राहुल गांधी ने देश भर के किसानों से की बात, बोले- इन्हीं की आवाज से देश हुआ था आजाद, फिर यही दिलाएंगे आजादी

राहुल गांधी से एक किसान ने बात करते हुए कहा कि हमारे साथ अत्याचार हो रहा है। किसान को कुछ नहीं बचेगा। हमारी यह मांग है कि अगर कोई एमसपी से कम दाम में खरीदारी करता है तो उसे अपराध घोषित किया जाए। एमएसपी से कम कोई खरीद नहीं होनी चाहिए।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

देशभर में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी ने आज देश के किसानों से बात की है और उनसे जानने की यह कोशिश की है कि वह इस कानून के बारे में क्या सोचते हैं। आखिर इस कानून से आने वाले दिनों में किसानों को किस तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी। राहुल गांधी ने कहा कि आप सबका मैं दिल से स्वागत करता हूं और यह समझना चाहता हूं कि इन कानूनों से आप लोगों को क्या नुकसान होगा।

राहुल गांधी: बताइए आपको इस कानून से क्या नुकसान होगा?

किसान धीरेंद्र कुमार: यह अंधा कानून है। गरीबों और किसानों का शोषण हो रहा है। किसान भूखों मरेगा, खुदकुशी करने को मजबूर होगा।

राहुल गांधी: आपको डर क्यों लग रहा है कि एमएसपी जाएगी?

किसान सुनील सिंह: इसमें सब जुमलेबाजी है। एमएसपी की बात में कोई सच्चाई नहीं है। यह किसानों के साथ धोखा है।

किसान ओम प्रकाश धनखड़: हमारे साथ अत्याचार हो रहा है। किसान को कुछ नहीं बचेगा। हमारी यह मांग है कि अगर कोई एमसपी से कम दाम में खरीदारी करता है तो उसे अपराध घोषित किया जाए। एमएसपी से कम कोई खरीद नहीं होनी चाहिए।

किसान अशोक बूतड़ा: इस कानून में ऐसा प्रावधान कर दिया है कि अब एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए कोई बाध्य नहीं होगा। अगर किसान इसका विरोध करता है तो उसे जेल में डाला जाएगा, मुझे ऐसा लगता है।

किसान पंकज तनिराम मटेरे: इस कानून से न तो जनता का भाल होने वाला है और ना ही किसानों का भला होने वाला है। इस कानून से सिर्फ कंपनियों और अडानी और अंबानी जैसे लोगों का ही भला होगा। अगर किसी कंपनी ने खरीदारी की और उसने पैसा नहीं दिया तो हम उसके घर पर जाकर विरोध नहीं कर सकते। हमें वे डंडे मारकर वहां से भगा देंगे।

किसान राकेश जाखड़: पहले जो फसल बीमा है वह 400 कुछ रुपये हुआ करता था, अब उसे तीन से चार गुना बढ़ा दिया गया है।


राहुल गांधी का सवाल, इस कानून में सबसे खराब क्या लगता है?

किसान राकेश जाखड़: यह जो तीन कानून हैं उन्हें किसानों को खत्म करने के लिए बनाए गए हैं। अगर यह किसान को फायदा पहुंचाना चाहते हैं तो एमएसपी के लिए कानून क्यों नहीं बनाते? यह बहुत कुछ बोलते हैं, लेकिन इसके लिए कानून क्यों नहीं बनाते। इस तरह का प्रावधान यह क्यों नहीं करते कि अगर कोई एमएसपी से कम में खरीद करता है तो उसे जेल में डाला जाएगा। कल अडानी और अंबानी खुद तो खरीदेंगे नहीं वह तो बीच में दलाल भजेंगे।

किसान अशोक बतूड़ा: 1840 में इस्ट इंडिया कंपनी थी। वह इंग्लैंड से कपास का भाव निकालती थी। पूरी दुनिया में उसी भाव में कपास लिया जाता था। जिस तरह से इस्ट इंडिया कंपनी कारोबार करती थी ऐसा लगता है कि उसी तरह का कारोबार फिर से देश में शुरू होने वाला है। यहां पर भी कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोग हमसे खरीद करेंगे और उसे चार से पांच गुना भाव में आगे बेचेंगे। इससे ग्राहकों से भी लूट होगी और किसानों से भी लूट होगी। ऐसे में ठीक भाव नहीं मिलने से किसानों में खुदकुशी बढ़ेगी।

राहुल गांधी: आपका कहना है कि पहले इस्ट इंडिया कंपनी थी अब वेस्ट इंडिया कंपनी आई है।

किसान पंकज तनिराम मटेरे: हमारे देश को कृषि प्रधान देश कहते हैं, लेकिन अब यह कंपनी प्रधान देश होने जा रहा है।


राहुल गांधी: प्रधानमंत्री कह रहे है कि एमएसपी रहेगी, उसको नहीं बदला जाएगा, उस बात को आप मानते नहीं हो? या क्या विचार है।

किसान पंकज तनिराम मटेरे: नहीं हम उसको मानते नहीं हैं। क्योंकि आज वह क्या बोलेंगे और कल क्या बोलेंगे कुछ पता नहीं है। मैंने पेपर में पढ़ा कि जो कामगारों के लिए एक विधेयक था, उसे खत्म कर उन्होंने कंपनी के हाथों में दे दिया। अब कंपनी कामगारों को अपने हिसाब से हटा सकती है।

किसान गजानन काशीनाथ: मैं मरने से घबराया था, लेकिन अब कोरोना से ज्यादा इस कानून से डर लग रहा है। अगर मेरी जमीन अगली पीढ़ी के नाम से नहीं रहेगी। कोई भी कंपनी या व्यापारी अपने फायदे के लिए धंधा करता है। जो ज्यादा कमाता है उससे पैसे लेकर सरकार गरीबों में बांटती है।

किसान: यह अमीरों की पार्टी है और अमीरों की पार्टी ही रहेगी। छोटे किसानों, छोटे लोगों के बारे में कुछ नहीं सोचेगी।

किसान रकेश जाखड़: इस कानून से किसान और मजदूर सभी खत्म हो जाएंगे।

राहुल गांधी: अगर किसान, मजदूर खत्म हो जाएंगे तो करेंगे क्या, कहां जाएंगे?

