंद हो गया, लेकिन शम्स आलम को इससे कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुए।

एक ओर दिल्ली और अनीसाबाद में असफलता मिली, लेकिन दूसरी ओर सुल्तानगंज का ‘3टी फूड्रिंक’ नई ऊँचाइयाँ छूता रहा। इस रेस्तराँ के प्रति लोगों में उत्पन्न हो चुके विश्वास का अनुमान इस बात से भलीभाँति लगाया जा सकता है कि 2024 में ऑनलाइन एग्रीगेटर ‘स्विगी’ से ‘वेज बिरयानी’ में इसे ‘नंबर 1’ का अवार्ड प्राप्त हुआ और ‘चिकन बिरयानी’ में ‘नंबर 2’ का। चूँकि ये सम्मान स्वादिष्ट व्यंजन खाने वालों के मतदान से प्राप्त हुए, इसलिए शम्स आलम का उत्साहित होना स्वाभाविक था। यही उत्साह है जिसने ‘3टी फूड्रिंक’ को नई उड़ान का मार्ग दिखाया, और अब कुछ कागज़ी प्रक्रिया के बाद अन्य शहरों में भी इसकी फ्रेंचाइज़ी देखने को मिल सकती है। शम्स आलम का कहना है कि लगभग 3 महीनों में कागज़ी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, लेकिन अभी से फ्रेंचाइज़ी के लिए फ़ोन आने शुरू हो चुके हैं। ओडिशा से एक फ़ोन आया है, जिनसे प्रथम चरण की बातचीत हो चुकी है। दिल्ली से भी एक व्यक्ति ने फ्रेंचाइज़ी के लिए संपर्क स्थापित किया है। अर्थात स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए पटना में प्रसिद्ध हो चुका ‘3टी फूड्रिंक’ का स्वाद अब अन्य शहरों में भी पहुँचने वाला है।
‘चिकन रोल’ से शुरू हुए ‘3टी फूड्रिंक’ के सफ़र की आज सबसे ख़ास बात यह है कि यहाँ सुबह, शाम, रात… हर समय के व्यंजन मिल जाएँगे। बल्कि हर समय, हर मौसम और हर आयु वर्ग के लोगों के लिए यहाँ व्यंजनों की एक लंबी सूची उपलब्ध है। यह आपको तय करना है कि चिकन कबाब रोल खाएँगे या लोडेड चिकन पॉपकॉर्न, या फिर फ़्रेंच फ़्राइज़, पनीर चिली रोल, क्रिस्पी वेज बर्गर, चिकन रेशमी, तंदूरी बिरयानी, चिकन मांडी, नूडल्स, पुरस्कार-विजेता चिकन बिरयानी, चिकन मंचूरियन, चिकन कड़ाही, मुग़लई पराठा, या कुछ और। व्यंजनों की यह सूची बहुत लंबी है।
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