हापुड़ लिंचिंग मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा मेरठ रेंज के आईजी की निगरानी में हो मामले की जांच

हापुड़ मॉब लिंचिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आईजी मेरठ रेंज की देखरेख में इस मामले की जांच होगी। सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक संबंधित आईजी की देखरेख में मॉब लिंचिंग मामले की जांच होगी।

फोटो: सोशल मीडिया 
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आईएएनएस

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को हापुड़ में मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट पीटकर की गई हत्या के मामले की जांच की खुद प्रत्यक्ष निगरानी करने का आदेश दिया। हापुड़ जिले के बजहेरा गांव में 18 जून को भीड़ ने मवेशी व्यापारी कासिम की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि अधिकारी (आईजी) मॉब लिंचिंग के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों के अनुसार काम करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल द्वारा इस मामले की जांच की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

पीठ ने कहा, “जांच मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक की सीधी निगरानी में की जाएगी।” मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इससे पहले पीठ को बताया कि मामले के 11 में से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले में की जांच पुलिस अधीक्षक की निगरानी में नए थानाध्यक्ष द्वारा की जा रही है।

याचिकाकर्ता के वकील समायुद्दीन ने मामले को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने पर जोर दिया। समायुद्दीन की भी गोरक्षकों ने पिटाई की थी। पीठ ने पुलिस से पूछा कि जांच पूरी करने में उसे कितना वक्त लगेगा। पुलिस ने कहा कि जांच 60 दिनों में पूरी हो जाएगी।

याचिकाकर्ता ने आरोपियों की जमानत रद्द करने के संबंध में अपनी दलील पेश की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लिंचिंग को रोकने में शीर्ष अदालत के निर्देश की अवहेलना की। कोर्ट ने 17 जुलाई को केंद्र और राज्य सरकारों को स्वयंभू रक्षा के नाम पर भयानक कृत्यों को अंजाम देने की घटनाओं, पीट-पीट कर हत्या की घटनाओं को रोकने और भीड़तंत्र को समाप्त करने के लिए 22 दिशा-निर्देश जारी किए थे। साथ ही, सर्वोच्च न्यायलय ने उन्हें इस दिशा में कार्य करते हुए रोकथाम, समाधान और दंडात्मक उपाय करने को कहा था।

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