अगर असम के मुख्यमंत्री मणिपुर से दूर रहेंगे, तो राज्‍य में शांति बहाली में मिलेगी मददः चिंदबरम

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच 3 मई को पहली बार शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से अब तक 120 से अधिक लोगों की जान चली गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं, जबकि हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

चिंदबरम ने मणिपुर में शांति बहाली के लिए असम सीएम को राज्य में दखल नहीं देने की सलाह दी
चिंदबरम ने मणिपुर में शांति बहाली के लिए असम सीएम को राज्य में दखल नहीं देने की सलाह दी
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मणिपुर में एक हफ्ते में शांति लौटने की टिप्पणी पर कटाक्ष किया और कहा कि अगर वह अपनी नाक में दम नहीं करेंगे और राज्य से दूर रहेंगे तो इससे हिंसाग्रस्त राज्य को मदद मिलेगी। चिदंबरम ने यह भी कहा कि अगर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह इस्तीफा दे दें, तो इससे भी मदद मिलेगी। उन्‍होंने पूर्वोत्तर राज्य में कुछ महीनों के लिए राष्ट्रपति शासन लगाने की भी मांग की।

एक ट्वीट में, पी चिदंबरम ने कहा, "असम के सीएम ने वादा किया है कि एक हफ्ते में मणिपुर में शांति लौट आएगी। अगर वह मणिपुर के संघर्ष से दूर रहेंगे, तो राज्‍य को मदद मिलेगी। अगर बीरेन सिंह इस्तीफा दे, तो भी राज्‍य का भला होगा।” इसके साथ ही चिदंबरम ने पूर्वोत्तर राज्य में कुछ महीनों के लिए राष्ट्रपति शासन लगाने की भी मांग की।


चिदंबरम की यह टिप्पणी तब आई जब सरमा ने शनिवार को एक बयान में दावा किया कि मणिपुर में स्थिति 7-10 दिनों के भीतर सुधर जाएगी, राज्य और केंद्र सरकारें शांति बहाल करने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि विपक्षी दल तब अपनी चिंता दिखा रहे हैं जब "पूर्वोत्तर राज्य में अपेक्षाकृत शांति आ गई है"।

गौरतलब है कि मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच 3 मई को पहली बार शुरू हुई झड़प के बाद से अब तक जातीय हिंसा में 120 से अधिक लोगों की जान चली गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं, जबकि हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कांग्रेस ने दो महीने से जारी हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया है और मणिपुर के मुख्यमंत्री को तत्काल हटाने की भी मांग की है।

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