चाबहार परियोजना पर जयराम रमेश का तंज, बोले- पुराने प्रोजेक्ट को नया बताकर पेश कर रही BJP सरकार

जयराम रमेश ने चाबहार परियोजना को लेकर मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह की पहल को नया बताकर पेश किया जा रहा है। परियोजना पर स्पष्टता होनी चाहिए।

फोटोः विपिन
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नवजीवन डेस्क

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक बार फिर विदेशी नीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की तारीफ की है।

जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, "1990 के दशक के उत्तरार्ध में भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं का पता लगाना शुरू किया था। अंततः तेहरान में आयोजित 16वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने इन योजनाओं को नई गति दी और मई 2013 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चाबहार में शुरुआती निवेश के लिए 115 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह निर्णय तब लिया गया था, जब भारत अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा था।"

कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, "इसके बाद अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने अपनी हमेशा की प्रवृत्ति के अनुसार डॉ. मनमोहन सिंह की चाबहार पहल को नए रूप में प्रस्तुत किया और इसे मोदी के दृष्टिकोण का हिस्सा बताया। 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया। क्या इसका मतलब यह है कि भारत ने इस परियोजना से हाथ खींच लिया है या फिर उसकी निवेश संबंधी प्रतिबद्धताएं फिलहाल पूरी हो चुकी हैं? किसी भी स्थिति में चाबहार, जो चीन द्वारा निर्मित पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से लगभग 170 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, अब नजरों में नहीं है। यह भारत की मध्य एशियाई कूटनीति के लिए दूसरा रणनीतिक झटका है, जो ताजिकिस्तान के दुशांबे के पास ऐनी में स्थित वायु सेना अड्डे को बंद करने के बाद आया है।"

वहीं, 14 मार्च की देर रात जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट पर लिखा है, "छह महीने पहले कांग्रेस ने सोनम वांगचुक के फैसले की निंदा की थी। अब मोदी सरकार ने वांगचुक पर एनएसए की कार्रवाई रद्द कर पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया है। उसका पर्दाफाश हो गया है। सरकार को न केवल वांगचुक और उनके परिवार से, बल्कि लद्दाख की जनता से भी माफी मांगनी चाहिए। शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करने के लिए हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा करना चाहिए।