कोरोना और दिल्ली हिंसा के कारण इस बार बेरंग हो सकती है होली, दुकानदार परेशान

सोमवार को होलिका दहन है जबकि मंगलवार को रंगों के साथ खेलते हुए होली मनाई जाएगी। मगर इस बार रंगों की छटा कुछ कम देखने को मिल सकती है। रंग-गुलाल के विक्रेताओं का कहना है कि इस बार कोरोना वायरस और दिल्ली हिंसा के कारण उनकी बिक्री में काफी गिरावट आई है।

फोटो: सोशल मीडिया
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आईएएनएस

देशभर में होली का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। सोमवार को होलिका दहन है जबकि मंगलवार को रंगों के साथ खेलते हुए होली मनाई जाएगी। मगर इस बार रंगों की छटा कुछ कम देखने को मिल सकती है। रंग-गुलाल के विक्रेताओं का कहना है कि इस बार कोरोना वायरस और दिल्ली हिंसा के कारण उनकी बिक्री में काफी गिरावट आई है। होली के मद्देनजर हालांकि उत्तरी पूर्वी दिल्ली में सुरक्षा इंतजामों पर अधिक जोर दिया गया है, मगर इसके बावजूद लोग सतर्कता बरतने में ही भलाई समझ रहे हैं। पिछले वर्षो तक जहां होली के त्योहार पर रंग-गुलाल की बिक्री खूब होती थी, वहीं इस बार लोग इन्हें खरीदने से बच रहे हैं।

अंबेडकर विहार सेक्टर-37 में रंग और गुलाल के विक्रेता जोगिंदर सिंह ने आईएएनएस को बताया, "प्रधानमंत्री होली मिलन समारोह नहीं मनाएंगे और बड़ी बड़ी सोसाइटी ने भी मना कर दिया कि हम भी इस बार होली नहीं मनाएंगे। इस वजह से लोग रंग नहीं खरीद रहे हैं। सुबह से उतनी बिक्री नहीं हुई है। लोगों में एक डर कोरोना वायरस का भी है और साथ में दिल्ली हिंसा का असर भी दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि लोग इस बार थोड़ा परहेज कर रहे हैं।"


जोगिंदर से पूछा गया कि होली का माल चीन का है या हिंदुस्तान का? इसके जवाब में उन्होंने कहा, "चाइना का माल फ्रेश और सस्ता होता है और इसमें मार्जिन भी होता है। वहीं हिंदुस्तान के माल में मार्जिन कम होता है, लेकिन क्वालिटी अच्छी होती है।"

जोगिंदर की दुकान के पास एक अन्य विक्रेता जसवंत ने बताया, "अभी थोड़ा समय है, शायद माल बिक जाए। सुबह से तो बिक्री ज्यादा नहीं हुई है। कोरोना वायरस का असर तो दिख रहा है कि बच्चे भी रंग नहीं खरीद रहे हैं। बड़े लोगों में तो रंग खरीदने और होली खेलने की इच्छा ही नजर नहीं आ रही है।"

उन्होंने कहा, "टीवी में जिस तरह होली न खेलने को लेकर विज्ञापन चल रहे हैं उसका भी असर है। इस बार लगता है कि लागत भी नहीं निकल पाएगी।"

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