NTA सुधारों पर कांग्रेस का आरोप, जयराम रमेश बोले- 101 में से 27 सिफारिशें अब भी अधूरी

जयराम रमेश ने NTA सुधारों को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि राधाकृष्णन समिति की 101 में से 27 सिफारिशें अब तक लागू नहीं हुई हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधारों को लेकर केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि एनटीए की पिछली गड़बड़ियों के बाद गठित के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की 101 सिफारिशों में से 27 अब तक लागू नहीं की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा सुधारों को लेकर देश को गुमराह किया और समिति की कई अहम सिफारिशों को लागू करने में विफल रही।

'101 में से 27 सिफारिशें अब भी लागू नहीं'

जयराम रमेश ने कहा कि एनटीए की पिछली गड़बड़ियों के बाद मोदी सरकार ने के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कुल 101 सिफारिशें दी थीं। इनमें 60 अल्पकालिक, 30 मध्यम अवधि की और 6 सिफारिशें सरकार के लिए थीं। उन्होंने दावा किया कि 'हिंदुस्तान टाइम्स' में प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, इन 101 सिफारिशों में से 27 अब तक लागू नहीं हुई हैं।


'भर्ती परीक्षाओं को लेकर देश को गुमराह किया'

कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा सुधारों के मुद्दे पर देश को गुमराह किया। उन्होंने कहा, तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिसंबर 2024 में घोषणा की थी कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के अनुरूप एनटीए अब भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं करेगा। इसके बावजूद, जयराम रमेश ने दावा किया कि एनटीए ने 2025 और 2026 में कई भर्ती परीक्षाएं आयोजित कीं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 और 2026 के पेपर लीक के बीच पूरे दो वर्षों तक मोदी सरकार ने एनटीए में पूर्णकालिक महानिदेशक की नियुक्ति नहीं की।

नंदन नीलेकणी की टास्क फोर्स पर भी उठाए सवाल

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार में राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने की न तो राजनीतिक इच्छाशक्ति थी और न ही ईमानदार मंशा। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक नई उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने का औचित्य क्या है।

उन्होंने दावा किया कि सरकार के अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए इस नई टास्क फोर्स की रिपोर्ट भी धूल फांकती रह जाएगी।

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