गुरुग्राम में बच्ची के रेप मामले में SC ने अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई, उठाए सवाल, जांच के लिए SIT गठित

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए इन्हें पूरे रिकॉर्ड के साथ पेश होने के लिए कहा था। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मजिस्ट्रेट ने जब बच्ची का बयान दर्ज किया, तब आरोपी उसके बेहद नज़दीक खड़ा था।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

गुरुग्राम में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुए रेप मामले में पुलिस और न्यायिक मजिस्ट्रेट के रवैये को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई और मामले की पूरी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट की रिपोर्ट अभी अदालत को प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी अदालत में मौजूद थे। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए इन्हें पूरे रिकॉर्ड के साथ पेश होने के लिए कहा था। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मजिस्ट्रेट ने जब बच्ची का बयान दर्ज किया, तब आरोपी उसके बेहद नज़दीक खड़ा था।


सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा कैडर की महिला आईपीएस अधिकारी नाजनीन के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने का आदेश दिया और राज्य सरकार को इस गठित एसआईटी की अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए। अदालत ने गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और मामले की जांच में लगे अन्य अधिकारियों को जांच प्रक्रिया से अलग करने का आदेश दिया। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ भी जारी किया।

अदालत ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों को भी कारण बताने के लिए नोटिस भेजा कि उन्हें पद से क्यों न हटाया जाए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने मैक्स अस्पताल की डॉ. बबीता जैन से भी स्पष्टीकरण मांगा कि उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट क्यों बदली।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई अब पोक्सो अदालत की किसी वरिष्ठ महिला न्यायिक अधिकारी के समक्ष कराने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने हरियाणा पुलिस की महिला अधिकारियों का बयान दर्ज करने और पीड़ित बच्ची के माता-पिता का हलफनामा एक सीलबंद लिफाफे में जमा करने का निर्देश भी दिया।

इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। अदालत ने साफ किया कि इस गंभीर और संवेदनशील मामले में सभी अधिकारी पूरी जवाबदेही के साथ कार्य करें, ताकि पीड़ित बच्ची को न्याय मिल सके और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हो।

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