जंतर-मंतर प्रदर्शन: छात्रों को SC से बड़ी राहत, गंभीर अपराध के मामलों को छोड़ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक
जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वालों को छोड़कर बाकी प्रदर्शनकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई रोक दी है।

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हत्या, रेप और पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों के मामलों वाले लोगों को छोड़कर बाकी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कोर्ट के इस रुख पर सहमति जताई।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राहत
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उनका मकसद कुछ मुद्दों पर कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना था। कोर्ट ने साफ किया कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं है और जांच उन लोगों तक सीमित होनी चाहिए जिनका आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर है।
सीजेआई ने कहा कि प्रदर्शन में ऐसे छात्र भी शामिल थे, जो अपना भविष्य बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उनके माता-पिता ने भी अपनी मेहनत और खून-पसीने की कमाई उनकी पढ़ाई पर लगाई है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने अब तक 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की है, जिनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं। उन्होंने यह भी बताया कि झड़प के दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए।
जांच के लिए हाईपावर कमेटी का ऐलान
पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाईपावर कमेटी बनाने का फैसला किया है। कोर्ट ने कहा कि कमेटी पूर्व जजों और डीजीपी स्तर के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों की देखरेख में काम करेगी। इसका मकसद मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्णायक जांच करना होगा।
सीजेआई ने कहा कि कमेटी केवल एक गोपनीय रिपोर्ट देकर अपना काम खत्म नहीं करेगी। नए मामले सामने आने पर उनकी भी जांच की जाएगी और समय-समय पर रिपोर्ट कोर्ट को दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट अंतरिम निर्देश भी जारी कर सकेगा। कोर्ट ने बताया कि कमेटी में सीबीआई के एक पूर्व डायरेक्टर जनरल और एक राज्य के पूर्व डीजीपी को शामिल करने पर सहमति बनी है। दोनों अधिकारियों का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। उनके नाम अभी ओपन कोर्ट में नहीं बताए गए हैं। कोर्ट बुधवार को कमेटी और उसके सदस्यों की आधिकारिक घोषणा कर सकता है।
दोनों पक्षों से नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। मामले से जुड़े सभी सबूत और दूसरी सामग्री नोडल अधिकारी को सौंपी जाएगी और वही उसे कोर्ट तक पहुंचाएगा। इससे आगे की सुनवाई को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन से घायल हुए लोगों और अन्य घायलों का मुद्दा उठाया। वहीं पुलिसकर्मियों की ओर से पेश वकील ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव किए जाने की बात कही। एक याचिकाकर्ता ने पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश के साथ कथित प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया। याचिकाकर्ता के वकील रिजवान अहमद ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी जिक्र किया।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल और वृंदा ग्रोवर ने अपनी-अपनी बातें स्पष्ट रूप से रख दी हैं। सुनवाई के दौरान जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल को दूसरी जगह शिफ्ट करने के सरकार के प्रस्ताव का भी जिक्र हुआ। इस पर सीजेआई ने कहा कि यह प्रशासनिक मुद्दा है और विशेषज्ञ यह देख सकते हैं कि ऐसा करना संभव है या नहीं।
सीजेआई ने कहा कि कुछ मुद्दों पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, जबकि गाइडलाइन और प्रोटोकॉल बनाने जैसे मामलों पर विस्तार से विचार करना होगा। अब सुप्रीम कोर्ट बुधवार को हाईपावर कमेटी के गठन और उसके सदस्यों के नामों की घोषणा करेगा।
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