हाईकोर्ट का CJP के तिरंगा मार्च पर रोक से इनकार, पर NDMC ने बंद कर दिया सीपी का सेंट्रल पार्क, दिपके ने उठाए सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीजेपी के कल होने वाले तिरंगा मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। लेकिन एनडीएमसी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने का ऐलान कर दिया। सीजेपी के अभिजीत दिपके ने इसे असहमति को दबाने का कदम बताते हुए मोदी सरकार से सवाल पूछे हैं।

प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते अभिजीत दिपके (फोटो - विपिन)
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  • अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के पीछे चुनावों को प्रभावित करने की मंशा

  • उन्होंने सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बचाव पर सवाल उठाया

  • छात्र नेताओं ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को असहमति को दबाने और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने सीजेपी के 16 अक्टूबर के तिरंगा लहरा दो आह्वान पर रोक से इनकार किया

  • एनडीएमसी ने दो दिन के लिए सेंट्रल पार्क बंद करने का किया ऐलान

'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नरेंद्र मोदी सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाया है। दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में गुरुवार (15 अक्टूबर) को प्रेस कांप्रेंस के दौरान दिपके ने चुनावी सूची में हेरफेर के आरोपों के बीच यह सवाल उठाया कि क्या 13 करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं के नाम हटाना चुनाव नतीजों को प्रभावित करने के लिए की गई कोई 'सेटिंग' थी।

दिपके ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में बहुत सख्त पाबंदियां लगा दी हैं, ताकि लोग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल न हो सकें। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की नेता आइशी घोष, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग और अभिनेता व एक्टिविस्ट प्रकाश राज भी मौजूद थे।

दिपके ने कहा कि, “आपने तिरंगा फहराने को भी कानून का उल्लंघन बता दिया है। किसके लिए? ज्ञानेश कुमार के लिए? ज्ञानेश कुमार नरेंद्र मोदी को क्या दे रहे हैं? आपने दिल्ली को ठप कर दिया है, रेलवे बंद कर दी, मेट्रो बंद कर दी और दिल्ली को एक किले में या सीमावर्ती इलाके में बदल दिया है—बिल्कुल भारत-पाकिस्तान बॉर्डर की तरह।”

उन्होंने पूछा कि, “आपने दिल्ली में सारो सुरक्षा बलों को बुला लिया है। छात्रों-युवाओं को सड़क पर घसीटा गया, विपक्षी नेताओं को घसीटा गया और पूर्व मुख्यमंत्रियों को सड़कों पर घसीटा गया। क्या यह सब सिर्फ एक ज्ञानेश कुमार के लिए है? नरेंद्र मोदी के लिए ज्ञानेश कुमार इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? हम यह क्यों न मानें कि ज्ञानेश कुमार, नरेंद्र मोदी को चुनाव जीतने में मदद कर रहे हैं? अगर वह उन्हें चुनाव जीतने में मदद नहीं कर रहे हैं, तो नरेंद्र मोदी उन्हें इतनी सुरक्षा क्यों दे रहे हैं?”

अभिजीत दिपके का यह गुस्सा ऐसे समय में सामने आया है जब सीजेपी द्वारा 10 अक्टूबर को विरोध-प्रदर्शन के आह्वान के बाद दिल्ली में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई थी, और जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह के रूप में हटाए जाने (डी-नोटिफिकेशन) को लेकर कानूनी विवाद भी खड़ा हो गया है। बता दें कि गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शनों पर लगी पाबंदियों, पुलिस की कथित ज्यादतियों और मतदाता सूची में संशोधन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की और सरकार से जवाब तलब किया है।


इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में सीजेपी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन को दर्ज किया कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कानून के दायरे में रहते हुए कदम उठाएगी।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से इनकार के कुछ घंटे बाद एनडीएमसी (न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल कार्पोरेशन) ने ऐलान किया है कि कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क प्रशासनिक कारणों से 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा।

दिपके ने इस घोषणा पर प्रतिक्रिया में एक्स पर पोस्ट किया है कि अगर हम 100 जगह तिरंगा फहराने का ऐलान करेंगे तो क्या नरेंद्र मोदी सभी 100 जगहों को बंद कर देंगे?

दिपके ने एक अन्य पोस्ट में दावा किया है कि वे जहां रुके हुए हैं उसके आसपास सादी वर्दी में दिल्ली पुलिस के लोग निगरानी कर रहे हैं।


13 करोड़ वोटरों के नाम काटे गए

2024 के लोकसभा चुनावों के संदर्भ में नामों को हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए, दिपके ने पूछा कि क्या ऐसा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा, "2024 में जीत का अंतर सिर्फ 2 प्रतिशत था। 13 करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।" "जब चुनाव का फैसला 2 प्रतिशत के अंतर से हो रहा हो, तब आप 13 करोड़ वोट हटा रहे हैं। अगर यह कोई 'सेटिंग' नहीं है, तो फिर और क्या है?"

बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों में, बीजेपी ने लोकसभा की 240 सीटें जीतीं और उसे 36.56 प्रतिशत वोट मिले। इसके बाद जेडीयू और टीडीपी के सहयोग से एनडीए ने सरकार बनाई।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दिपके ने मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) से जुड़े आरोपों के संदर्भ में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (वन नेशन, वन इलेक्शन) के प्रस्ताव की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि सरकार का असली राजनीतिक मकसद कुछ और ही है। उन्होंने कहा, "'एक राष्ट्र, एक चुनाव' तो बस एक जुमला है, असल इरादा तो 'एक राष्ट्र, एक पार्टी, एक नेता' का है।"

उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि तिरंगा दिखाना कब से अपराध हो गया? उन्होंने कहा, "जो लोग कभी तिरंगे को नहीं अपना पाए, वे आज उसी पर हमला कर रहे हैं।"

दिपके ने ऐलान किया कि पाबंदियों के बावजूद विरोध-प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों, किसान यूनियनों और नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की। ​​उन्होंने आगे कहा, "नरेंद्र मोदी, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से बड़े नहीं हो सकते।"

फोटो - विपिन
फोटो - विपिन

सीजेपी ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को शाम 5:00 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का आह्वान किया है, लेकिन अब इस पर प्रश्न लग गया है क्योंकि एनडीएमसी ने सेंट्रल पार्क को प्रशासनिक कारणों से दो दिन के लिए बंद करने का ऐलान किया है। प्रेस कांफ्रेंस में दिपके ने नागरिकों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ इकट्ठा होने की अपील की और कहा कि जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे अपने-अपने शहरों में भी इसी तरह के मार्च आयोजित करें।

गौरतलब है कि सीजेपी के सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सीजेपी ने इस तिरंग लहरा दो मार्च का आह्वान किया है। सौरव दास और आशुतोष रांका पर बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश करने और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए मुचलकेका उल्लंघन करने का आरोप है, जिसके चलते उन्हें पांच दिन के लिए न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

जानकारी के मुताबिक इस बीच दिल्ली पुलिस ने एक विशेष बैठक कर आने वाले दिनों की रणनीति बनाई है। गौरतलब है कि आगे और विरोध प्रदर्शनों की संभावना को देखते हुए, पुलिस ने राजधानी में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 273 कंपनियों की तैनाती को 20 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की थी।


फोटो - विपिन
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छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को कवर कर रहे पत्रकारों को भी निशाना बनाया; उनके पास प्रेस पहचान-पत्र होने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया और उनके उपकरण जब्त किए गए।

उन्होंने उन पत्रकारों के प्रति एकजुटता जताई जिन्हें कथित तौर पर प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान हिरासत में ले लिया गया था। उन्होंने दावा किया कि 'द कारवां' और 'द क्विंट' के पत्रकारों के पास प्रेस कार्ड होने के बावजूद, उन्हें पीटा गया और घंटों तक हिरासत में रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पत्रकारों के कैमरे छीन लिए गए और उन्हें प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग न करने की चेतावनी दी गई।

बोरा ने एक महिला पत्रकार से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के मामले का जिक्र किया और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शिकायतकर्ता के खिलाफ ही एक जवाबी एफआईआर दर्ज कर दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय, चुनावी अधिकारों को लेकर चिंता जताने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग कर रही है।

नेहा बोरा ने कहा, "पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय जनता पर ही सख्ती करती है। हमने जो देखा है, यह उसका एक बेहतरीन उदाहरण है। आप वोट देने के अधिकार का समर्थन करने वाली आवाज़ को जेल भेज देते हैं। जब आप आम लोगों को घसीटते हैं, तो असल में आप उन 13 करोड़ लोगों को घसीट रहे होते हैं।"

घोष ने लोकतंत्र पर हमले और अंकिता भंडारी मामले को उठाया

इस मौके पर एसएफआई नेता आइशी घोष ने नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि उन्हें सत्ताधारी बीजेपी के बजाय देश की जनता पर भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया, "ज्ञानेश ने उन्हें पूरा देश जीतने में मदद की है। हमें बीजेपी से कोई उम्मीद नहीं है, हमें अपने नागरिकों से उम्मीद है। अब हम सभी के लिए एकजुट होने का समय आ गया है। जिस देश के लिए भगत सिंह लड़े और गांधीजी ने बलिदान दिया, हमें उस देश को बचाना है।"

घोष ने 2022 में उत्तराखंड में हत्या और कथित बलात्कार की शिकार हुई अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ हुए बर्ताव का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें घसीटा गया और उनके साथ बेरहमी से पेश आया गया। गंभीर अपराधों के आरोपियों को मिलने वाली छूट की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "बलात्कारियों को माला पहनाई जा रही है।"

एआईएसएफ के अध्यक्ष विराज देवांग ने भी इन पाबंदियों को लेकर सरकार की आलोचना की, जबकि अभिनेता और एक्टिविस्ट प्रकाश राज भी इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।


फोटो - विपिन
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ देर के लिए बाधा आई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस समय कुछ देर के लिए रुकावट आई, जब एक रिपोर्टर ने बोरा के बोलते समय कथित तौर पर उन्हें टोका और चिल्लाना शुरू कर दिया। मामला बढ़ गया और वहां मौजूद लोग यह मांग करने लगे कि हंगामा बंद हो और वह व्यक्ति वहां से चला जाए। बोरा ने आयोजकों से कहा कि जो लोग कार्यक्रम में बाधा डाल रहे हैं, उन्हें बाहर निकाल दिया जाए। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों, प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बर्ताव को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।

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