हैदराबाद कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ याचिका खारिज की, इसी मामले पर राज्यसभा का नामांकन रद्द किया गया था

मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिका में विधायक और विधान परिषद सदस्य समेत जनप्रतिनिधियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी और मामले में सक्षम न्यायालय का रुख करने का निर्देश दिया।

हैदराबाद कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ याचिका खारिज की, इसी मामले पर राज्यसभा का नामांकन रद्द किया गया था
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हैदराबाद की एक अदालत ने एक महिला द्वारा दायर उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें कथित छेड़छाड़ और धमकी देने के मामले में कांग्रेस की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को प्रतिवादी बनाया गया था। अदालत ने याचिकाकर्ता को मामले के लिए संबंधित सक्षम न्यायालय का रुख करने की सलाह दी। इसी मामले के कारण ही मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था।

मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिका में विधायक और विधान परिषद सदस्य समेत जनप्रतिनिधियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी और मामले में सक्षम न्यायालय का रुख करने का निर्देश दिया।

अपनी याचिका में ए. श्रीलता ने कांग्रेस नेता कुंभम शिव कुमार रेड्डी पर छेड़छाड़ करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी महेश कुमार गौड़ के साथ नटराजन को भी प्रतिवादी बनाया गया है।


इसी मामले का जिक्र नहीं करने का आरोप लगाकर मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था। निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा के एक आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अधूरा हलफनामा जमा किया था, जिसमें उनके नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत में दर्ज एक शिकायत का जिक्र नहीं था। बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी।

निर्वाचन अधिकारी के फैसले को गलत और अलोकतांत्रिक बताते हुए मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नटराजन की उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। हालांकि, न्यायालय ने उन्हें चुनाव याचिका के माध्यम से इस मामले को उठाने की छूट प्रदान कर दी।

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