हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन नहीं चुका पाई 3.45 करोड़ का बकाया, कोर्ट के आदेश पर सीएमडी और जीएम ऑफिस सील

देश में मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज के नाम से मशहूर एचईसी भारी आर्थिक संकट की वजह से बंदी के कगार पर पहुंच गई है। कभी 22 हजार स्टाफ वाले इस कारखाने में अब स्थायी और अस्थायी कर्मियों की संख्या बमुश्किल 3000 रह गई है, जिन्हें 15 से 17 महीने से वेतन नहीं मिला है।

3.45 करोड़ का बकाया नहीं चुका पाने पर कंपनी के सीएमडी और जीएम का ऑफिस सील
3.45 करोड़ का बकाया नहीं चुका पाने पर कंपनी के सीएमडी और जीएम का ऑफिस सील
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नवजीवन डेस्क

भारत में हेवी मशीन की सबसे बड़ी कंपनी एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) 3 करोड़ 45 लाख रुपये का बकाया नहीं चुका पाया, जिस कारण मंगलवार को कोर्ट के आदेश पर कंपनी के सीएमडी और जीएम के ऑफिस को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। कोर्ट ने राउरकेला की कंपनी पायोनियर इंडस्ट्रीज द्वारा बकाया भुगतान के लिए एचईसी के खिलाफ दायर किए गए केस में यह आदेश दिया है।

कॉमर्शियल कोर्ट के न्यायाधीश एनसी झा ने राउरकेला की कंपनी पायोनियर इंडस्ट्रीज द्वारा बकाया भुगतान के लिए एचईसी के खिलाफ दायर एक केस में यह आदेश दिया है। पायोनियर इंडस्ट्रीज ने एचईसी को वर्ष 2012-13 में रॉ-मैटेरियल की सप्लाई की थी। लेकिन, एचईसी की माली हालत इतनी खराब है कि दस साल में भी यह 3.45 करोड़ रुपए बकाया का भुगतान नहीं कर पाया।

अदालत के आदेश पर मंगलवार को कंपनी के सीएमडी ऑफिस और कंपनी के तीनों प्लांटों के जीएम ऑफिस को सील करने की कार्रवाई शुरू होने से एचईसी में हड़कंप मच गया। मजिस्ट्रेट पवन कुमार, अधिवक्ता परमेश्वर महतो और जिला पुलिस बल के दर्जनों जवान एचईसी मुख्यालय पहुंचे और उन्होंने ऑफिस में मौजूद सामान का सीजर लिस्ट तैयार करना शुरू किया। मजिस्ट्रेट ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन किसी भी हाल में होगा। सीएमडी कार्यालय सहित तीनों जीएम ऑफिस का सामान भी जब्त किया जाएगा।

पायोनियर इंडस्ट्रीज के अधिवक्ता परमेश्वर महतो ने बताया कि बकाया भुगतान के लिए एचईसी को कई बार पत्र लिखा गया, मगर कंपनी ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद पायोनियर इंडस्ट्रीज ने राशि वसूली के लिए कोर्ट से गुहार लगाई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुनने के बाद एनसी झा की कोर्ट ने आदेश दिया है कि एचईसी के सीएमडी कार्यालय, तीनों प्लांट के जीएम कार्यालय को सील कर सामान जब्त किए जाएं।


पहले चरण में जीएम एफएफपी, जीएम एचएमबीपी और जीएम एचएमटपी कार्यालय के सामानों की सूची बनाई गई। उनका एसेसमेंट किया गया। कंपनी के लोगों को बताया गया कि वे सूची में शामिल किसी भी सामान का उपयोग अब नहीं करेंगे। अगर कंपनी जल्द राशि का भुगतान नहीं करती है, तो कार्यालय को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि एचईसी कंपनी के ऊपर वर्तमान में 1200 करोड़ से ज्यादा की देनदारियां हैं, जिसमें हर रोज बढोतरी हो रही है।

जो देनदारियां हैं, उसमें वेंडरों के 140.11 करोड़, सरकार का कर्ज 117.58 करोड़, बैंक लोन 202.93 करोड़, सीआईएसएफ का 121 करोड़, बिजली बिल मद में 153.83 करोड़, वेतन मद में 38.28 करोड़, ठेका कर्मियों का 15.94 करोड़, एरियर मद में 4.89 करोड़, पानी शुल्क मद में 48.06 करोड़, सिक्युरिटी डिपॉजिट 37.89 करोड़ सहित अन्य मदों में 37.45 करोड़ रुपए बकाया है। 31 मार्च 2023 को एचईसी प्रबंधन ने अपनी देनदारियों की जानकारी भारी उद्योग मंत्रालय को देते हुए आर्थिक सहयोग की गुहार लगाई थी।

एचईसी भारत में मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज के रूप में मशहूर रहा है। भारत में हेवी मशीन बनाने वाला पब्लिक सेक्टर का यह सबसे बड़ा कारखाना इस हाल में पहुंच गया है कि 1,300 करोड़ का वर्क ऑर्डर रहने के बावजूद इसके पास रॉ-मैटेरियल और बाकी खर्चों के लिए वर्किंग कैपिटल नहीं है। अभी हाल में इसरो ने जिस चंद्रयान-3 की लांचिंग की है, उसके लिए लांचिंग पैड और कई कल-पुर्जे एचईसी ने ही बनाए हैं। लेकिन जबर्दस्त आर्थिक संकट की वजह से कंपनी बंदी के कगार पर पहुंच गई है। किसी वक्त में 22 हजार कर्मचारियों वाले इस कारखाने में अब स्थायी और अस्थायी कर्मियों की संख्या बमुश्किल तीन हजार रह गई है। इन्हें भी कंपनी 15 से 17 महीने से वेतन नहीं दे पा रही है।

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