'भारत ने देखा, इंडिया ने हराया', लोकसभा में परिसीमन से जुड़ा बिल गिरने पर राहुल गांधी ने बीजेपी को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर परिसीमन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया। उनकी ये चालबाज़ी एकजुट विपक्ष ने भांप लिया और संविधान संशोधन बिल गिर गया।

विपक्ष की एकजुटता के कारण आज लोकसभा में परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में विफल रही। मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया, जिसके चलते यह विधेयक पास नहीं हो पाया।
इस विधेयक के गिरने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया। भारत ने देख लिया। INDIA ने रोक दिया। जय संविधान।"
इससे पहले मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए इस हमले को हरा दिया है। हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है। हमने इसे रोक दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 2023 में लाए गए महिला बिल को लागू किया जाए, जिस पर पूरा विपक्ष समर्थन देने को तैयार है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर परिसीमन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया। उनकी ये चालबाज़ी एकजुट विपक्ष- INDIA ने भांप लिया और संविधान संशोधन बिल गिर गया। हम सभी विपक्षी दलों के नेताओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। मोदी-शाह अपनी राजनीति को चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को तबाह करने चले थे, उनकी ये साज़िश अब औंधे मुंह गिर गई है। हम मोदी सरकार से फिर एक बार मांग करते हैं कि 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के अनुसार महिलाओं को 33% आरक्षण 2029 के चुनावों से ही दिया जाए। कांग्रेस पार्टी सितंबर 2023 से इसकी मांग कर रही है। यह 'नारी शक्ति' के प्रति प्रधानमंत्री जी की प्रतिबद्धता की असली परीक्षा होगी।
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का सवाल नहीं था, बल्कि देश के लोकतंत्र और अखंडता से जुड़ा विषय था। उन्होंने कहा कि हम कभी इससे सहमत नहीं हो सकते कि महिला आरक्षण को परिसीमन से इस तरह जोड़ा जाए कि वह पुरानी जनगणना पर आधारित हो, जिसमें ओबीसी वर्ग शामिल ही नहीं है। ऐसे में इस बिल का पारित होना संभव नहीं था। प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष शुरू से ही इस बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहा था और अंततः संसद में यह बिल पास नहीं हो सका।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु के खिलाफ जो बिल आया था, वह पार्लियामेंट में गिर गया है, यह खबर हमें अभी मिली है। यह जीत तो बस एक ट्रेलर है। अगला चुनाव आने वाला है। मैंने कहा है कि यह तमिलनाडु बनाम दिल्ली है। हम 200 से ज़्यादा सीटें जीतने वाले हैं। हमें लगातार काम करना चाहिए और जीतना चाहिए। 23 अप्रैल को हम दिल्ली के घमंड को और उस घमंड को सपोर्ट करने वाले गुलामों को एक साथ हराएंगे।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, "महिला आरक्षण के नाम पर लोकतंत्र को खत्म करने और उसे हाईजैक करने की केंद्र सरकार की कोशिश नाकाम हो गई है... हमने इस आरक्षण का सपोर्ट किया था और इसकी मांग भी की थी, लेकिन वे (बीजेपी) इसे नहीं चाहते; इसके बजाय, वे अपने फायदे के लिए डिलिमिटेशन करना और चुनाव क्षेत्रों को बांटना चाहते हैं... पूरे विपक्ष ने इसे हरा दिया है... महिलाएं इन मुद्दों को लेकर समझदार हैं।" वेणुगोपाल ने कहा कि उन्हें (बीजेपी) एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और आम सहमति बनानी चाहिए... इस सेशन की क्या ज़रूरत थी?..."
बता दें कि इसस पहले दो दिन की चर्चा के बाद शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में विफल रही। मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया, जिसके चलते यह विधेयक गिर गया। महिला आरक्षण से जुड़े इस संविधान संशोधन विधेयक के जरिये सरकार परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती थी, जो सफल नहीं हो पाया।