बेतहाशा महंगाई ने तोड़ दी है आम भारतीय की कमर, CWC ने महंगाई पर प्रस्ताव में तेल पर टैक्स को बताया 'जबरन वसूली'

कांग्रेस समिति की बैठक में महंगाई पर भी प्रस्ताव पारित किया गया है। कार्यसमिति ने कहा है कि निरंतर बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है ऐसे में सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव कर तुरंत आम लोगों को राहत देनी चाहिए।

फोटो : @INCIndia
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नवजीवन डेस्क

बेलगाम महंगाई

कांग्रेस कार्यसमिति ने कहा है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों की जिंदगी को थाम लिया है। त्योहारों का मौसम है लेकिन मोदी सरकार हर मोर्चे पर महंगाई बढ़ाकर लोगों को लूट रही है। मोदी सरकार को आम भारतीयों के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों का जरा भी एहसास नहीं है।

कार्यसमिति ने कहा है कि विडंबना यह है कि ये चुनौतियाँ मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था के विनाशकारी कुप्रबंधन का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। केंद्र सरकार ने आर्थिक अनिश्चितता की खाई पैदा कर दी है जिसने औसत भारतीय की न्यूनतम आय और बचत को निगल लिया है। लगभग 14 करोड़ नौकरियां चली गई हैं, वेतन में भारी कटौती हुई है, लाखों एमएसएमई बंद हो गए हैं और छोटे दुकानदार अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इन सभी चुनौतियों को अनियंत्रित मुद्रास्फीति से बढ़ा दिया गया है, क्योंकि सरकार तो शासन के बजाय विवाद और विभाजन फैलाने पर केंद्रित है।

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स खुली लूट

मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाना लोगों से जबरन वसूली के अलावा कुछ नहीं है। अगर इन्हें आंकड़ों में देखें तो 2014 के बाद से डीजल पर उत्पाद शुल्क में 820% की वृद्धि और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 258% की वृद्धि की गई है। मोदी सरकार ने ऐतिहासिक रूप से नीचे गई कच्चे तेल की कीमतों के दौर में ₹18,00,000 करोड़ से अधिक का लाभ कमाया है और इसका फायदा आम लोगों को देने के बजाय इसने कीमतों में इजाफा जारी रखा है। देश भर में पहली बार पेट्रोल ने ₹100/लीटर का आंकड़ा पार किया है (कई स्थानों पर ₹105 प्रति लीटर को छू रहा है) और डीजल लगभग ₹100/लीटर के निशान को छू रहा है (कई जगहों पर ₹100/लीटर को पार कर रहा है)। ये मोदी सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और क्रूरता के कार्य हैं, और जनता के साथ इस विश्वासघात के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए शर्मिंदा किया जाना चाहिए।


रसोई गैस के दाम आसमान पर

एलपीजी सिलेंडर की कीमत वर्तमान में ₹400 प्रति सिलेंडर (कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के कार्यकाल के दौरान) से बढ़कर ₹900 प्रति सिलेंडर हो गई है। इसमें बीते सात वर्षों में लगभग 125% की वृद्धि की गई है। अकेले नवंबर 2020 से, सिलेंडर की कीमतों में 11 गुना वृद्धि हुई है और कीमत 51.5% (₹594 से ₹900) तक बढ़ गई है। आम परिवारों के लिए हालात को बदतर बनाने के लिए, सरकार ने रसोई गैस पर पूरी सब्सिडी को लगभग समाप्त कर दिया है, जो लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय भारतीय परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक पुल था। एक 'सूट-बूट की सरकार' कभी नहीं समझ सकती थी कि इन लाखों परिवारों के लिए इस अंतर का क्या मतलब है।

खाने के तेल, दाल और सब्जियों के दाम में दोगुनी बढ़ोत्तरी

बुनियादी उपभोक्ता वस्तुओं की असहनीय कीमतों ने हर भारतीय के बजट में एक छेद कर दिया है। खाना पकाने का तेल पहले से ही ₹200/लीटर (या अधिक) पर बिक रहा है क्योंकि बड़े जमाखोर आम आदमी की दिक्कतों की कीमत पर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। अधिकांश दालों की कीमत ₹80 से ₹110 प्रति किलो के बीच है। सब्जी और टमाटर के दाम गरीब और मध्यम वर्ग के लिए महँगे होते जा रहे हैं। अधिकांश घरेलू उपभोक्ता वस्तुओं की यही स्थिति है।


रेल किराए में इजाफा

कोविड महामारी के दौरान, मोदी सरकार ने अधिकांश यात्री ट्रेनों को एक्सप्रेस ट्रेनों में बदल दिया, जिससे रेल किराए में कई गुना वृद्धि हुई है। अधिकांश यात्री ट्रेनें अब एक्सप्रेस किराया वसूल रही हैं, जिससे ऐसे लगभग दो करोड़ भारतीयों पर भारी बोझ पड़ रहा है, जो हर दिन यात्रा करने के लिए ट्रेन का उपयोग करते हैं। यहां तक कि प्लेटफॉर्म टिकट भी 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये कर दिया गया है। महामारी के दौरान लगी तमाम किस्म की रोक हटने के बावजूद, इस उदासीन सरकार द्वारा किराए में भारी वृद्धि पर पुनर्विचार नहीं किया गया है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मोदी सरकार से आग्रह करती है कि वह रसोई गैस और तेल के दाम कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कमी करे। ऐसे समय में जब देश एक महामारी से उबर रहा है, सरकार की ओर से तैयारियों की कमी के कारण, मोदी सरकार को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।

कार्यसमिति ने कहा है कि दुनिया भर में किसी भी सरकार ने जानबूझकर बनाई गई नीतियों के माध्यम से और आर्थिक लापरवाही के माध्यम से अपने लोगों पर इतना बड़ा आर्थिक तकलीफ नहीं थोपी है।

कार्यसमिति ने मोदी सरकार का आह्वान किया है कि वह सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कीमतों में कमी करे, और आर्थिक नीतियों से गरीबों को हुए नुकासन की भरपाई के उपाय करे।

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