भारत ने खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया, विदेश सचिव मिसरी ने ईरानी दूतावास पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

हालांकि, पीएम मोदी या सरकार ने अब तक खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त नहीं किया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों और बुद्धिजीवियों ने खामेनेई की मृत्यु पर प्रधानमंत्री और सरकार की चुप्पी की आलोचना की थी। ऐसे में मिसरी का ईरानी दूतावास का दौरा बेहद अहम है।

भारत ने खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया, विदेश सचिव मिसरी ने ईरानी दूतावास पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
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नवजीवन डेस्क

भारत ने इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर उनकी मौत के पांच दिन बाद शोक जताया है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी गुरुवार को नई दिल्ली में ईरानी राजदूत पहुंचे और खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही मिसरी ने ईरानी दूतावास में भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर भी किए। खामेनेई की मौत 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के हमले में हुई थी।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास में ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली से भी मुलाकात की और खामेनेई के निधन पर संवेदनाएं व्यक्त कीं। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस मौके पर विदेश सचिव और भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली के बीच हुई बातचीत की तस्वीर भी जारी की।


हालांकि, भारत के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की ओर से अब तक खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त नहीं किया गया है। भारत पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का आह्वान करता आ रहा है, लेकिन उसने खामेनेई की हत्या पर प्रतिक्रिया न देने का विकल्प चुना। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों और बुद्धिजीवियों ने खामेनेई की मृत्यु पर प्रधानमंत्री और सरकार की निष्क्रियता और चुप्पी की आलोचना की थी। ऐसे में मिसरी की ईरानी दूतावास यात्रा और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करना बेहद अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक दबाव या पब्लिक को मनाकर जो शोक जताया जाता है, वह कोई शोक नहीं होता - यह हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए एक दिखावटी, इज्जत बचाने वाली एक्सरसाइज है।


एक दिन पहले ही ईरानी दूतावास ने ऐलान किया था कि खामेनेई की 'शहादत' के बाद वो कंडोलेंस बुक यानी शोक पुस्तिका रखेंगे जिस पर लोग आकर अपनी संवेदनाएं जता सकते हैं।दुनिया भर में ईरानी लोगों और उनके समर्थकों को हुए गहरे नुकसान के जवाब में, नई दिल्ली में दूतावास ने भारतीय लोगों, राजनयिकों और जो भी हमदर्दी दिखाना चाहते हैं, उन्हें शोक बुक पर साइन करने के लिए कहा है। शोक बुक पर गुरुवार (5 मार्च), शुक्रवार (6 मार्च) और सोमवार (9 मार्च) को संवेदनाएं जाहिर की जा सकती हैं।

86 वर्षीय खामेनेई की 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमले में मृत्यु हो गई थी। 86 वर्षीय खामेनेई, 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। बाद में अमेरिका ने दावा किया था कि सैन्य बैठक में उनके साथ कई शीर्ष सैन्य अफसर भी मारे गए थे। मृतकों में ईरान के रक्षा मंत्री और आईआरजीसी के प्रमुख भी शामिल थे। हमले में खामेनेई के करीबी परिजनों के भी मारे जाने की खबर आई थी, जिसमें उनकी बहू, बेटी, और नाती का नाम शामिल था। हमले में घायल खामेनेई की पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

सर्वोच्च नेता के मारे जाने के बाद से ही मध्य पूर्व में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। तेहरान ने यूएस बेस को निशाना बना कई खाड़ी देशों पर अटैक किया। गुरुवार को तो उसकी सीमा से सटे अजरबैजान पर भी दो ड्रोन हमले हुए, जिसके बाद ईरानी दूत को तलब किया गया। बाकू ने बताया कि हवाई अड्डे और स्कूल पर ये हमले किए गए, जिसमें दो लोग घायल हो गए।