INDIA ब्लॉक की बैठक में खड़गे बोले- CEC को हटाया जाए, EVM की जगह बैलेट से हो मतदान, रखीं 6 मांगें
INDIA ब्लॉक की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए और CEC को हटाने, EVM की जगह बैलेट व प्री-SIR वोटर लिस्ट की मांग की।

खड़गे ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि SIR के तहत 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
खड़गे ने EVM की जगह बैलेट से मतदान और भविष्य में प्री-SIR वोटर लिस्ट इस्तेमाल करने की मांग की।
INDIA ब्लॉक की बैठक में उन्होंने मतदाता सूची में पारदर्शिता और युवा मतदाताओं के लिए आसान पंजीकरण की मांग रखी।
दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आजोयित 'INDIA ब्लॉक' की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हर नागरिक की सरकार चुनने में बराबर की भागीदारी होनी चाहिए। उनके मुताबिक, ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ गणराज्य की बुनियाद है और इस सिद्धांत को कमजोर नहीं किया जा सकता।
खड़गे ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से विपक्ष लगातार EVM और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांगता रहा है। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से महादेवपुरा, अलेड और हरियाणा व महाराष्ट्र से जुड़े मामलों में सबूत पेश किए जाने का भी जिक्र किया। खड़गे का आरोप है कि INDIA ब्लॉक के दलों की आपत्तियों के बावजूद चुनाव आयोग ने शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
SIR और मतदाता सूची पर खड़गे के सवाल
खड़गे ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर किया जाता है या उन्हें अपनी पात्रता दोबारा साबित करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई वास्तविक मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न हो।
उन्होंने दावा किया कि 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे उनके लोकतांत्रिक अधिकार पर असर पड़ा है। खड़गे ने कहा कि आम मतदाताओं को यह तय करना चाहिए कि सत्ता में कौन आएगा, न कि सत्ता में बैठे लोगों को यह तय करना चाहिए कि कौन मतदान कर सकता है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की। खड़गे ने कहा कि चुनाव आयुक्त के दो साथी सदस्यों ने 10 महीने में 14 बार पत्र लिखे हैं और इससे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। उन्होंने 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून का भी जिक्र किया और कहा कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से भारत के प्रधान न्यायाधीश को हटाकर उनकी जगह एक मंत्री को शामिल किया गया।
EVM से बैलेट और प्री-SIR सूची की मांग
खड़गे ने EVM से मतदान पर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनाव में दोबारा भरोसा कायम करने के लिए EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने की भी मांग की।
खड़गे ने कहा कि INDIA ब्लॉक के दलों को लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने बैठक के सामने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी 6 प्रमुख मांगें रखीं:
भविष्य के चुनावों में प्री-SIR मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाए और हर मतदाता सूची संशोधन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की जानकारी निर्वाचन क्षेत्र और बूथ स्तर पर उपलब्ध कराई जाए।
किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे उचित सूचना, कारण बताने और प्रभावी अपील का अवसर दिया जाए।
प्रशासनिक खामियों, पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने या जागरूकता की कमी के कारण पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाया जाए।
EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जाए।
युवा और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों के लिए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और सुलभ बनाई जाए।
चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और ऐसा आयोग हो जिस पर सभी राजनीतिक दलों को भरोसा हो।
खड़गे ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की जगह गोपनीयता और ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को कमजोर करने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मतपत्र जनता का है, जनादेश जनता का है और सरकार की शक्ति का अंतिम आधार भी जनता ही है।
