हम हैं कामयाब-4: कई असफलताओं में छिपी सफलता की दास्तान है ‘आर.बी.ए.एस.’

आफताब आलम व्यापार में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण हैं। युवा वर्ग के नाम अपने संदेश में वे कहते हैं कि “असफलता से भयभीत न हों। प्रयास करते रहें, करते रहें, यहाँ तक कि सफलता आपके कदम न चूम ले। कभी जल्दी और कभी देर से, सफलता अवश्य मिलती है।”

‘आर.बी.ए.एस. ग्लोबल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर आफताब आलम
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तनवीर अहमद

विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक मशहूर कथन है, “सपने वो नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।” इस कथन ने कई विद्यार्थियों के सोचने का अंदाज़ बदल दिया और अनेक युवाओं की ज़िंदगी का रुख मोड़ दिया। इस कथन के असली अर्थ को समझना है तो आफताब आलम नदवी के उस संघर्ष पर नज़र डालनी होगी, जिसे वो जीवन भर नहीं भूल सकते। अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना तो आफताब आलम ने देख लिया, लेकिन उसे साकार करने में उन्हें जिन समस्याओं का सामना करना पड़ा, वे किसी की भी हिम्मत तोड़ सकती थीं। लगभग 7 वर्षों तक असफलताओं की एक लंबी श्रृंखला रही, जिसने एक युवा और स्वस्थ व्यक्ति को कई बार डिप्रेशन में डाल दिया। नींदें हराम हो गईं और चैन-सुकून खत्म हो गया। लेकिन उन्हें अल्लाह पर पूरा भरोसा था, उन्हें भरोसा था कि मेहनत का फल ज़रूर मिलेगा, और ऐसा ही हुआ। कई असफलताओं के बाद सफलता का एक ऐसा रास्ता मिला, जिसने आफताब आलम के जीवन को सूरज की तरह रोशन कर दिया। उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि ‘आर.बी.ए.एस. ग्लोबल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से आज एक ऐसी कंपनी अस्तित्व में आ चुकी है, जो भवन निर्माण में प्रयोग होने वाली भारी मशीनें दुनिया के लगभग 30 देशों में निर्यात करती है।

हम हैं कामयाब-4: कई असफलताओं में छिपी सफलता की दास्तान है ‘आर.बी.ए.एस.’

आफताब आलम ने 2002 में दारुल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ से आलिमियत की डिग्री प्राप्त की। फिर आधुनिक शिक्षा के लिए राजधानी दिल्ली पहुँचे, जहाँ ऐतिहासिक जामिया मिल्लिया इस्लामिया से अरबी भाषा में बी.ए. किया, और दिल्ली विश्वविद्यालय से अरबी भाषा में ही मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। जब सोच के नए दरवाज़े खुले तो उन्होंने ‘सिम्बायोसिस’ से फाइनेंस में ‘पी.जी.डी.बी.ए.’ करने के साथ-साथ ‘आई.सी.एफ.ए.आई यूनिवर्सिटी’ से फाइनेंस में डिप्लोमा भी कर लिया। अध्ययन के दौरान ही आफताब आलम ने गुरुग्राम स्थित ‘ई बिज़नेस वेयर प्राइवेट लिमिटेड’ में रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम करना शुरू कर दिया।

यही वह समय था जब आफताब आलम का रुझान व्यापार की ओर हुआ, लेकिन जल्दबाज़ी से काम लेने के बजाय अधिक अनुभव प्राप्त करने के उद्देश्य से बेंगलुरु स्थित ‘डेटा रेटिंग्स इंटेलिजेंस’ कंपनी में नौकरी स्वीकार कर ली। यह ब्रिटेन की एक कंपनी है जहां उन्होंने इस्लामिक फाइनेंस में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम किया। 2008 में बेंगलुरु स्थानांतरित होने के बाद उन्होंने कई अनुभव और अवलोकन किए। वे बताते हैं कि “कंपनी में रहते हुए मैंने प्रोडक्ट तैयार करने, रिसर्च पैटर्न स्थापित करने और नए कारोबारी आइडियाज़ देने के दौरान कई मील के पत्थर पार किए। मेरी कार्यकुशलता ने आर्थिक संकट के समय कंपनी को लाभ पहुंचाया।”

