हरियाणा सरकार जान ही नहीं पाई, कब गांवों में कहर ढाने लगा कोरोना, हालात भयावह, पसरा मातम

कोरोना वायरस संक्रमण से हरियाणा के गांवों में स्थितियां बेहद गंभीर हैं। लेकिन टेस्टिंग के बिना खट्टर सरकार के पास कोई सही आंकड़ा नहीं है। पर श्माशान घाटों की रिपोर्ट पर यकीन करें तो हालात बयां करने के लिए भयावहता शब्द भी कम पड़ रहा है।

फोटोः धीरेंद्र अवस्थी
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धीरेंद्र अवस्थी

शहरों में पस्त पड़ी हरियाणा सरकार को पता ही नहीं चला कि गांवों में कोरोना कब कहर बरपाने लगा। अप्रैल के अंतिम सप्ताह जब बिना ऑक्सीजन के लोग दम तोड़ रहे थे, उसी वक्त हरियाणा के गांवों में कोविड की स्थिति गंभीर हो चुकी थी। मई के दूसरे हफ्ते में जब तक सरकार की नींद कुछ टूटी तब तक हालात नियंत्रण से बाहर जा चुके थे। आज प्रदेश के गांवों में कोरोना की भयावहता का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि हर दूसरे या तीसरे घर में कोरोना के लक्षण वाले मरीज हैं। किसी गांव में तो हर घर में लोग बीमार हैं। किसी-किसी गांव में दो से तीन दर्जन तक लोग दम तोड़ चुके हैं। लेकिन सरकार के पास कोई आंकड़ा नहीं है। सरकार पर भरोसा खो चुके लोग गांवों में हवन की धूनी कर रहे हैं। उनका मानना है कि इसी से अब सुख-शांति आएगी।

हरियाणा के गांवों में स्थितियां बेहद गंभीर हैं। लेकिन टेस्टिंग के बिना खट्टर सरकार के पास कोई सही आंकड़ा नहीं है। पर श्माशान घाटों की रिपोर्ट पर यकीन करें तो हालात बयां करने के लिए भयावहता शब्द भी कम पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर ही जाएं तो 19 से 25 अप्रैल तक प्रदेश में कोरोना से जान गंवाने वाले करीब साढ़े तीन सौ लोगों में ग्रामीण क्षेत्रों से 119 लोग शामिल थे। इसके बाद यह आंकड़ा बढ़ता चला गया। इसके अगले हफ्ते ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना से मृतकों की संख्या करीब ढाई सौ हो चुकी थी। इसमें सबसे अधिक जान गंवाने वाले हिसार से थे, जिनकी तादाद तीन दर्जन से ज्यादा थी।

मई के पहले हफ्ते में रोहतक के टिटौली गांव में तो कोरोना विस्फोट हो गया। टिटौली में 13 दिन में 32 लोगों की मौत की बात सामने आई। बाद में यह आंकड़ा 40 तक चला गया। इस गांव में खौफ का आलम ऐसा था कि ग्रामीणों ने गांव के मुख्य प्रवेश द्वारों पर पहरा बैठा दिया, जिससे बाहर का कोई आदमी अंदर न आ सके। गांव में ट्रैक्टार-ट्राली पर हवन करते हुए उसका धुंआ पूरे गांव में किया गया, जिससे लोगों को इस मुसीबत से मुक्ति मिले।

दो पंचायतों वाले गांव मदीना में दो दिन में दर्जन भर से ज्यादा लोगों ने दम तोड़ा। सभी मृतक बुखार से पीडि़त थे, लेकिन किसी की जांच नहीं हुई थी। यहां की सरपंच अंजू देवी ने भी माना कि डेथ ज्यादा हो रही हैं। इसी दौरान हिसार के बहबलपुर गांव में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई। सरपंच प्रतिनिधि के मुताबिक लोग मौत की वजह ही समझ नहीं पा रहे। गांव में लोग बुखार से पीडि़त हैं। नारनौल के गांव कोरियावास, अगियार, पाथेड़ा, रघुनाथपुरा, मंढाणा, तिगरा, गुजरवास, गणियार और दुबलाना में भी कोरोना का संक्रमण बड़ी तेजी से बढ़ा।


