विनेश फोगाट को मिली एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में भाग लेने की इजाजत, हाईकोर्ट की कुश्ती महासंघ को फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ को कड़ी फटकार लगाते हुए विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी है। हाईकोर्ट कहा कि कुश्ती महासंघ के अंदरूनी विवादों के कारण खिलाड़ियों का नुक़सान नहीं होना चाहिए।

फाइल फोटो (आईएनएस)
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नवजीवन डेस्क

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दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दो बार की विश्व पदक विजेता पहलवान विनेश फोगाट के मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि महासंघ के अंदरूनी विवादों के कारण खेल और खिलाड़ियों का नुकसान नहीं होना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें विनेश फोगाट को जून 2026 तक घरेलू कुश्ती प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

बता दें कि कुश्ती महासंघ ने 6 मई को एक सर्कुलर जारी कर मई के अंत में होने वाले एशियाई खेलों के चयन ट्रायल के लिए विनेश फोगाट को अयोग्य घोषित कर दिया था। महासंघ ने कहा था कि इसमें केवल अहमदाबाद में 2025 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, गाजियाबाद में आयोजित 2026 सीनियर फेडरेशन कप और भिलाई में 2026 राष्ट्रीय अंडर-20 के पदक विजेता ही भाग लेने के लिए पात्र होंगे। इस सर्कुलर में यह भी कहा गया था कि खिलाड़ियों की पिछली परफॉर्मेंस या नियमों में ढील पर विचार नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि विनेश ने अदालत से इस महीने के अंत में 30 और 31 मई को एशियन गेम्स के लिए होने वाले ट्रायल में हिस्सा लेने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है। इससे पहले हाईकोर्ट के जज जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार गौरव की अध्यक्षता वाली एकल बेंच ने फोगाट को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में डब्ल्यूएफआई को सुने बिना फोगाट को अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने इस संबंध में डब्ल्यूएफआई, केंद्र सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था।

इसी मामले पर आगे की सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि कुश्ती संघ पहले जिस तरह से प्रतिष्ठित एथलीट्स को भाग लेने की अनुमति देता था, उस प्रथा से संघ का पीछे हटना ‘बहुत कुछ कहता है।’ इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र को एक पैनल तैयार करने को कहा जो विनेश का मूल्यांकन करेगा। कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कि वो सुनिश्चित करे कि विनेश फोगाट, जो मातृत्व अवकाश के बाद एशियन गेम्स के ट्रायल में हिस्सा लेना चाहती हैं, वो ले सकें।

कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि हमारे देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है और उसका जश्न मनाया जाता है, ये कोई गुनाह नहीं है और कुश्ती संघ को खिलाड़ी के प्रति बदले की भावना से काम नहीं करना चाहिए।


हाईकोर्ट ने कहा कि, ‘एक ही साल में कई मेडल जीतना- यह एक ऐसा अवसर था, जो उन्होंने मां बनने की वजह से खो दिया। ऐसे में आपका फैसला पूरी तरह से एक पीछे ले जाने वाला कदम है। वह अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान हैं, आप इस बात से इनकार नहीं कर सकते। ऐसा क्यों नहीं माना जा सकता कि आपने यह बदलाव सिर्फ़ उसकी वजह से किया है? यह बिल्कुल चौंकाने वाली बात है। आपको उस स्थिति को समझना होगा जिसमें अपीलकर्ता पिछले एक साल से रही हैं। विवाद चाहे जो भी हो, उसे एक तरफ़ रखें. आख़िर इन सब की वजह से खेल को क्यों नुकसान पहुंचे?’

अदालत ने विनेश को डब्ल्यूएफआई द्वारा जारी किए गए कारण बताओ में इस्तेमाल की गई भाषा पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा, ‘आपने कारण बताओ नोटिस में क्या कहा है? वह एक मिनट के लिए भी मान्य नहीं होना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना ओलंपिक्स के फ़ाइनल में उस महिला खिलाड़ी के साथ हुई थी, और आपने इसे ‘राष्ट्रीय शर्म’ बताया है। फाइनल में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था- तो क्या यह वास्तव में ‘राष्ट्रीय शर्म’ की बात थी? इस देश के लोगों ने इस घटना को किस नज़र से देखा था? क्या इसी तरह आप कुश्ती के खेल की सेवा कर रहे हैं? आख़िर 2026 में अब जाकर इस पर कार्रवाई करने का क्या औचित्य है?

कोर्ट ने आगे कहा, ‘आपको याद है न कि जब उन्हें 100 ग्राम ज़्यादा वज़न होने के कारण अयोग्य घोषित किया गया था, तब क्या-क्या हुआ था? क्या ज़्यादा वज़न होने के लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है? उस समय खेल प्रबंधक क्या कर रहे थे? कोच और बाक़ी सभी लोग कहां थे? वह अपना ओलंपिक कांस्य पदक गंवा बैठी थीं- आपको एक खिलाड़ी के दर्द को समझना चाहिए.’

बता दें कि भारतीय कुश्ती महासंघ ने 9 मई को विनेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में डब्ल्यूएफआई ने विनेश पर अनुशासनहीनता, डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे।  साथ ही संघ ने विनेश को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। 15 पन्नों के नोटिस में डब्ल्यूएफआई ने विनेश से कई मुद्दों पर जवाब मांगे थे, खासकर पेरिस ओलंपिक विवाद पर, जहां 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले से पहले उनका वजन तय सीमा से ज्यादा होने के चलते उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था।


कोर्ट ने यह भी कहा कि एक मां होने की वजह से आज उनकी आलोचना की जा रही है, जबकि आपको इसका जश्न मनाना चाहिए। मातृत्व अवकाश से लौटने के बाद वह फिर से मैदान में हैं, लेकिन उन्हें यह कहकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है कि उन्होंने देश को शर्मसार किया है।

ज्ञात रहे कि 2018 एशियाई खेलों की चैंपियन विनेश फोगाट, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक के फाइनल में 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण अयोग्य घोषित किए जाने के बाद अगस्त 2024 में संन्यास की घोषणा की थी, उन्होंने पिछले साल दिसंबर में अपना फैसला बदलते हुए वापसी का ऐलान किया था, लेकिन अभी तक उन्होंने किसी भी प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है।

विनेश गोंडा में 10 मई से शुरू हो रहे नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट से प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी करना चाहती थीं, लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले ही कुश्ती महासंघ ने विनेश की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था।

गौरतलब है कि यह मामला डब्ल्यूएफआई और विनेश फोगाट के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव की नई कड़ी है। हाल ही में विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया था कि सिंह के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली छह पहलवानों में वह भी एक हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा सिंह के गृह क्षेत्र में टूर्नामेंट आयोजित करवाए जाने को लेकर विरोध जताया था।

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