बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ में लगे हैं भारत और चीन, लेकिन PM शेख हसीना की नजरें यूरोप पर

भारत और चीन, बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ में लगे हैं। लेकिन बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अमेरिका और यूरोप के साथ संबंध बढ़ाने की कोशिशों के साथ नए विकल्पों के लिए दरवाजे खुले रखे हैं।

फोटो: DW
फोटो: DW
user

डॉयचे वेले

भारत और चीन, बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ में लगे हैं। लेकिन बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अमेरिका और यूरोप के साथ संबंध बढ़ाने की कोशिशों के साथ नए विकल्पों के लिए दरवाजे खुले रखे हैं। बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग लगातार चौथी बार चुनाव जीती, तो पश्चिमी देशो ने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर खतरे की दुहाई दी। जबकि भारत और चीन ने शेख हसीना को प्रधानमंत्री बनने पर तुरंत बधाई दी। एशिया की ये दोनों ताकतें, दूसरे छोटे देशों को साथ मिलाकर अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने में लगी हैं।

जानकार चेतावनी देते हैं कि बांग्लादेश को अपने हितों का ध्यान रखते हुए, भारत और चीन के साथ संभलकर चलना होगा। अमेरिकी थिंक टैंक विल्सन सेंटर में दक्षिण एशिया इंस्टिट्यूट के निदेशक माइकल कूगलमैन कहते हैं कि बांग्लादेश, चीन और भारत के साथ अपने संबंधों के जरिए, ''दो ताकतों के बीच प्रतियोगिता'' का सफलतापूर्वक फायदा उठा रहा है।

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा कि बांग्लादेश के बीजिंग के साथ आर्थिक और सामरिक संबंध पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा बढ़े हैं। हम उस बिंदु पर पहुंच चुके हैं जहां चीन बांग्लादेश के पहले पनडुब्बी बेस के लिए फंड दे रहा है। संतुलन कायम करने में यह बांग्लादेश की सफलता की एक और झलक है।

बांग्लदेश में चीन के बढ़ते कदम

पिछले साल, बांग्लादेश ने 1.2 अरब डॉलर की लागत वाले एक सबमरीन बेस का उद्घाटन किया। यह चीन की मदद से बनाया जा रहा है, जिस पर भारत में चिंताएं जगीं कि चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) भारत के प्रभाव क्षेत्र में घुसने की कोशिश में है। अमेरिकी रक्षा विभाग की 2023 में आई एक रिपोर्ट ने भी यह चेतावनी दी कि चीन, पीएलए के लिए लॉजिस्टिक सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए बांग्लादेश की ओर देख रहा है।

चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बांग्लादेश में चीन का निवेश अब डेढ़ अरब डॉलर से ज्यादा का है। बुनियादी ढांचे के जरिए प्रभुत्व बढ़ाने के चीनी प्रयासों के तहत शुरु हुई बेल्ट एंड रोड योजना में भी बांग्लादेश साल 2016 से ही भागीदार है। बांग्लादेश के पूर्व विदेश सचिन तौहीद हुसैन ने डीडब्ल्यू को बताया कि चीन ने भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली तीस्ता नदी पर एक परियोजना प्रस्तावित की है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है।

बांग्लादेश की सरकार चीन के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसमें तीस्ता नदी के कुछ हिस्सों में ड्रेजिंग, यानी तलछट की सफाई और तटबंध बनाने की बात है। तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट कहलाने वाली इस परियोजना का बजट करीब 1 अरब डॉलर बताया जा रहा है। तौहीद हुसैन का कहना है, "इससे दिक्कत पैदा हो सकती है अगर चीन ने ज्यादा जोर लगाया तो, खासकर तीस्ता प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए।"

चीन का यह प्रस्ताव, भारत और बांग्लादेश के बीच तमाम बातचीत के बावजूद, पानी के बंटवारे पर कोई संधि ना करने पाने के बाद आया। साल 2011 में एक संभावित समझौता नहीं हो पाया था क्योंकि पश्चिम बंगाल राज्य इसके खिलाफ था। भारत का सिलिगुड़ी इलाका, जिसके 'चिकेंस नेक' कहा जाता है, इस प्रस्तावित परियोजना के काफी नजदीक है। भूराजनैतिक दृष्टि से, 20-22 किलोमीटर में फैला यह इलाका काफी संवेदनशील है। यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है। भारत को डर है कि चीन इस विकास योजना की आड़ में भारतीय जमीन के नजदीक अपनी मौजूदगी स्थापित करना चाहता है।

क्या बांग्लादेश में है पश्चिम से मुंह मोड़ने का दम

7 जनवरी को हुए बांग्लादेश के राष्ट्रीय चुनावों की पश्चिमी देशों ने आलोचना की। इन चुनावों में देश की विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने हिस्सा नहीं लिया। इसके कारण बांग्लादेश में लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठाए गए। शेख हसीना की जीत की घोषणा के बाद अमेरिका ने कहा कि वह बांग्लादेश के चुनावों को 'आजाद और निष्पक्ष' नहीं मानेगा। 9 जनवरी को शेख हसीना ने आवामी लीग पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विपक्षी दल बीएनपी पर आरोप लगाया कि वह अपने ''विदेशी मालिकों'' के लिए काम कर रही है।

2026 में बांग्लादेश, संयुक्त राष्ट्र के सबसे कम विकसित देशों की सूची (एलडीसी) से बाहर होने वाला है। इस बदलाव के बाद यूरोपीय बाजार में ड्यूटी और कोटा फ्री निर्यात की सुविधाएं उठाने के लिए उसके पास महज तीन साल का वक्त होगा। बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक के पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्री जाहिद हुसैन ने डीडब्ल्यू से कहा कि बांग्लादेश, पश्चिमी देशों से मिलने वाले आर्थिक फायदे जारी रखने के लिए दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है। हुसैन ने कहा, "एलडीसी लिस्ट पर होने की वजह से मिलने वाले फायदे, वैकल्पिक तरीके अपनाकर दोबारा पाए जा सकते हैं। जैसे, अगर बांग्लादेश मुक्त-व्यापार समझौते या फिर आर्थिक गुट का हिस्सा बन जाए तो वह आसानी से उन गुटों के बाजारों तक पहुंच सकता है।"

बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री हसन महमूद यूरोपीय देशों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखने की वजह से जाने जाते हैं। चार्ल्स विह्टली, बांग्लादेश में यूरोपीय संघ के दूत हैं। उन्होंने विदेश मंत्री से हुई मुलाकात के बाद ईयू से उनके मजबूत संबंधों और यूरोप की गहरी समझ की तारीफ की। विह्टली ने पत्रकारों से कहा कि बांग्लादेश और ईयू के बीच संबंध, एक नई साझेदारी और सहयोग समझौते (पीसीए) के जरिए चलाए जाएंगे। इस कानूनी दस्तावेज पर जल्दी ही सहमति बनेगी और यह पूर्व समझौते से कहीं ज्यादा राजनीतिक होगा।

माइकल कूगलमैन का मानना है कि बांग्लादेश को किसी एक तरफ होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और वह दोनों एशियाई ताकतों के बीच संतुलन बनाने में कामयाब रहेगा। वह कहते हैं, "यह वह देश है जिसने भारत की ही तरह अपने प्रतद्वंद्वियों के साथ संतुलन बनाने की प्रबलता दिखाई है, बजाए उनके सामने ढह जाने के। शेख हसीना खासतौर पर विकसित और विकासशील दुनिया, भारत और चीन , पूर्वी और पश्चिमी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाने में माहिर हैं।''

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia


;