इस बीच सरकार तो नहीं जागी, लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए पंचायतों ने अपने स्तर पर कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए। भिवानी के तिगड़ाना गांव में दस दिन में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत के बाद पंचायत ने सार्वजनिक स्थानों पर ताश खेलने और हुक्का पीने पर 500 रुपये का जुर्माना लगा दिया। गांव के हर दूसरे या तीसरे घर में लोग पीड़ित थे। खरखौदा के सिसाना गांव में डेढ़ दर्जन से ज्या दा मौतों के बाद ठीकरी पहरा बैठाया गया। यहां भी हर दूसरे-तीसरे घर में व्यक्ति बुखार से पीड़ित बताया गया।

हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में मौतों का आंकड़ा बढ़ने के साथ खौफ बढ़ता गया। गांवों में 11 अप्रैल से लेकर 9 मई तक हर सप्ताह मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। 10 मई तक राज्य में कोरोना से हुई 5605 मौतों में से ग्रामीण क्षेत्रों में 1879 मौतें हुई थीं। पांच जिले ऐसे बताए जाते हैं, जहां ज्यादा लोगों की जान कोरोना से गई। इनमें हिसार में 286, भिवानी में 163, फतेहाबाद में 141, कैथल में 111 और जींद में 102 लोगों की जान कोरोना से गई। मई के शुरुआती सप्ताह में हिसार के ग्रामीण क्षेत्र में तकरीबन पांच दर्जन, भिवानी में चार दर्जन और फतेहाबाद के गांवों में चार दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत कोरोना से होने की खबर है। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र करनाल में बड़ा गांव, मुरादगढ़ और गुढ़ा जैसे गांव हॉटस्पॉट बन गए।

पंजाब और राजस्थान की सीमाओं से घिरे पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल के सिरसा जिले में आते करीब 20 हजार की आबादी वाले गांव चौटाला की तस्वीार तो बेहद निराशाजनक है। यहां के तीन नेताओं की आज भी राज्या की सत्ता में मजबूत धमक है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, उनकी विधायक मां नैना चौटाला और चौधरी देवीलाल के बेटे कैबिनेट मंत्री रणजीत चौटाला इसी गांव से हैं, लेकिन तकरीबन रोजाना ही यहां मौत होने के बावजूद कोई हाल भी पूछने नहीं आया। औसतन हर घर में कोरोना जैसे लक्षणों वाला मरीज मौजूद है। हालात ऐसे हैं कि लोग चंदा जुटाकर खुद ही गांव में सेनिटाइजेशन कर रहे हैं। यहां के लोगों को इलाज करवाने पंजाब के बठिंडा और राजस्थान के हनुमानगढ़ जाना पड़ता है।

पन्नीवाला मोटा गांव में दर्जन भर मौतों की खबर है। गांव में पीएचसी होने के बावजूद न यहां ऑक्सीजन है और न पर्याप्त दवा। सरपंच सतवीर के मुताबिक मई के शुरुआती दस दिनों में यहां रोजाना दो मौतों का औसत है। यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था झोला छाप डॉक्टरों के भरोसे है। वहीं, ओढ़ा गांव में डेढ़ दर्जन मौतें हो चुकी हैं। झज्जर के आधा दर्जन गांवों में एक महीने में 163 लोगों के जान गंवाने की खबर है। महज मांडोठी में तीन दर्जन से ज्यादा मौतें हुई हैं। करीब 25 हजार की आबादी वाले बादली में चार दर्जन से अधिक लोगों ने जान गंवाई है। ज्यादातर मौतें बुखार से हुई हैं।


