'मैंने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया, मुझे बोलने दिया जाए', राहुल के संबोधन के दौरान चिल्लाने लगे सत्तापक्ष के सांसद
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार फिर चीन का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पीकर से कहा कि मुझे इस मुद्दे पर बोलने दिया जाना चाहिए।

संसद में आज भी हंगामा देखने को मिला। लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने हाथ में प्लेकार्ड लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद कई बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। 2 बजे के बाद जब लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो राहुल गांधी ने चीन का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के कोट का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया। इस पर सत्ता पक्ष ने सवाल उठाए। जिसके बाद हंगामा बढ़ गया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार फिर चीन का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पीकर से कहा कि मुझे इस मुद्दे पर बोलने दिया जाना चाहिए। मैंने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया, मुझे बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा। हंगामा बढ़ने पर सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
ट्रेड डील को लेकर भी राहुल ने मोदी को घेरा
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद के बाहर कहा कि मोदी जी घबराए हुए हैं। (अमेरिका-भारत) ट्रेड डील, जो पिछले कुछ महीनों से अटकी हुई थी, उसे नरेंद्र मोदी ने कल रात साइन कर दिया। उन पर बहुत ज़्यादा दबाव है। नरेंद्र मोदी जी की इमेज खराब हो सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे PM कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं। जनता को इस बारे में सोचना चाहिए। पहली बार विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के भाषण पर बोलने नहीं दिया गया। नरेंद्र मोदी जी ने इस ट्रेड डील में आपकी मेहनत बेच दी है क्योंकि वह कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं। उन्होंने देश को बेच दिया है। नरेंद्र मोदी जी डरे हुए हैं क्योंकि जिन्होंने उनकी इमेज बनाई थी, अब वही इस इमेज को तोड़ रहे हैं....अडानी जी पर अमेरिका में एक केस है, वह असल में मोदी जी पर केस है....एपस्टीन फाइल्स में और भी बहुत कुछ है जो अमेरिका ने अभी तक जारी नहीं किया है। उसकी वजह से भी दबाव है। ये दो प्रेशर पॉइंट्स हैं। देश को यह समझना चाहिए।
कल भी हुआ था संसद में हंगामा
इससे पहले लोकसभा में सोमवार को भारी हंगामा देखने को मिला। विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए एक पत्रिका में प्रकाशित अंशों का हवाला दिया। ये अंश भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक से जुड़े बताए गए, जिसके बाद सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
राहुल गांधी ने सदन में कहा कि कारवां पत्रिका में जनरल नरवणे के संस्मरण से जुड़े कुछ अंश प्रकाशित हुए हैं, जिन्हें सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पत्रिका से केवल पांच पंक्तियां पढ़ना चाहते हैं। जैसे ही उन्होंने दोबारा बोलना शुरू किया, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण देश की आंतरिक स्थिति, नीतियों, विदेश नीति और वैश्विक हालात से जुड़ा होता है। उन्होंने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन पर देशभक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि वह केवल तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहते हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आतंकवाद से लड़ने का दावा करने वाली सरकार एक उद्धरण से डर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को कोई डर नहीं है तो उन्हें सदन में वह अंश पढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।
फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी: एन ऑटोबायोग्राफी किताब क्या है?
इस किताब का नाम 'Four Stars of Destiny: An Autobiography' यानी फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी: एन ऑटोबायोग्राफी है, जिसे पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने लिखा था। बता दें, नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। यह 448 पेज की किताब है। यह जनरल नरवणे के 40 साल के सैन्य करियर की पूरी कहानी बताती है। इसमें सिक्किम में चीन से पहली मुलाकात से लेकर गलवान में चीनी सेना से सामना, LoC पर फायरिंग, पाकिस्तान के साथ सीजफायर लागू करना और आधुनिक युद्ध के लिए सेना को तैयार करने जैसे किस्से शामिल हैं।
किताब को अबतक छापा नहीं गया है
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, किताब अभी अप्रकाशित है यानी इसे छापा नहीं गया है। इसे भारत में खरीदा नहीं जा सकता, हालांकि यह अमेजन पर लिस्टेड है, लेकिन उपलब्ध नहीं। यह किताब मूल रूप से जनवरी 2024 में रिलीज होने वाली थी, फिर अप्रैल 2024 में टाल दी गई। अभी मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (MoD) और इंडियन आर्मी इसकी सुरक्षा समीक्षा कर रही है, क्योंकि इसमें संवेदनशील जानकारी है। जैसे 2020 का लद्दाख स्टैंडऑफ और अग्निपथ स्कीम। पब्लिशर को एक्सट्रैक्ट्स या सॉफ्ट कॉपी सर्कुलेट न करने को कहा गया है। जनरल नरवणे ने 2025 में कहा था कि अब पब्लिशर और MoD के हाथ में है।
किताब में दो बड़े खुलासे किए गए?
2020 लद्दाख स्टैंडऑफ (चीन के साथ): 31 अगस्त 2020 की रात को पैंगोंग त्सो के साउथ बैंक के रेचिन ला पास पर चीनी PLA ने टैंक और सैनिक भेजे। भारतीय सेना की पोजीशंस पर टैंक कुछ सौ मीटर दूर थे। स्थिति 'टेंसे और ब्रेकिंग पॉइंट' के करीब थी। नॉर्दर्न कमांड चीफ लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने जनरल नरवणे को रात 8:15 बजे फोन किया। नरवणे ने तुरंत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, NSA अजीत डोभाल, CDS बिपिन रावत, और विदेश मंत्री एस जयशंकर को फोन किया और पूछा, 'मेरे ऑर्डर्स क्या हैं?'
अनपब्लिश्ड किताब में नरवणे ने लिखा कि उन्हें 'हॉट पोटैटो' थमा दिया गया, सारी जिम्मेदारी उन पर डाल दी गई। उन्होंने गहरी सांस ली, कुछ मिनट चुप बैठे और दीवार की घड़ी की टिक-टिक सुनते रहे।कोई क्लियर फायरिंग ऑर्डर नहीं आया।'टॉप से क्लियरेंस' तक फायर न करने के प्रोटोकॉल थे।
किताब में जून 2020 में हुए गलवान क्लैश का भी जिक्र है, जहां 20 साल में पहली बार PLA को 'फेटल कैजुअल्टीज' हुई।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसे नहीं भूलेंगे।
अग्निपथ स्कीम: जून 2022 में लॉन्च हुई इस योजना से आर्मी सरप्राइज हुई। नेवी और एयर फोर्स के लिए 'बोल्ट फ्रॉम द ब्लू' थी।इस योजना को लेकर आर्मी का ओरिजिनल प्रपोजल था छोटा पायलट प्रोजेक्ट, 75% रिक्रूट्स को रिटेन करना और 25% रिलीज करना। लेकिन फाइनल स्कीम में 25% ही रिटेन हुए, जबकि 75% को 4 साल बाद रिलीज करने का नियम बना।शुरुआती सैलरी 20 हजार रुपए को नरवणे ने 'अनएक्सेप्टेबल' कहा। उन्होंने लिखा, 'ट्रेंड सोल्जर जो जान दे सकता है, उसे डेली वेज लेबर से कैसे कंपेयर करें?' बाद में दाम बढ़ाकर 30 हजार रुपए कर दिए गए।
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