उत्तर प्रदेश में BJP आस्था के सहारे ढूंढ रही जीत का रास्ता, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान का क्या है मतलब?

चारों खाने चित दिख रहे बीजेपी को भी समझ आ गया है कि अब आस्था के अलावा और कोई ऐसा रास्ता नहीं है जो उनकी नैय्या पार लगा पाए।

फोटो: सोशल मीडिया
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पवन नौटियाल @pawanautiyal

झूठे वादों से जनता को बहकाकर सत्ता हासिल करने की परंपरा को बीजेपी ने अब तक जारी रखा है। बेरोजगारी, शिक्षा, विकास के जिन मुद्दों को लेकर बीजेपी सरकार सत्ता में आई, उनका दूर दूर तक जिक्र नहीं है। ये हाल ना सिर्फ केंद्र का है बल्कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी ये आसानी से देखने को मिल जाएगा। एक ओर जहां युवा रोजगार को लेकर सड़कों पर है तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी का 'विकास' भी ढूंढे नहीं मिल रहा।

चारों खाने चित दिख रही बीजेपी को भी समझ आ गया है कि अब शायद आस्था के अलावा और कोई ऐसा रास्ता नहीं है जो उनकी नैय्या पार लगा पाए। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जिन वादों के सहारे बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई उन वादों को पूरा तो छोड़िए उनकी शुरूआत ही नहीं हो पाई है। ऐसे में सामने चुनाव देख सरकार भी परेशान नजर आ रही है। अब बीजेपी को पता है कि आस्था का कार्ड कैसे खेलना है। इसलिए योगी के मंत्री राम मंदिर के बाद इन दिनों काशी और मथुरा का जोर शोर से जिक्र कर रहे हैं।

खुद उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि जो दृश्य राम मंदिर में दिखा आने वाले समय में वहीं तस्वरी काशी और मथुरा में देखने को मिलेगा। इससे साफ है कि अब बीजेपी सरकार को लगने लगा है कि उसकी नैय्या पार लगाने का आस्था के अलावा दूसरा ऐसा रास्ता नहीं है।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “BJP के लिए चुनाव के एजेंडे में कोई मंदिर का विषय मुद्दा नहीं रहा है, मंदिर आस्था का मुद्दा है चुनाव का नहीं। जो लोग राम मंदिर बनने का विरोध करते थे अब वही लोग राम मंदिर में माथा टेक रहे हैं। आगामी दिनों में यही दृश्य काशी और मथुरा में दिखेगा।” उनके इस बयान के अब मतलब निकाले जा रहे हैं।

उधर, उत्तर प्रदेश में अभी भी करोड़ों लोग रोजगार की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विकास की बात करें तो उत्तर प्रदेश में विकास महज तस्वीरों, बैनरों में हुआ है। धरातल में उतरने पर सब साफ दिख जाता है। ऐसे में विपक्ष पूछ रहा है कि क्या जनता से जुड़े विकास के मुद्दों पर योगी सरकार चुनाव नहीं लड़ेगी?

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