किसान रकेश जाखड़: किसान और मजदूर बर्बाद हो जाएंगे, सभी को कॉरपोरेट के हाथों बेच दिया जाएगा। सब कुछ अंबानी और अडानी के हाथों में यह दे देंगे। जो अंग्रेजों का जो राज था वह वापस आ जाएगा। इस देश को यह बर्बाद कर देंगे। हर चीज का नीजिकरण कर रहे हैं, हर चीज को बेच रहे हैं। एयरपोर्ट को बेच रहे हैं, रेलवे को बेच रहे हैं। यह किसी चीज को छोड़ नहीं रहे हैं।

किसान रुद्रप्रताप पांडेय: किसान, व्यापारियों से काम पड़ने पर एडवांस पैसा लिया करते थे। अब तो व्यापारियों ने पैसा देना भी बंद कर दिया है। वह कह रहे हैं कि हम धान नहीं लेंगे, गेहूं नहीं लेंगे।

किसान धीरेंद्र कुमार: हम चाहते हैं कि 2006 में जो बिल लागू हुआ था उसे फिर से पूरे देश और बिहार में लागू हो।

किसान अमृतराव देशमुख: अभी जो कानून इन्होंने बनाया है, यह किसानों के खिलाफ है। इस कानून से किसान बहुत परेशान होने वाले हैं।


राहुल गांधी: भट्टापरसोल और उत्तर प्रदेश में हमने देखा कि किसान के पास जो है, जो संगठित उद्योगपति हैं वह जमीन भी चाहते हैं और फसल भी चाहते हैं। पहली लड़ाई जो मैंने लड़ी जमीन अधिग्रहण की थी। वहां पर मैं अड़ गया था। उसके कारण मीडिया ने मेरे ऊपर आक्रमण शुरू कर दिया। वो मैंने झेल लिया, उसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

किसान: आपने जो कानून 2011-2012 में जमीन अधिग्रहण कानून लाया था, उस कानून से किसनों को लाखों-करोड़ों रुपये मिले हैं। आज तक किसानों ने इतना पैसा नहीं देखा है। पहले जो कानून था वहआंग्रेजों के जमाने का कानून था वह भूमि अधिग्रहण कानून था, उसमे किसानों की लूट होती थी। अपने अभ्यास कर 2011 और 2012 में जो कानून बनाया वह किसानों के लिए फायदेमंद साबित हुआ। लेकिन इस कानून को जो किसानों के लिए फायदेमंद था उसे बदलने की कोशिश की गई, लेकिन आपकी ताकत के सामने झुकना पड़ा।

किसान चौधरी रामकरण प्रधान: महाराष्ट्र में पिछले पांच साल से देखते आ रहे हैं कि हर 13 मिनट में एक किसान की मौत हो रही थी। लेकिन अब जिस हालात में किसान हो जाएगा। अब यह देख कर नहीं लग रहा है कि कोई किसान को बचाएगा। आप लोग सब मेहनत करके किसान को बचाने का काम करेंगे तो देश का बहुत भला होगा।

राहुल गांधी: कोरोना के समय जब पैसा देना था तो सरकार ने पैसा नहीं दिया। सबसे बड़े दो से तीन उद्योगपतियों को दिया। उनकी आमदनी कोरोना में बढ़ती गई और आपकी आमदनी गिरती गई। लेकिन तब भी पूरा का पूरा पैसा उद्योगपतियों को दिया गया। लक्ष्य हिंदुस्तान की जो रीढ़ की हड्डी है उसे तोड़ना है। जो हिंदुस्तान का जो धन उसे लेना इनका लक्ष्य है। यह जो तीन कानून हैं। इसमें और नोटबंदी में कोई फर्क नहीं है। इसमें और जीएसटी में कोई फर्क नहीं है। फर्क यह है कि यह सीधे आपके दिल में छुरा घोंपता है। तीन बार आपके पैर में कुल्हाड़ी मारी और अब आपके सीने में छुरा मार दिया। यह मीडिया आपको बताएगा नहीं। न अखबार में दिखेगा न टीवी पर दिखाया जाए न सोशल मीडिया पर दिखेगा। मेरे दिमाग में तस्वीर बिलकुल साफ है। इसका विरोध करना ही पड़ेगा। किसानों के लिए नहीं, हिंदुस्तान के भविष्य के लिए। इन्होंने इस देश को खड़ा नहीं किया यह अंग्रेजों के साथ खड़े थे। ऐसे में इन्हें यह बात समझ नहीं आएगी। आपने जो बात बोली बहुत गहरी बात बोली कि किसान सिर्फ किसान नहीं है। किसान की आवाज युवाओं में है। किसान की आवाज सेना में है, पुलिस में है। किसान की आवाज में बहुत दम है। इसी आवाजा का प्रयोग करके हिंदुस्तान ने आजादी ली थी। किसान के आवाज से ही हिंदुस्तान आजाद हुआ। एक बार फिर आज किसान की आवाज से ही हिंदुस्तान आजाद होगा।

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Published: 29 Sep 2020, 11:40 AM
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