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2009 की बात होगी जब आफताब आलम ने अपना व्यवसाय खड़ा करने के लिए कदम बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने आयरन ओर (Iron Ore), गेहूं, चावल, विभिन्न प्रकार की कृषि उपज आदि विदेशों में निर्यात किए, लेकिन केवल नुकसान हाथ लगा। गोल्ड ट्रेडिंग में भी भाग्य को आज़माया और कोलकाता बंदरगाह से तांबा निर्यात करने की योजना भी असफल हो गई। 2014 तक आफताब आलम ने कई प्रकार के व्यवसाय अकेले भी किए और अपने साथियों के साथ साझेदारी में भी, लेकिन असफलता के सिवा कुछ नहीं मिला। 2014 में उन्होंने ‘आर.बी.ए.एस.’ कंपनी की स्थापना की और सऊदी अरब में गारमेंट्स निर्यात करने की योजना बनाई। सऊदी अरब पहुँचकर एक कंपनी से समझौता तय हो गया, और आफताब आलम ने राहत की साँस ली। उन्हें विश्वास हो गया कि कठिन दौर समाप्त हो चुका है, अब सफलता की सीढ़ी चढ़ने का समय है। लेकिन परीक्षा अभी समाप्त नहीं हुई थी। सऊदी अरब की जिस कंपनी से समझौता हुआ था, उसका प्रोक्यूर्मेंट ऑफिसर बदल गया और आफताब आलम पर मानो पहाड़ टूट पड़ा। उन्हें लगभग 25 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा और वे डिप्रेशन में चले गए।

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यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि आफताब आलम की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे लाखों रुपये का नुकसान सहन कर लेते। उन्हें अब तक हर व्यापार में असफलता मिली थी और लाखों रुपये के वे कर्ज़दार हो चुके थे। हमेशा ऐसा लगता था कि अब समय बदलने वाला है, लेकिन फिर असफलता सामने आ खड़ी होती थी। वे बताते हैं कि “मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन हर पहलू से असफलता मिल रही थी। आर्थिक नुकसान और व्यवसाय में विफलता के कारण मैं 2-3 बार डिप्रेशन में चला गया। मैंने अपने परिवार और दोस्तों से काफी धन उधार लिया था, सब बर्बाद हो गया। उन दिनों मेरे करीबी दोस्तों ने मुझे नज़रअंदाज़ करना शुरू कर दिया। वे मुझसे बात करने से डरते थे, उन्हें भय था कि कहीं फिर उधार न मांग लूं। मैं पूरी तरह दिवालिया हो चुका था।”

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आफताब आलम के कठिन समय का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने उधार चुकाने के लिए अपना घर और कुछ ज़मीनें बेचने का निर्णय कर लिया। इतना सब होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बार-बार चोट खाकर एक नई ताकत के साथ खड़ा होना उनकी आदत बन गई थी। वे कहते हैं कि “हर नया काम शुरू होने से पहले सफलता का पूरा भरोसा होता था। यदि कोई शेख मिल जाता तो बड़ी-बड़ी बातें करता, और मैं भी बड़े-बड़े सपने देखने लगता। वास्तविकता तब पता चलती जब नुकसान हो चुका होता।” उन्होंने बताया कि व्यापार के उद्देश्य से कई देशों की यात्रा की, सब कुछ समझने के बाद संभलकर कदम बढ़ाया, फिर भी सफलता नहीं मिल रही थी। ‘आर.बी.ए.एस.’ की शुरुआत भी असफलता से हुई, जिसने गहरा झटका दिया। हालांकि उन्होंने अपने संकल्प को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने कहा कि “मुझे अल्लाह पर भरोसा था। मुझे यक़ीन था कि वह मुझे इन कठिन परिस्थितियों से निकालेगा।”

