सीरम इंस्टीट्यूट को ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के ट्रायल की मिली मंजूरी, कोरोना के खिलाफ फिर जगी उम्मीद

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एस्ट्राजेनेका से कोरोना वैक्सीन की एक अरब डोज के उत्पादन के लिए साझेदारी की है। यह टीका आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसका एस्ट्राजेनेका ब्रिटेन में और सीरम इंस्टीट्यूट भारत में चिकित्सीय परीक्षण कर रही है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 वैक्सीन उम्मीदवार के क्लीनिकल परीक्षण को फिर से शुरू करने की ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) से मंजूरी मिल गई है। बुधवार को दवा निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

कोविशिल्ड नाम के इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के जेनर इंस्टीट्यूट और एस्ट्राजेनेका द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इस वैक्सीन की मैन्यूफेक्चरिंग में भारत भी भागीदार है। इस वैक्सीन को तैयार करने के लिए पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट पूरे भारत में 17 जगहों पर इसका मानव परीक्षण कर रहा है।

इससे पहले सितंबर के पहले सप्ताह में ब्रिटेन में परीक्षण के दौरान एक प्रतिभागी को बूस्टर डोज देने के बाद स्वास्थ्य समस्या आने पर एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन का परीक्षण रोक दिया था। कंपनी ने अपने बयान में कहा था कि वैक्सीन ट्रायल में शामिल एक व्यक्ति को अज्ञात बीमारी होने के बाद कंपनी ने उसकी दवा परीक्षण की मानक समीक्षा को देखते हुए आगे का परीक्षण स्थगित कर दिया है। इससे शोधकर्ताओं को परीक्षण की सत्यता बनाए रखने के साथ ही दवा के सुरक्षित होने के आंकड़ों को जांचने का भी मौका मिलेगा।

इसके बाद 10 सितंबर को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत में ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का ट्रायल कर रही सीरम इंस्टीटूट ऑफ इंडिया को एक 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर पूछा था कि क्यों नहीं आप का ट्रायल सस्पेंड कर दिया जाए? इसके बाद सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने परीक्षण रोक दिए थे। डीजीसीआई ने पूछा था कि जब रोगी की सुरक्षा को लेकर संदेह है, ऐसे में संस्थान कैसे परीक्षण जारी रखे हुए है।

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