फतेहाबाद के गांव भट्टू कलां और भौड़िया खेड़ा में भी काफी लोगों ने दम तोड़ा है। सोनीपत के कई गांवों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा मौतें हुई हैं। जाटी कलां गांव इन्हीं में से एक है। खानपुर कलां में तो तीन दर्जन मौतें बताई जा रही हैं। क्षेत्रीय विधायक जगबीर सिंह मलिक ने बताया कि हालात बेहद गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि भैंसवाल कलां गांव में ही एक दिन में नौ मौतें हुई हैं। सेरसा गांव के हर दूसरे घर में बुखार का मरीज था। गांव में एक हफ्ते में 12 लोगों की मौत हो चुकी थी। तकरीबन पूरे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के हालात ऐसे ही हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल यह है कि अधिकांश क्षेत्रों में लोग झोला छाप डाक्टरों के ही भरोसे हैं। लोगों में दहशत ऐसी घर कर गई है कि उनका मानना है कि टेस्ट करवाया और सरकारी अस्पताल गए तो वहां से जिंदा लौटना शायद ही मुमकिन हो।

गांवों में हालात जब बेकाबू हो गए तो 11 मई को सरकार में कुछ हरकत हुई और सीएम ने फरमान जारी किए। मुख्यमंत्री ने इस महामारी के हॉट-स्पॉट वाले गांवों में 15 मई से आइसोलेशन सेंटर बनाकर लोगों की जांच शुरू करने के निर्देश दिए। कोरोना के लक्षण दिखाई देने वाले लोगों को गांव में ही आइसोलेशन सेंटर में क्वारंटाइन करने के लिए कहा गया। 12 मई को सरकार ने पंजाब विलेज एंड स्माल टाउन एंड पेट्रोल एक्ट-1918 के प्रावधानों के तहत गांवों में ठीकरी पहरा लगाने का फरमान जारी किया। लेकिन सरकार ने अब बहुत देर कर दी है।

हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा का कहना है कि आज प्रदेश के गांव कोरोना के गढ़ बन चुके हैं। रिपोर्टों के मुताबिक गांवों में ज्यादातर ग्रामीण इस समय बुखार, खांसी और जुकाम की चपेट में हैं। ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति बदतर हो चुकी है। हम हरियाणा के किसी भी कोने की बात करें तो गांवों से बेहद ही गंभीर हालात की खबरें हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना का कहर घर-घर दस्तक दे रहा है। सिरसा के मंडी कालांवाली और रोडी गांव में सरकारी आंकड़ों में 7-7 मौत हैं, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक बीते 10 दिन में ही 13 मौतें हो चुकी हैं। गांव चौटाला में ग्रामीणों की मानें तो औसतन हर घर में एक कोरोना मरीज है। सरकारी आंकड़े बेशक सब कुछ सामान्य होने का दावा कर रहे हों पर श्मशान घाट हकीकत बयां कर रहा है, जहां 15 दिनों से रोज औसतन 2 शव जल रहे हैं।


कुमारी सैलजा ने कहा कि रोहतक के टिटौली और हिसार के सिसाय गांव में 50-50 से ज्यादा लोग मर चुके हैं। इसी तरह पलवल जिले के गांव औरंगाबाद-मितरोल से भी पिछले कुछ दिनों में ही 40 से ज्यादा मौतों की खबर आई है। प्रदेश के ज्यादातर गांवों में कमोबेश यही स्थिति है। प्रदेश में हालात बेहद ही भयावह हैं। जनता बेबस नजर आ रही है और सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। गांव में टेस्टिंग नाम की कोई चीज नहीं हो रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की है कि प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर डॉक्टरों की कमेटी गठित की जाएं, जो कि फोन पर ही लोगों का सही तरीके से मार्गदर्शन करें। कोरोना मरीजों को मुफ्त दवाई और इलाज मिले, सरकार इसका खर्च वहन करे। गांवों में मौजूद सरकारी स्कूलों और भवनों को अस्थाई अस्पतालों में तब्दील किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि हरियाणा सरकार प्रदेशवासियों को यह भी बताए कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस दूसरी लहर में जो घोषणाएं की हैं उनमें से कितनी घोषणाओं पर अमल हुआ है।

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Published: 17 May 2021, 7:01 PM