'अगर जरूरी हुआ तो...', महाराष्ट्र SIR में 3 करोड़ नाम कटने का दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से मतदाताओं को होने वाली संभावित परेशानियों का मुद्दा उठाया गया।

'अगर जरूरी हुआ तो...', महाराष्ट्र SIR में 3 करोड़ नाम कटने का दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस
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  • महाराष्ट्र में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में अनियमितताओं का सवाल उठाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग भेजा नोटिस

  • महाराष्ट्र में करीब 9 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 3 करोड़ लोगों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद हटाए जाने का दावा

  • याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि 6 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले मामले पर सुनवाई की जाए

महाराष्ट्र में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में अनियमितताओं का सवाल उठाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अब इसपर 5 नवंबर को सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि 6 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले मामले पर सुनवाई की जाए। याचिका में दावा किया गया है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और कई मतदाताओं को तार्किक विसंगति से जुड़े नोटिस भेजे गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से मतदाताओं को होने वाली संभावित परेशानियों का मुद्दा उठाया गया।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता अरुण आनंदगिरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी. दातार ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र में करीब 9 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 3 करोड़ लोगों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद हटाए जाने का दावा है। उनके मुताबिक, यह संख्या कुल मतदाताओं का करीब 33 फीसदी बैठती है।

अधिवक्ता ने आगे कहा कि चुनाव आयोग हटाए गए नामों वाले मतदाताओं से दोबारा पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 भरने को कह रहा है। उन्होंने दलील दी कि फॉर्म-6 का इस्तेमाल मुख्य रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है। ऐसे में, पहले से पंजीकृत मतदाताओं को इसी प्रक्रिया से गुजरने के लिए कहना नियमों के खिलाफ है।

अरविंद दातार ने बेंच को बताया कि बॉम्बे और पुणे में लगभग 3,500 पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके तहत पुरानी हाउसिंग कॉलोनियों को तोड़ा जा रहा है, जिससे हजारों लोगों को दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। ऐसे में, पता और अन्य जानकारी न मिल पाने के कारण उनके नाम वोटर लिस्ट से कटने का खतरा है।


CJI ने क्या कहा?

याचिका में कोर्ट से वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। अधिवक्ता ने कहा कि जब तक इस मामले की सुनावई चल रही है प्रक्रिया को रोकने को कहा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहमत नहीं हुआ लेकिन वकील को भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा। अगर कोर्ट को लगा कि समय बढ़ाने की जरूरत है, तो वह उचित निर्देश जारी करेगा।

CJI ने कहा, "चिंता न करें। आप एक व्हिसलब्लोअर (मामले को सामने लाने वाले) हैं। आप हमारे पास आए हैं, इसलिए बेफिक्र रहें। अगर हमें लगता है कि ऐसे लोग हैं जिन्होंने अभी तक अपने दस्तावेज जमा नहीं किए हैं, तो हम समय जरूर बढ़ाएंगे। हमने पहले भी (SIR) मामलों में तारीखें बढ़ाई हैं।"

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