हरियाणाः पंचकूला की सड़कों पर किसान आंदोलन ने लिखी नई इबारत, अन्नदाताओं ने बताया- न मुट्ठी भर हैं और न थके हैं

किसानों का सैलाब इस बात की तस्‍दीक कर रहा था कि वे थके नहीं हैं। पलवल से गुरुग्राम, भिवानी, रोहतक, सिरसा, सोनीपत, कुरुक्षेत्र और हिसार समेत हरियाणा के हर कोने से आकर पंचकूला की सड़कों पर उतरे किसान इस आंदोलन की पैठ गांव-चौपाल तक होने की गवाही दे रहे थे।

फोटोः धीरेंद्र अवस्थी
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धीरेंद्र अवस्थी

हरियाणा की प्रशासनिक राजधानी पंचकूला की सड़कों पर किसान आंदोलन ने शनिवार को एक नई इबारत लिख दी। पूरा शहर पुलिस छावनी में तब्‍दील था और सड़कों पर किसानों का सैलाब था। अपने हक के लिए पूरे हरियाणा से हजारों किसान सरकार को जगाने के लिए सड़कों पर उतर पड़े थे। लेकिन आश्‍चर्य की बात यह रही कि दिल्‍ली कूच के वक्‍त किसानों पर आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारें और लाठियां बरसाने वाली हरियाणा सरकार की ठसक आज गायब थी। किसान पंचकूला की सड़कों पर आगे बढ़ते रहे और पुलिस उन्‍हें रास्‍ता देती रही।

हरियाणाः पंचकूला की सड़कों पर किसान आंदोलन ने लिखी नई इबारत, अन्नदाताओं ने बताया- न मुट्ठी भर हैं और न थके हैं

किसान आंदोलन के सात महीने पूरे होने पर शनिवार को राजभवन घेराव के लिए निकले हजारों किसानों ने सरकार को यह बता दिया कि न तो वह टूटे हैं और न थके हैं। आंदोलनकारियों को मुट्ठी भर किसान बताने वाले मुख्‍यमंत्री खट्टर को भी यह संदेश दे दिया कि हरियाणा के हर गांव-गली तक किस तरह यह आंदोलन गहरे तक बैठ चुका है।

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पंचकूला में घग्‍गर नदी के किनारे शिवालिक की पहाडियों में स्थित गुरुद्वारा नाडा साहिब से संयुक्‍त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव, गुरुनाम सिंह चढ़ूनी और अभिमन्‍यु कोहाड़ के नेतृत्‍व में जब किसानों का कारवां चला तो सरकार को संदेश जा चुका था कि वह मुट्ठी भर नहीं हैं। सड़क पर जहां तक नजर जा रही थी, वहां तक बस किसान जत्‍थेबंदियां और झंडे ही नजर आ रहे थे। फिजा में एमएसपी की गारंटी दो, तीनों काले कानून रद्द करो, साडा हक, एत्‍थे रख और देश की गद्दार सरकार मुर्दाबाद जैसे नारे गूंज रहे थे। बीच-बीच में पंजाब-हरियाणा भाईचारा जिंदाबाद के नारे भी लग रहे थे।

महिला किसानों की भी इस मार्च में बड़ी तादाद में भागीदारी इस आंदोलन की ताकत और व्‍यापकता को बयां कर रही थी। नाडा साहिब से माजरी चौक और हरियाणा पुलिस हेडक्‍वार्टर के पास से गुजरते हुए चंडीगढ़ की सीमा तक तकरीबन पांच किलोमीटर सड़कों पर किसानों का सैलाब नारे लगाते हुए चलता रहा। पूरा पंचकूला किसानों ने पार किया, लेकिन पुलिस खामोशी से उन्‍हें रास्‍ता देती रही। जैसे-जैसे किसानों का सैलाब आगे बढ़ता गया भारी तादाद में मौजूद पुलिस अपने बैरीकेड हटाती गई। जोश से भरे किसान बार-बार इस बात का ऐलान कर रहे थे कि तीनों कृषि कानून वापस होने तक वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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जय किसान आंदोलन का झंडा थामे हिसार से आए बीरेंदर सिंह बागोरिया का कहना था कि किसानों के खून-पसीने की कमाई से ही मोदी की मंडली जहाजों में घूम रही है। किसान अपने आप पर आ गया तो इस सरकार का पतन होने से कोई रोक नहीं पाएगा। कैथल से आए दो एकड़ जमीन के मालिक 74 वर्षीय गुलाब का कहना था कि हम अपने बच्‍चों के लिए आए हैं। अगर ये तीनों कानून लागू हो गए तो पंजाब-हरियाणा भूखा मर जाएगा। अपने जीवन में इतनी गंदी सरकार हमने कभी नहीं देखी। इस सरकार को अपने कदम पीछे लेने ही होंगे।

कैथल से ही आए 72 वर्षीय रतिया का गुस्‍सा भी इसी तरह का था। मोटर साइकिल से आए सिंघु बार्डर पर किसानों के साथ बैठे जींद निवासी युवा विक्‍की का कहना था कि इस सरकार को किसानों की मांगें माननी ही पड़ेंगी। सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्‍प नहीं है। वहीं गाजीपुर बार्डर से आए रिटायर्ड सूबेदार मेजर जयप्रकाश मिश्रा का कहना था कि सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने ही होंगे। साथ ही शहीद किसानों के परिजनों को 20-20 लाख देने की मांग उन्‍होंने सरकार से की। रिटायर्ड आर्मी आफिसर अनुराग लठवाल ने भी यही मांग रखी।

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किसानों के इस राजभवन मार्च में आंदोलन के हर रंग नजर आए। महिलाएं गीतों के जरिये खट्टर और मोदी सरकार को कोस रही थीं तो युवा किसान केंद्र और राज्‍य सरकार के रवैये के खिलाफ आक्रोश से भरे थे। सरकार के किसी ट्रैप में फंसने से बचने के लिए बार-बार शांति बनाए रखने की अपील कर रहे किसान नेता सावधान भी थे।

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सिंघू बार्डर, गाजीपुर बार्डर और टिकरी बार्डर समेत दिल्‍ली की सीमा पर लगे हर मोर्चे से आए जोश से भरे किसान इस बात की तस्‍दीक कर रहे थे कि वह थके नहीं हैं। पलवल से लेकर गुरुग्राम, भिवानी, रोहतक, सिरसा, सोनीपत, कुरुक्षेत्र और हिसार समेत हरियाणा के हर कोने से आकर पंचकूला की सड़कों पर उतरे किसान इस आंदोलन की पैठ गांव-चौपाल तक होने की गवाही दे रहे थे।

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