इमरान खान की हताशा चरम पर, न्यूयॉर्क टाइम्स से इंटरव्यू में बोले- भारत से अब बात करने से कोई फायदा नहीं

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति और राज्य को हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सकते में हैं। उन्होंने अब कहा है कि वे भारत से साथ कोई बात नहीं करेंगे। इमरान ने यह बात न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ इंटरव्यू में कही।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि वह अब भारत के साथ बातचीत नहीं करेंगे। अमेरिका अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "उनसे (भारत) बात करने का अब कोई मतलब नहीं रह गया है। मेरा मतलब है, मैंने सारी बात कही, दुर्भाग्य से मुझे अब लगता है कि मैंने जो भी पहल शांति और बातचीत के लिए की है, उसे गंभीरता से नहीं लिया गया।"

इमरान खान ने कहा कि वे अब कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अगर भारत उनके खिलाफ सैनिक कार्रवाई करता है तो पाकिस्तान इसका जवाब देगा।

बता दें भारत ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटा दिया था। इसके साथ ही राज्य को दो क्रेंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटा गया है।

इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। कभी वह अमेरिका के पास भाग रहा है, कभी चीन के पास तो कभी संयुक्त राष्ट्र के पास। लेकिन उसे हर जगह से मुंह की खानी पड़ रही है। लगभग सभी देश पाकिस्तान से बोल चुके हैं कि इस मामले को भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता करके सुलझाएं।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि, “कश्मीर मामले पर किसी अंतरराष्ट्रीय पत्र को इमरान खान का यह पहला इंटरव्यू है। इसमें उन्होंने अपने गुस्से और खीझ को उजागर किया है। उनके हावभाव से उनकी हताशा झलक रही थी।”

गौरतलब है कि भारत कश्मीर मामले को सदा से अपना आंतरिक मामला मानता रहा है और हाल में उठाए गए कदमों को जम्मू-कश्मीर की खुशहाली और आर्थिक विकास से जोड़कर देखता है।

इमरान खान ने न्यूयॉर्क टाइम्स को यह इंटरव्यू अमेरिकी राष्ट्रपित डोनल्ड ट्रम्प से फोन पर बात होने के एक दिन बाद दिया है। उन्होंने बताया कि ट्रम्प से बातचीत में उन्होंने कश्मीर के हालात से आगाह किया था, जिसके बाद ट्रम्प ने मध्यस्थता की पेशकश की थी। पाकिस्तान ने इस मध्यस्थता को स्वीकार कर लिया है, लेकिन भारत अपने इस रुख पर कायम है कि कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता किसी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी।

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