जयराम रमेश ने सभापति को भेजा प्रमाण, देवरस ने इंदिरा को पत्र लिखकर संघ से प्रतिबंध हटाने का किया था आग्रह

पुस्तक में यह भी कहा गया है कि देवरस ने दावा किया था कि संघ का बिहार या गुजरात के किसी आंदोलन, जिसमें जयप्रकाश नारायण का आंदोलन भी शामिल है, से कोई संबंध नहीं था।

जयराम रमेश ने सभापति को भेजा प्रमाण, देवरस ने इंदिरा को पत्र लिखकर संघ से प्रतिबंध हटाने का किया था आग्रह
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को पत्र लिखकर उच्च सदन में उनके द्वारा किए गए उस दावे को सत्यापित करने के लिए प्रमाण उपलब्ध कराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के तत्कालीन सरसंघचालक मधुकर दत्तात्रेय देवरस ने संघ पर लगा प्रतिबंध हटाने का आग्रह करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था।

आरएसएस प्रमुख ने आपातकाल के समर्थन में पत्र लिखा

राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने सभापति को लिखे पत्र के साथ देवरस द्वारा इंदिरा गांधी को लिखे गए पत्रों की प्रमाणित प्रतियां भी भेजीं। रमेश ने अपने पत्र में कहा, ‘‘कल शाम मैंने संसदीय कार्य मंत्री के एक बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। बीजेपी सांसदों ने मेरे उस दावे का प्रमाण मांगा था कि आरएसएस प्रमुख ने आपातकाल के समर्थन में इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था।’’


पुणे की यरवदा जेल से देवरस ने लिखे थे दो पत्र

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभिलेख के लिए अपना सत्यापन संलग्न कर रहा हूं। इसमें इंदिरा गांधी को लिखे गए दो पत्र और आचार्य विनोबा भावे को लिखा गया एक पत्र शामिल है।’’ रमेश ने ब्रह्म दत्त की पुस्तक ‘फाइव हेडेड मॉन्स्टर: ए फैक्चुअल नैरेटिव ऑफ द जेनेसिस ऑफ जनता पार्टी’ का भी हवाला दिया है। इस पुस्तक में वर्ष 1975 में पुणे की यरवदा केंद्रीय कारागार से देवरस द्वारा इंदिरा गांधी को लिखे गए दो पत्रों का उल्लेख है।

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आरएसएस पर लगा प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया था

पुस्तक के अनुसार, इन पत्रों में देवरस ने इंदिरा गांधी से आरएसएस पर लगा प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया था और संघ के बारे में व्याप्त ‘‘भ्रम’’ दूर करने का प्रयास किया था। उन्होंने दावा किया था कि संघ देशभर में विकास कार्यों में लगा हुआ है। पुस्तक में यह भी कहा गया है कि संघ का बिहार या गुजरात के किसी आंदोलन, जिसमें जयप्रकाश नारायण का आंदोलन भी शामिल है, से कोई संबंध नहीं था।

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देवरस ने निर्वाचन की वैधता बरकरार रखे जाने पर बधाई दी थी

रमेश के अनुसार, आचार्य विनोबा भावे को लिखे एक अन्य पत्र में देवरस ने उनसे आग्रह किया था कि वह प्रधानमंत्री के मन में संघ के बारे में बनी गलत धारणा दूर करें, ताकि संघ के स्वयंसेवकों को जेल से रिहा किया जा सके और वे देश के विकास कार्यों में भाग ले सकें। पुस्तक में कहा गया है कि विनोबा भावे को यह पत्र मुंबई के सेंट जोसिस अस्पताल के जेल वार्ड से लिखा गया था। रमेश ने यह भी दावा किया कि इंदिरा गांधी को लिखे गए एक पत्र में देवरस ने उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों द्वारा उनके निर्वाचन की वैधता बरकरार रखे जाने पर उन्हें बधाई भी दी थी।

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