बिहार में महिला सशक्तिकरण और कन्या उत्थान योजनाओं का हाल- योजना की ब्रांड एंबेसडर तक ढूंढ रही काम

बिहार में नीतीश राज में महिला सशक्तिकरण का हाल यह है कि योजना की ब्रांड एंबेसडर तक को काम ढूंढना पड़ रहा है। साथ ही कन्या उत्थान योजना भी कागजों में है और महिलाओं को प्रोत्साहन राशि का अता-पता नहीं है।

फोटो : सोशल मीडिया
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शिशिर

इस खबर के साथ जो तस्वीर आप देख रहे हैं, वह बिहार के ढिबरी की रहने वाली धनमन्ती कुमारी की है। महिला सशक्तीकरण योजनाओं के लिए इसे नीतीश सरकार के समाज कल्याण विभाग ने ब्रांड एंबेसडर बनाया है। वजह यह कि इसने शादी के समय दहेज मांगे जाने पर विरोध करते हुए दहेज लोभी बारात लौटा दी थी और दुल्हे के पिता को जेल जाना पड़ा। लड़की ने हिम्मत का काम किया तो हर तरफ खबर बनी। समाज कल्याण विभाग ने दो कदम आगे बढ़कर महिला एवं बाल विकास निगम के समाज सुधार अभियान ‘उड़ान’ में धनमन्ती की तस्वीरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। इसकी ब्रांड एंबेसडर बनी धनमन्ती को धन का लाभ कितना हुआ, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस दिन अखबारों में उसकी बड़ी-सी तस्वीर छपती है ,वह काम ढूंढ़ने के लिए और ताकत के साथ निकलती है। इस उम्मीद में कि क्या पता, इसी तस्वीर को देखकर कहीं काम मिल जाए। यह बात अलग है कि दहेज लोभी बारात को लौटाने के बाद अब उसकी शादी भी परिवार के लिए समस्या बन गई है।

बिहार में महिला सशक्तिकरण और कन्या उत्थान योजनाओं का हाल- योजना की ब्रांड एंबेसडर तक ढूंढ रही काम

महिला सशक्तीकरण वाली योजनाओं के हाल पर आप आंसू ही गिरा सकते हैं। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के नाम पर बनी मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत बेटी पैदा होने पर अभिभावकों को मिलने वाले धन का हाल बुरा है। अविवाहित लड़की के इंटर पास करने पर 25 हजार और अविवाहित युवती के ग्रैजुएट होने पर 50 हजार रुपये स्कॉलरशिप में देने की योजना है। 2020 तक ऐसी हर इंटर छात्रा को 10 हजार रुपये जबकि ग्रैजुएट करनी वाली छात्राओं को 25 हजार रुपये मिलते थे।

2021 में इंटर परीक्षा देने वाली अविवाहित छात्राएं 6,43,678 थीं जिनमें से 5,18,591 पास हुई थीं। परीक्षा के करीब 9 महीने बाद 28 दिसंबर, 2021 को शिक्षा विभाग ने 4,12,469 छात्राओं के लिए 631 करोड़ 17 लाख 25 हजार रुपये जारी किए। यह पैसे कब तक इन लड़कियों के खाते में जाएंगे, इस पर अभी कोई पक्का कुछ नहीं बता सकता। बाकी छात्राओं को ई-कल्याण वेबसाइट पर आवेदन एप्रूव होने का इंतजार है।


प्रोत्साहन राशि जारी करने में सरकार के स्तर से देरी तो होती ही है, इनके प्रमाणपत्र की पुष्टि की प्रक्रिया भी लंबी है। हालत यह है कि दिसंबर के पहले हफ्ते तक के रिकॉर्ड के अनुसार, मगध विश्वविद्यालय में 68,554, बिहार विश्वविद्यालय में 44,566, बीएन मंडल विश्वविद्यालय में 25,222, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में 24,210, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में 17,423, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में 13,299 और जेपी विश्वविद्यालय में 10,824 स्नातक पास छात्राओं के आवेदन इस नाम पर लंबित हैं। अन्य विश्वविद्यालयों की सूची यहां इसलिए नहीं दी जा रही कि वह 10,000 से कम की है।

वैसे, इस योजना का हश्र यह है कि फरवरी-मार्च में परीक्षा पास करने वाली लड़कियों को देने के लिए विभाग को दिसंबर अंत में राशि जारी हुई है। यह राशि भी इसलिए जारी हो सकी क्योंकि नीतीश कुमार के जनता दरबार में भागलपुर-जैसे शहरों से भी लड़कियां इस प्रोत्साहन राशि के नहीं मिलने की शिकायत लेकर कई बार आ चुकी हैं। ग्रेजुएशन और पीजी में पढ़ने वाली छात्राओं को सरकारी कॉलेज में फ्री एजुकेशन मिल रहा लेकिन बड़ा संकट यह है कि लड़कियां अब भी कॉलेज की दूरी के कारण उच्च शिक्षा से दूर रह रही हैं।

घर में बालिका के जन्म पर प्रोत्साहन राशि देने के प्रावधान का हाल तो और भी बुरा है। विभिन्न जिलों और उनके प्रखंडों- अनुमंडलों के अस्पतालों की बात कौन कहे, राजधानी पटना में भी गर्भवती और बच्ची को जन्म दे चुकी महिलाएं इस नाम पर मिलने वाली प्रोत्साहन योजना की राशि के लिए फरियाद करती दिखती हैं। 22 साल की प्रीति देवी का ही उदाहरण लें। उन्होंने बच्ची को जन्म दिया और 7 अगस्त, 2021 को पटना से सटे फुलवारी शरीफ के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से डिस्चार्ज हो गईं। फिर, वह और उनकी सास प्रोत्साहन राशि के लिए यहां-वहां दौड़ लगाती रहीं। संयोगवश एक मीडियाकर्मी से उनकी भेंट हो गई, तो उसने पैरवी पर उन्हें सरकारी अस्पताल में जन्म के साथ जारी होने वाला पैसा नवंबर अंत में दिलवाया। वैसे, पांच हजार रुपये की पहली किस्त उसे अब भी नहीं मिली है। प्रीति कहती है, ‘सरकारी अस्पताल में जन्म के बाद इतनी दिक्कत हो रही तो कहीं और जन्म देने पर पैसे मिलने की उम्मीद भी नहीं होती।’ आमतौर पर इन-जैसी योजनाओं के लिए भी मार्च के आसपास ही आनन-फानन में पैसे जारी होते हैं। इससे किसी को कोई मतलब नहीं कि किसी गर्भवती को पैसे की जरूरत सिर्फ वित्तीय वर्ष के अंत में ही नहीं होती। वैसे, गर्भवती वाला अभी कोई डेटा जारी नहीं हुआ है कि हम कुछ बता सकें कि कितने लोगों को यह राशि मिल पाई है।

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