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और वह दिन लंबे इंतज़ार तथा कठिन परिश्रम के बाद आ ही गया। 2015 आफताब आलम और ‘आर.बी.ए.एस.’ के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। आफताब आलम के एक सहपाठी सऊदी अरब स्थित कंपनी में कार्यरत थे। उन्होंने आफताब आलम को एक विशेष प्रकार की मशीन बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी। इस मशीन का नाम था ‘पाइप स्पेसर’। मशीन को बनाने में लगभग डेढ़ वर्ष का समय लगा, जिसे कंपनी के मालिक ने अत्यंत पसंद किया। लगभग 2 लाख रुपये में तैयार यह मशीन बहुत मुनाफ़े के साथ बिकी। इस सफलता ने पिछली सभी असफलताओं को पीछे छोड़ दिया। अब आफताब आलम ने संभल-संभल कर कदम बढ़ाना शुरू किया और भवन निर्माण में प्रयुक्त भारी मशीनें विदेशों में निर्यात करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों की यात्रा की। 2019 में एक बड़ी सफलता मिली जब सोमालिया में ऐसा खरीदार मिला, जिसने ‘आर.बी.ए.एस.’ की नींव को मज़बूती प्रदान की। आज ‘आर.बी.ए.एस.’ बैकहो लोडर्स (Backhoe Loaders), स्किड स्टीयर लोडर्स (Skid Steer Loaders), हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर्स (Hydraulic Excavators), व्हील लोडर्स (Wheel Loaders), टिपर ट्रक्स (Tipper Trucks), सॉइल कॉम्पैक्टर्स (Soil Compactors), टेंडम रोलर्स (Tandem Rollers), न्यूमैटिक टायर रोलर्स (Pneumatic Tyre Rollers) सहित दर्जनों उपकरण विदेशों में निर्यात करती है। इन देशों में सऊदी अरब, दुबई, ओमान, केन्या, जिम्बाब्वे, अर्जेंटीना, मोरक्को, अल्जीरिया, फिलीपींस, अंगोला, युगांडा आदि शामिल हैं।

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आफताब आलम अब पीछे मुड़कर देखते हैं तो अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि कठिन समय में उसने उनका हौसला टूटने नहीं दिया। वे बताते हैं कि “प्रारंभिक व्यवसाय में मुझे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मैंने कई बार सोचा कि व्यवसाय छोड़कर फिर से नौकरी की ओर लौट जाऊं। लेकिन अल्लाह की योजना कुछ और ही थी। उसने मुझे चुनौतियों का सामना करने के लिए चुना और मुझे हिम्मत दी।” बदले हुए हालात का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि “अब अल्हम्दुलिल्लाह व्यापार में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा हूं। 30 से अधिक देशों में निर्माण सामग्री निर्यात कर रहा हूँ। मेरी कंपनी ने कुछ बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर व्यवसाय करने का समझौता भी किया है। रोज़ाना मुझे बड़ी भारतीय कंपनियों की ओर से फोन आते हैं, जो साझेदारी में कारोबार करने की इच्छा व्यक्त करते हैं। लेकिन अब हर कदम बहुत सोच-समझकर बढ़ाता हूं।”

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इस अच्छे समय में आफताब आलम उन लोगों को हमेशा याद करते हैं जो कठिन दौर में साथ खड़े रहे। उन्होंने बताया कि जब कोई मदद के लिए तैयार नहीं था, तब बड़े भाई और सऊदी अरब में कार्यरत सहपाठी ने आर्थिक सहायता कर उनका हौसला टूटने से बचाया। इन दोनों ने न केवल आर्थिक सहायता की, बल्कि नैतिक रूप से भी पूरा सहयोग किया। वे अपनी पत्नी की भी सराहना करते हैं, जो 2012 में जीवनसंगिनी बनने के बाद से लगातार हिम्मत देती रहीं।


आफताब आलम निश्चित ही बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने अनेक असफलताओं के बावजूद अल्लाह पर भरोसा रखते हुए कठिनाइयों का सामना किया। इन असफलताओं ने ही सफलता की ऐसी दास्तान लिख दी जो सुनहरे अक्षरों में लिखे जाने योग्य है। वे व्यापार में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण बन चुके हैं। युवा वर्ग के नाम अपने संदेश में वे कहते हैं कि “असफलता से भयभीत न हों। प्रयास करते रहें, करते रहें, करते रहें, यहां तक कि सफलता आपके कदम न चूम ले। कभी जल्दी और कभी देर से, सफलता अवश्य मिलती है।”